यूपी : कोरोना की वृद्धि पर आगरा के बाद कानपुर के सीएमओ पर गिरेगी गाज!

नोडल अधिकारी ने भी शिकायत पर पायी थी लापरवाही

कोरोना पॉजिटिव मृतक का नहीं लिया गया था सैंपल

समय से नहीं आती जांच रिपोर्टे, कोविड-19 लैब से ठीक नहीं है तालमेल

कानपुर,। कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया इन दिनों परेशान है और इससे उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं है। तो वहीं प्रदेश में ताज नगरी आगरा और औद्योगिक राजधानी कानपुर नगर में जिस तरह से कोरोना का संक्रमण बेतहासा से बढ़ रहा है उससे शासन की भी नींद हराम हो गयी है। इसी के चलते आगरा के सीएमओ सहित दो प्रमुख स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर शासन ने गाज गिरा दी है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिस प्रकार कोरोना को लेकर लापरवाही बरती गयी तो किसी भी समय शासन संज्ञान लेकर यहां के सीएमओ पर गाज गिरा सकता है। यही नहीं कोविड-19 के नोडल अधिकारी भी सीएमओ की कार्य शैली से बेहद खफा हैं और रोजाना रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज रहे हैं।

वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए कानपुर में 23 मार्च से लॉकडाउन जारी है। 23 मार्च को ही यहां पर पहला कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया था। इसके बाद से कानपुर नगर की हालत रोजाना बिगड़ती ही चली गयी और कोरोना संक्रमण के मामले में तिहरा शतक पार कर गया। यहां पर अब तक 301 कोरोना पॉजिटिव मरीज आ चुके हैं। यही नहीं प्रदेश को राजधानी लखनऊ को पछाड़ लगातार दूसरे नंबर पर बरकरार है और सूबे में सिर्फ ताज नगरी आगरा ही करीब साढ़े सात सौ मरीजों के साथ आगे है। इसी को लेकर अब शासन ने दोनों महानगरों की बिगड़ती हालत को देख कड़ी नाराजगी व्यक्त की और आगरा में सीएमओ सहित दो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का निलंबन कर दिया। वहीं कानपुर नगर की जमीनी हकीकत व अब तक हुए प्रयासों की नोडल अधिकारी के जरिये रोजाना रिपोर्ट शासन मांग रहा है। नोडल अधिकारी अनिल गर्ग शासन को क्या रिपोर्ट दे रहे है यह तो वही बता सकते हैं, पर जिस तरह से प्रमुख सचिव व नोडल अधिकारी का सीएमओ डा. अशोक कुमार शुक्ला के प्रति रुख दिख रहा है उससे साफ है कि रिपोर्ट सीएमओ के खिलाफ ही गयी होगी।

नोडल अधिकारी सीएमओ से हैं बराबर खफा

शासन द्वारा नामित कोविड-19 नोडल अधिकारी अनिल गर्ग इन दिनों रोजाना दिन भर के हुए कार्यों व आगामी रणनीति के लिए मंडलायुक्त कार्यालय में आलाधिकारियों के साथ बैठक करते हैं। शायद ही ऐसा कोई दिन रहा हो जिस दिन नोडल अधिकारी सीएमओ को फटकार न लगाते हों। यही नहीं मंडलायुक्त भी नाखुश रहते हैं और बराबर दिशा निर्देश देते रहते हैं।

इन मामलों में सीएमओ को लगी फटकार

कुलीबाजार के ब्रश कारोबारी की मंगलवार (21 अप्रैल) दिन में अचानक तबीयत खराब हो गई थी और स्वजन उन्हें लेकर उर्सला अस्पताल पहुंचे लेकिन देर रात उनकी मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने बगैर किसी पूछताछ के शव स्वजनों को सौंप दिया। बुधवार सुबह स्वजन दाह संस्कार करने भैरव घाट पहुंचे तो नगर निगम के कर्मचारियों ने पूछताछ की। बेटे व परिजनों ने पूरी जानकारी दी तो कर्मियों ने जिलाधिकारी को जानकारी दी। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश के बाद स्वास्थ्य टीम ने घाट पर जाकर शव से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। गुरुवार यानी 23 अप्रैल को केजीएमयू से आई जांच रिपोर्ट में मृतक के साथ उसके कारोबारी बेटे में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इस मामले को लेकर नोडल अधिकारी ने सीएमओ को जमकर फटकार लगायी। इसके साथ चकेरी की एक कोरोना पॉजिटिव महिला की बेटी कंट्रोल रुम जानकारी दी कि मुझे भी कोरोना के लक्षण है। इस पर जिला अस्पताल के कंट्रोल रुम ने उसकी जांच भी नहीं करवाई, जिसकी शिकायत की गयी थी। विभाग के लोगों का फोन न उठाना और कोविड-19 लैब से तालमेल न होना भी फटकार का कारण बना। वहीं जनपद में रोजाना कितने लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की गयी और स्वास्थ्य विभाग कितने ऐसे लोगों का डाटा एकत्र किये जो बाहरी जगह से आये हैं। इन सभी सवालों के जवाब गोल माल रहते हैं, जिससे नोडल अधिकारी सीएमओ से खफा चल रहे हैं।

