श्रीलंका आर्थिक संकट : बढ़ते विदेशी कर्ज के बीच नौ नए कैबिनेट मंत्रियों ने ली शपथ

श्रीलंका पिछले कुछ महीनों से आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। विदेशी कर्ज बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच 9 नए कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ ली। श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (SLFP) के पूर्व मंत्री निमल सिरिपाला डी सिल्वा, निर्दलीय सांसद सुशील प्रेमजयंता, विजयदास राजपक्षे, तिरान एलेस समेत 9 मंत्रियों को राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शपथ दिलाई। पिछले हफ्ते 4 मंत्रियों ने शपथ ली थी।

कैबिनेट में शामिल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत 25 सदस्य

रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका की कैबिनेट में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत 25 सदस्य होंगे। निमल सिरिपाला डी सिल्वा पोर्ट्स को नौसेना और एविएशन सर्विसेज मंत्री होंगे। सुशील प्रेमजयंता को शिक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके अलावा केहेलिया रामबुकवेला ने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शपथ ली और विजयदास राजपक्षे ने न्याय, जेल मामलों, संवैधानिक सुधार मंत्री के रूप में शपथ ली।

जानिेए ये

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हो रही झड़प को देखते हुए श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी कि देश को फ्यूल और रसोई गैस शिपमेंट के पेमेंट के लिए विदेशी मुद्रा मिली है। इससे थोड़ी राहत मिलेगी।

कुछ महीने पहले देश में आर्थिक संकट शुरू हुआ

कुछ महीने पहले देश में आर्थिक संकट शुरू हुआ। अब दिवालिया होने का खतरा है। धीरे-धीरे यह साफ होता चला गया कि राजपक्षे परिवार ने अपने सियासी रसूख का बेहद गलत इस्तेमाल किया। राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे। कैबिनेट मिनिस्टर्स में भी घोर भाई-भतीजावाद। देश दिन-ब-दिन गर्त में जाता रहा और राजपक्षे परिवार ऐश-ओ-आराम की जिंदगी जीता रहा। पानी जब गले तक आ गया तो राष्ट्रपति गोटबाया ने भाई महिंदा को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया। प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की अगुआई में नई यूनिटी सरकार बनी।

श्रीलंका में गहराया आर्थिक संकट

1948 में आजादी के बाद यह श्रीलंका का सबसे गंभीर आर्थिक संकट माना जा रहा है। रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम आसमान पर हैं, खाने-पीने के सामान का संकट और ईंधन भी आसानी से नहीं मिल रहा है। इन सबके चलते श्रीलंका के आम लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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