US का सख्त कदम : 4 मई से अमेरिका नहीं जा सकेंगे भारतीय, जानिए क्या है वजह

अमेरिका ने भारत में कोविड-19 के नए और खतरनाक वैरिएंट को देखते हुए शुक्रवार रात एक सख्ता फैसला लिया। जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने 4 मई से भारत से आने वालों लोगों पर रोक लगा दी है। व्हाइट हाउस ने यह घोषणा की। बयान में कहा गया है कि भारत में फैला वायरस खतरनाक है, इसके कुछ और वैरिएंट्स भी हो सकते हैं। लिहाजा, ऐहतियात के तौर पर भारत से आने वाले लोगों पर पाबंदी लगाई जा रही है, ताकि अमेरिका में हालात खराब न हों। अमेरिकी सरकार ने यह फैसला हेल्थ डिपार्टमेंट की सलाह पर लिया है।

इसके पहले गुरुवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की थी। यूएस न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा था। शुक्रवार को जैसे ही यह रिपोर्ट मिली, इसके बाद भारत से आने वाले लोगों पर पाबंदियां लगा दी गईं। इस बारे में विस्तार से जानकारी अमेरिकी विदेश विभाग बाद में देगा।

भारत में हालात चिंताजनक
व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा गया- भारत से आने वालों लोगों पर पाबंदियां इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि वहां कोवड-19 की दूसरी लहर से हालात बेहद खराब हो चले हैं। भारत में कोविड के कई वैरिएंट्स सर्कुलेट हो रहे हैं और वहां स्थिती चिंताजनक है।

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत में शुक्रवार को 3.86 लाख मामले सामने आए हैं। अमेरिका के बाद भारत में ही सबसे ज्यादा मामले अब तक दर्ज किए गए हैं। अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वास्तविक आंकड़े इससे अलग और ज्यादा गंभीर हैं।

अमेरिकी मदद जारी रहेगी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर लंबी बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने भारत को पूरी मदद का भरोसा दिलाया था। इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर दो दिन में दो बार बातचीत की। अमेरिका से कुछ मेडिकल एड पहले ही भारत पहुंच चुकी है। इनमें ऑक्सीजन कन्सनट्रेटर्स और वेंटिलेटर्स शामिल हैं।

नागरिकों को भारत छोड़ने की सलाह दी थी
गुरुवार को अमेरिका ने अपने नागरिकों को जल्द से जल्द भारत छोड़ने की सलाह दी थी। एक एडवाइजरी जारी की गई थी। इसमें कहा गया था कि भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से चिकित्सीय देखभाल के संसाधन सीमित हो गए हैं।

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