क्या है “वक्फ” शब्द का मतलब, कौन से बदलावों पर हो रहा है विचार? जानिए

अंकुर त्यागी

आज लोक सभा में नया वक्फ बिल पेश किया जायेगा, इस वक्फ विधेयक में पिछले अधिनियम के तुलना में कई बदलाव किये जायेंगे और अगर यह वक्फ संसोधन विधेयक आज लोकसभा में पास हो जायेगा तो यह कानून बन जायेगा।

आपको बताते चलें कि इस वक्फ बिल के कानून बन जाने के बाद राज्य सरकारों का वक्फ की संपत्ति पर उपजे विवाद और अटकलों को निस्तारित करने के लिए पहले से ज़्यादा अधिकार मिल जायेंगे। वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम व्यक्तियों को भी शामिल करना भी इस वक्फ बिल में अनिवार्यता की श्रेणी में रखा गया है, आपको बताते चलें की नए वक्फ संसोधन विधेयक में यह भी कहा गया है की इसका प्रभाव पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और अन्य धार्मिक स्थानों से नहीं होगा। आईये आपको बताते हैं की दरअसल यह वक्फ है क्या और अभी इसमें क्या बदलाव होंगे …

क्या है वक्फ शब्द का मतलब

आपको बता दें कि वर्तमान की राजनीती और मुद्दे में वक्फ शब्द का ट्रेंड जोरों पर है लेकिन क्या आपको वक्फ का मतलब पता है ? अगर नहीं, तो हम बताते हैं इसका मतलब … दरअसल वक्फ एक अरबी भाषा का शब्द है और जिसका मतलब होता है रोकना या स्थिर करना और अगर आसान भाषा में समझे तो ‘ यदि कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी जमीन या प्रॉपर्टी धार्मिक कारणों के चलते दान कर देता था तो उसको वक्फ कर देना कहा जाता था। इस दान की हुई जमीन की देख रेख करने के लिए एक बोर्ड का गठन किया गया जो वक्फ बोर्ड के नाम से जाना जाता है जो सभी राज्यों में कार्य करता है।

वक्फ में कौन से बदलावों को लेकर विचार हो रहा है

आपको बताते चलें कि यह बिल मौजूदा वक्फ कानून में लगभग 40 बदलावों का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत वक्फ बोर्डों को सभी संपत्ति दावों के लिए अनिवार्य सत्यापन से गुजरना होगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

इसका उद्देश्य वक्फ बोर्डों की संरचना और कामकाज को बदलने के लिए धारा 9 और 14 में संशोधन करना है, जिसमें महिलाओं के लिए प्रतिनिधित्व को शामिल किया गया है।

इसके अलावा, विवादों को निपटाने के लिए वक्फ बोर्डों द्वारा दावा की गई संपत्तियों का नया सत्यापन किया जाएगा और दुरुपयोग को रोकने के लिए, जिला मजिस्ट्रेट वक्फ संपत्तियों की निगरानी में शामिल हो सकते हैं।

वक्फ बोर्ड को मिली हैं ये शक्तियां

आपको बताते चलें कि अगर आपकी संपत्ति को वक्फ की संपत्ति बता दी गई तो आप उसके खिलाफ कोर्ट नहीं जा सकते। आपको वक्फ बोर्ड से ही गुहार लगानी होगी। वक्फ बोर्ड का फैसला आपके खिलाफ आया, तब भी आप कोर्ट नहीं जा सकते। तब आप वक्फ ट्राइब्यूनल में जा सकते हैं। इस ट्राइब्यूनल में प्रशासनिक अधिकारी होते हैं। उसमें गैर-मुस्लिम भी हो सकते हैं। वक्फ एक्ट का सेक्शन 85 कहता है कि ट्राइब्यूनल के फैसले को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है।

कांग्रेस के नरसिम्हा राव सरकार में बढ़ी थी वक्फ बोर्ड की शक्तियां

1954 में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ। लेकिन 1995 के संशोधन से वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दी गयी। पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार ने वक्फ एक्ट 1954 में संशोधन किया और नए-नए प्रावधान जोड़कर वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियां दे दीं। वक्फ एक्ट 1995 का सेक्शन 3(आर) के मुताबिक, अगर कोई संपत्ति, किसी भी उद्देश्य के लिए मुस्लिम कानून के मुताबिक पाक , मजहबी या परोपरकारी मान लिया जाए तो वह वक्फ की संपत्ति हो जाएगी। वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा। बाद में वर्ष 2013 में संशोधन पेश किए गए, जिससे वक्फ को इससे संबंधित मामलों में असीमित और पूरे अधिकार मिले।

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