
Seema Pal
Waqf Bill : वक्फ संशोेधन विधेयक (वक्फ बिल) को आज संसद में पेश कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को पेश करते हुए इसकी तारीफ की। उन्होंने अपनी चर्चा में बताया कि वक्फ बिल से डरने की जरूरत नहीं है, यह मुस्लिमों के हित में हैं। बहस में बिल को लेकर चर्चा जारी है। विपक्षी दलों ने इसका बहिष्कार करना शुरू कर दिया गया है।
संसद में जब बिल पास हुआ तो सत्तारूढ़ एनडीए के पास पर्याप्त संख्या में वोट हैं। इससे बिल आसानी से पास हो गया। अब बिल पास होने के बाद जब यह कानून बनेगा तो ये जानना भी जरूरी है कि क्या कुछ बदल जाएगा। वक्फ बोर्ड के अधिकारों में क्या होगा और क्या छिन जाएगा।
वक्फ बिल को सभी वक्फ बोर्ड डरे हुए हैं और बिल का विरोध कर रहे हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि वक्फ बिल है क्या और बोर्ड से इसका क्या संबंध है? वक्फ बिल एक ऐसा कानून है जो वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन और उपयोग पर नियंत्रण रखता है। इसके अंतर्गत, वक्फ की जमीनें और मदरसे, कब्रिस्तान, कृषि भूमि और धर्माथ संस्थान शामिल हैं। अभी तक इन संपत्तियों का ब्यौरा और अधिकार केवल वक्फ बोर्ड के पास हैं, लेकिन अब इस विधेयक के पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड के अधिकारों का परिवर्तन हो जाएगा।
वक्फ बिल की संपत्ति पोर्टल पर दिखेगी
वक्फ बिल के आने के बाद वक्फ बोर्ड के पास जितनी जमीनें रजिस्टर्ड हैं, उनके अलावा अब अन्य किसी विवादित जमीन पर वक्फ अपना दावा नहीं कर पाएगा। क्योंकि नए वक्फ बिल के अनुसार, अब वक्फ से जुड़े मामले ट्रिबुनल कोर्ट के बाद सिविल कोर्ट में चलेंगे। बोर्ड अब केवल उन्ही जमीनों का दावा कर सकेगा जो पहले से सत्यापित और बोर्ड के पास रजिस्टर्ड हैं। यहां बता दें कि पहले ट्रिबुनल कोर्ट का फैसला आखिरी माना जाता था लेकिन अब वक्फ की विवादित जमीन के दावे को सिविल कोर्ट, हाई कोर्ट और उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जा सकेगी। जिससे अब वक्फ किसी भी जमीन पर आसानी से दावा नहीं कर पाएगा। इस बिल के तहत अब वक्फ की सारी संपत्ति पोर्टल पर दर्ज होगी।
इन संपत्तियों का होगा सत्यापन
अगर सरकारी सरकारी संपत्ति पर दावा किया तो जांच की जाएगी। साथ ही इस्तेमाल के आधार पर किसी जमीन पर वक्फ का दावा स्वीकार नहीं होगा। बिल में कहा गया है कि वक्फ की जिन संपत्तियों पर नमाज पढ़ी जाती है, उनमें कोई दखल नहीं दिया जाएगा। पंजीकृत संपत्तियों में कोई दखल नहीं होगा। खास बात है कि वक्फ किसी भी आदिवासी इलाके में संपत्ति होने का दावा नहीं कर सकेगा।