राहुल के सामने छलका मजदूरों का दर्द, बोले- भले गांवों में ही थोड़ा काम कर खाएंगे लेकिन परदेश का रास्ता नहीं पकड़ेंगे

नई दिल्ली । देशभर में जारी लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को हो रही समस्याओं को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को अपने यूट्यूब चैनल पर एक डॉक्यूमेंट्री (वित्तचित्र) जारी किया। इस डॉक्यूमेंट्री में हरियाणा में कार्य करने वाले प्रवासी मजदूरों को दिखाया गया है, जो झांसी (उत्तर प्रदेश) जाने को पैदल निकले हैं। इस बीच राहुल गांधी उनसे दिल्ली में मुलाकात करते हैं और उनकी समस्याओं को लेकर उनसे बात करते हैं।

राहुल गांधी मजदूरों से पूछते हैं कि क्या उनके पास पैसा, पर्याप्त भोजन आदि है की नहीं? लॉकडाउन की वास्तविक स्थिति का आभास कब हुआ और कैसे इसके बारे में पता चला? इस पर मजदूरों ने बताया कि वो झांसी (उप्र) के निवासी हैं और हरियाणा की एक फैक्टरी में काम कर रहे थे तभी तालाबंदी हुई। बिना किसी मदद के वो जबतक वक्त गुजार सके वहां रहे फिर बच्चों की खातिर पैदल ही अपने गांव के लिए निकल पड़े। उन्होंने बताया कि उन्हें एक पैसे की भी मदद किसी से नहीं मिली। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण को लेकर स्थानीय लोग प्रवासियों के प्रति बहुत खराब रवैया अपनाते थे और घर से भी बाहर नहीं निकलने देते थे।

प्रवासी मजदूरों में एक महिला ने कहा कि उन्हें उनके गांव पहुंचने में मदद कीजिए। उन्हें हरियाणा वापस नहीं जाना है। उन्होंने यहां तक कहा कि अब भविष्य में स्थिति सुधरेगी तब भी वो शहरों की ओर नहीं आएंगे, भले गांवों में ही थोड़ा काम कर खाएंगे लेकिन परदेश का रास्ता नहीं पकड़ेंगे। इस बातचीत के दौरान एक महिला प्रवासी मजदूर ने जब मदद की गुहार लगाई तो राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बात कर सभी को उनके गन्तव्य स्थान तक छोड़ने को कहा।

राहुल गांधी ने अपनी इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए कहा कि सरकार को इन मजदूरों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि श्रमिकों के खातों में पैसे हस्तांतरित किए जाने चाहिए। 13 करोड़ परिवार को साढ़े सात हजार रुपये सरकार दे। वीडियो के अंत में राहुल ने कहा, ‘मेरे प्रवासी श्रमिक भाई-बहनों आप इस देश की शक्ति हो। हिन्दुस्तान की शक्ति को सक्षम बनाना हमारा कर्तव्य है।’

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