दूसरे नंबर पर बरकरार है कानपुर

दुनियाभर में तांडव मचा रहा कोरोना वायरस थमने का नाम नहीं ले रहा। इसके चलते रोजाना भारत में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। वहीं यूपी में रोजाना कोरोना संक्रमित के नए नए केस सामने आ रहे है। यूपी के कानपुर में भी कोरोना पीड़ितों के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। आगरा, के बाद कानपुर कोरोना संक्रमितों के मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। जबकि कानपुर में पहला पॉजिटिव केस 23 मार्च को आया था और 49दिन बाद 301 के आंकड़े के साथ यूपी में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। यहां पर छह कोरोना मरीजों की मौत भी हो गयी है। पहला कोरोना मरीज 15 दिन के इलाज के बाद सही हो गया और वह घर पर क्वारंटाइन में है। इसी तरह दो विदेशी तब्लीगी जमाती सहित यहां पर अब तक 58 कोरोना पॉजिटिव मरीज सही हो चुके हैं, जिन्हे हैलट के कोविड-19 अस्पताल, कांशीराम ट्रामा सेंटर और सरसौल के आइसोलेशन वार्ड से छुट्टी कर दी गयी है।

झारखण्ड का युवक कर चुका है आत्महत्या

कानपुर देहात जनपद में 29 अप्रैल को पकड़ा गया कोरोना पॉजिटिव झारखण्ड के भादोही साहेबगढ़ निवासी 32 वर्षीय युवक को कानपुर नगर के सरसौल आइसोलेशन वार्ड में 30 अप्रैल को भोर पहर भर्ती कराया गया था। यहां पर युवक ने सेनीटाइजर पीकर आत्महत्या का प्रयास कर लिया। सेनिटाइजर पीता देख मेडिकल स्टॉफ ने फौरन सेनिटाइजर की शीशी छुड़ाई और तबीयत खराब होता देख कांशीराम ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया जहां पर डाक्टरों ने हालत नाजुक देख तत्काल गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कालेज से संबद्ध लाला लाजपत राय (हैलट) अस्पताल रेफर कर दिया। यहां पर युवक को कोविड-19 हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम ने इलाज शुरु कर दिया, लेकिन कुछ ही घंटों में युवक ने दम तोड़ दिया। इस पर भी सीएमओ की ओर से लापरवाही बरती गयी और अगले दिन जानकारी दी कि युवक की मौत हो गयी है। हालांकि इसकी गिनती कानपुर नगर में नहीं की गयी, क्योंकि कोराना गाइड लाइन के अनुसार जो व्यक्ति जहां पर क्वारंटाइन होता है उसकी गिनती उसी जनपद से होती है।

समय से नहीं आ रही जांच रिपोर्टे

कोरोना के उपचार के लिए तैयार सिस्टम का आलम यह है कि लोगों का भरोसा ही उठता जा रहा है । पहले कहा गया था कि एक दिन में सौ जांचे गणेश शंकर मेडिकल कालेज की लैब से होंगी, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। दो-दो दिन रिपोर्ट पड़ी रहती हैं और उनके विषय में कुछ जानकारी ही नहीं दी जा रही है। जो सैंपल लखनऊ भेजी जाती हैं तो उनमें तो कई दिन लग जाते हैं। इसी को लेकर नोडल अधिकारी खफा हैं और बार-बार सख्त निर्देश दे रहे हैं कि समय से जांच रिपोर्ट मिले और कोविड-19 लैब से बेहतर तालमेल बनाये रखा जाये।

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