सीतापुर : सनातन धर्म है सामाजिक सद्भाव और विश्वशांति का आधार- संत-महंत

सीतापुर। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन के पुत्र और राज्य के खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा हाल में ही चेन्नई में प्रायोजित ‘सनातन उन्मूलन परिसंवाद’ कार्यक्रम में सनातन धर्म व संस्कृत भाषा पर दिए गए विवादित बयान पर इन दिनों काफी बवाल मचा हुआ है। इस बयान में उन्होंने सनातन हिंदू धर्म की तुलना मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से की, वहीं दूसरी तरफ संस्कृत भाषा पर भी निशाना साधा। उदय स्टालिन के इस अपमानजनक बयान पर पूरे देश में भाजपा सहित विभिन्न दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया दी। वही देश-प्रदेश के संत-महंतों ने भी जबरदस्त विरोध दर्ज कराया है। इसी कड़ी में नैमिषारण्य तीर्थ के संत महंतों, बुद्धिजीवियों ने भी इस ज्वलन्त मुद्दे पर दैनिक भास्कर के माध्यम से अपनी बात रखी।

महंत सूत गद्दी मनीष शास्त्री कहते हैं कि आज जब पूरे विश्व मे लोग सनातन धर्म के अतुल्य ज्ञान और शिक्षाओं को नमन वंदन कर रहे है ऐसे में राजनीतिक तुष्टिवाद के चलते ऐसे घृणित बयान अक्षम्य है। दक्षिण भारत मे भी बड़ी संख्या में सनातनधर्मी है सभी को उचित विरोध दर्ज कराकर ऐसे लोगों के विरुद्ध जरूरी कार्यवाही करनी चाहिए। कालीपीठाधीश्वर तथा माँ ललिता देवी मंदिर के प्रधान पुजारी गोपाल शास्त्री कहते हैं कि इनके परिवार के ही एम करुणानिधि व इनके पिता का हिन्दू धर्म के प्रति दुराभाव जगजाहिर रहा है। बयान पर एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए। इंडिया से भारत होना कितना जरूरी है, ये सोच प्रकट करती है। देश के सहिष्णु बहुसंख्यक अनुयायियों पर इस हमले का जवाब जनता भी जल्द ही वोट के माध्यम से इन्हें देगी।

तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टॉलिन के बयान पर सन्त महंतों ने निंदा कर दी प्रतिक्रिया

महंत/सचिव बनगढ़ आश्रम व 84 कोसीय परिक्रमा समिति संतोष दास खाकी कहते हैं कि ये बयान तुच्छ राजनीति से प्रेरित है जबकि हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख इन सभी अनुयायियों के धर्मग्रन्थों में सनातन की स्वीकार्यता है। ऐसे बयान इन सभी मतावलम्बियों का अपमान है। सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा है जिसका ज्ञान प्रामाणिकता व वैज्ञानिक आधार पर खरा उतरता है। ऐसे लोगों को सनातन धर्म को पढ़ना, समझना चाहिए। ऐसे बयान इन लोगों को जल्द ही जनता सी नजरों से ओझल कर देंगे। हनुमान गढ़ी के महंत बजरंग दास कहते हैं कि सनातन धर्म की महिमा अनन्त है। इसका मर्म ही ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के भाव का पोषक है। तुष्टिकरण के उद्देश्य से दिया गया उपरोक्त बयान निंदनीय है। उपरोक्त प्रकरण में जरूरी कार्यवाही होनी चाहिए।

महाकाल महाकाली मंशा देवी के महंत बिहारी लाल कहते हैं कि देश का सहिष्णु बहुसंख्यक समाज पूरे विश्व मे सामाजिक सद्भाव के लिए जाना जाता है। ऐसे राजनीतिक लोग वोटों के लालच में घृणित बयान देते है। सनातन धर्म उस समय भी था जब कोई धर्म नही था और तब भी प्रासंगिक रहेगा जब मानव अपने मूल पथ से भ्रमित होगा। हाँ ऐसे बयान वाले लोग जरूर पटल से गायब हो जाएंगे।

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