सीतापुर : भगवद भक्ति में रत भक्त को होती है परम सुख की प्राप्ति

नैमिषारण्य-सीतापुर। भगवान के सम्मुख और उनके प्रति शरणागत होना ही भागवत कथा है। इस पावन कथा से कल्याणकारी कुछ भी नहीं है इसलिए अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर कथा जरूर सुनना चाहिए क्योंकि भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है। इसके श्रवण करने मात्र से मनुष्य अमृत हो जाता है।

उपरोक्त प्रवचन आज नैमिषारण्य स्थित बलराम धर्मशाला में माँ विन्ध्यवासी सत्संग सेवा समिति के तत्वाधान में 1008 मंहत वैदेही बल्लभ शरण की अध्यक्षता व पं देवकरण शास्त्री के पावन सानिध्य में आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास राम मुदगल महाराज ने कहीं।

आज के कथा सत्र में कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य अमृत हो जाता है। यह एक ऐसी औषधि है जिससे जन्म-मरण का रोग मिट जाता है। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। आज कथाव्यास ने श्रीकृष्ण जी के जीवन गाथा का विस्तारपूर्वक विवरण करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया।

प्रभु ने सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। वहीं महाभारत युद्ध मे गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। हर व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए। आज कथा के पांचवे दिन की पूर्णता पर कथा यजमानों द्वारा भागवत भगवान की आरती उतारी गई। इस अवसर पर कार्यक्रम व्यवस्थापक आनंद तिवारी, आयुष्मान तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागवत कथा सुनी।

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