वीरीना फाउंडेशन ने 21 महिला क्षय रोगियों को लिया गोद

भास्कर समाचार सेवा

मेरठ। जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग विभाग में क्षय रोगियों को गोद लेने और पोषाहार वितरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में वीरीना फाउंडेशन ने 21 महिला क्षय रोगियों को गोद लेने की घोषणा के साथ ही उपचार जारी रहने तक उनकी देखरेख करने और पोषाहार उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली। इसके अलावा राज्यसभा सदस्य कांता कर्दम के पुत्र आशीष कर्दम ने भी टीबी से ग्रसित 21 महिलाओं को पोषाहार, सेनेटरी पैड, सैनिटाइजर और मास्क वितरित किए। उन्होंने अपना जन्मदिन भी इन्हीं लोगों के बीच मनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डा. अखिलेश मोहन ने टीबी से ग्रसित महिलाओं को पोषण वितरण कर किया। उन्होंने वीरीना फाउंडेशन की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए महिला रोगियों को गोद लेने के निर्णय की सराहना की। वीरीना फाउंडेशन के निदेशक धीरेन्द्र सिंह ने बताया, संस्था पिछले कई वर्षों से नारी शक्ति को लेकर कार्य कर रही है। संस्था ने प्रदेश सरकार द्वारा ब्लॉक स्तर पर आयोजित विशेष स्वास्थ्य मेलों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए महिलाओं को एनीमिया के प्रति जागरूक किया और सेनेटरी पैड, मास्क व सैनिटाइजर का वितरण किया। उन्होंने कहा, वीरीना फाउंडेशन महिलाओं के उत्थान को लेकर निरंतर सक्रिय है, इसी क्रम में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए टीबी पीड़ित माताओं और बहनों को गोद लेने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी देखभाल करते हुए सही समय पर दवा तथा पुष्टाहार देकर उनका आत्मबल बढ़ाया जा सके और टीबी के खिलाफ उनकी लड़ाई को मजबूत किया जा सके। इस अवसर पर फाउन्डेशन की ओर से 21 महिला क्षय रोगियों को पुष्टाहार किट दी गई। इस मौके पर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की जिला समन्वयक नेहा सक्सेना, टेक्नीशियन अंजू गुप्ता, अजय सक्सेना, वीरीना फाउंडेशन के सचिव अनुज प्रधान, डा. अभिराज, मैनेजर कृति चौधरी, जयकांत आदि मौजूद रहें।   सीफार संस्था से मिली प्रेरणा वीरीना फाउंडेशन के निदेशक ने बताया, टीबी के मरीजों को गोद लेने की प्रेरणा सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सी फॉर) संस्था से मिली। सीफार के जिला समन्वयक ने उन्हें बताया कि किस तरह टीबी मरीजों को गोद लेकर क्षय उन्मूलन में सहयोग किया जा सकता है। जिला क्षय रोग विभाग से समन्वय स्थापित कर उन्होंने टीबी रोगियों को गोद लेने में सहयोग किया। वर्जन जिला क्षय रोग अधिकारी डा. गुलशन राय ने बताया, टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। समय पर उपचार मिलने पर टीबी मरीज ठीक हो जाता है। टीबी का उपचार पूरी तरह निशुल्क है। इसका पूरा उपचार करना चाहिये। आधा-अधूरा उपचार टीबी को और बिगाड़ देता है। सरकार निक्षय पोषण योजना के तहत हर टीबी मरीज को उपचार चलने तक पांच सौ रुपये प्रतिमाह देती है। यह राशि मरीज के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाती है।

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