संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्रों ने बनाई इलेक्ट्रिक बग्घी

भास्कर समाचार सेवा
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने एक बेहतरीन आफ रोड इलेक्ट्रिक बग्घी निर्माण कर नई संभावनाओं को जन्म दिया है। एक कार्यक्रम के मध्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने इस बग्घी को लांच करते हुए विद्यार्थियों के इस प्रयास की सराहना की है।
कार्यक्रम के कोर्डिनेटर विनसेंट बालू ने जानकारी देते हुए बताया कि इलेक्ट्रिक बग्घी मूल रूप से एक हल्का ऑफ-रोड वाहन है। इसे विशेष रूप से रेतीले और ऑफ रोड इलाकों में यात्रा करने के लिए बनाया गया है। इस विद्युत बग्घी को डिजाइन और तैयार करने का मूल उद्देश्य ऑटोमोबाइल क्षेत्र में विद्युतीकरण की विश्वसनीयता और प्रगति को बढ़ावा देना है। इस बग्घी को 500 किलोग्राम तक भार ढोने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस छोटी गाड़ी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह से उत्सर्जन मुक्त है और 40 किमी प्रति घंटा तक की गति से चल सकती है और एक बार चार्ज करने के बाद 80 किमी (लगभग) की दूरी तक चल सकती है। इस छोटी गाड़ी मॉडल की भविष्य की संभावनाएं को देखते हुए इस मॉडल को गैर- पारंपरिक ऊर्जा संसाधन का प्रयोग कर पूरी तरह से स्वचालित बनाना है।
संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने इलेक्ट्रिक बग्घी का अनावरण करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन बनाने में छात्रों के कठिन प्रयासों और नवोन्मेष की दृढ़ इच्छा समाहित है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यार्थी वक्त की जरूरत को देखते हुए नए अविष्कारों के बारे में सोचें और उन्हें धरातल पर लाएं। इस मौके पर इलेक्ट्रिक बग्घी का टेस्ट ड्राइव भी हुआ और वह पूरी तरह से सफल रहा। इस इलेक्ट्रिक बग्घी का निर्माण बी.टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के छात्रों के कठिन और निरंतर प्रयासों के बाद संभव हो पाया। छात्र थोकचोम, सतीश, मोनू, दीपक, जीवन और अखिलेश ने इसको मूर्त रूप दिया। इसे मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के फैकल्टी अंशुमन सिंह और अन्य फैकल्टी व लैब स्टाफ के मार्गदर्शन में विकसित किया गया है। कार्यक्रम के पूर्व अनुजा गुप्ता द्वारा स्वागत भाषण दिया गया और इलेक्ट्रिक बग्घी के लाभों और उपयोग के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई।

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