लुटेरों की गोली से घायल पंप मालिक ने तोडा दम

गोपाल त्रिपाठी 
– व्यापारियों ने एनएच 29 पर पुलिस बूथ के सामने लगाया जाम
-एक घण्टे तक लगे जाम से सड़क दोनों तरफ वाहनों की लगी रही लंबी कतार
– लूटकांड के खुलासे पर व्यापारियों ने जताया असंतोष
गोरखपुर। बीते आठ अप्रैल को लुटेरों की गोली से घायल पेट्रोल पंप मालिक उमेश गुप्ता की बुधवार की रात आजमगढ स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। जिसके बाद आक्रोशित व्यापारियों ने गुरूवार को एनएन 29 स्थित दोहरीघाट पुलिस बूथ के सामने शव को सडक पर रख कर जाम लगा दिया।
दोहरीघाट स्थित गुप्ता पेट्रोल पंप के मालिक उमेश गुप्ता आठ अप्रैल को बैंक में पैसा जमा करने गए थे। बैंक के सामने ही लुटेरों ने गोली मार कर 18 लाख रूपया लूट लिया था। घटना के एक सप्ताह के भीतर पुलिस ने गोरखपुर जनपद के तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर सात लाख रूपया बरामद कर मामले का पर्दाफाश कर दिया। लुटेरों के गैंग का मुख्य सरगना अभी भी फरार चल रहा है। इस बीच बीती रात इलाज के दौरान पंपमालिक की मौत के बाद व्यापारी उग्र हो गए। अगले दिन सुबह व्यापारियों ने शव को सडक पर रख कर जाम लगा दिया।
व्यापारियों ने पुलिस के खुलासे पर असंतोष जताते हुए पुलिस पर मुख्य आरोपी व मुखबिर को बचाने का आरोप लगाया। व्यापारियों का कहना था कि बिना किसी स्थानीय मुखबिर के दूसरे जिले के बदमाशो द्वारा इस घटना को अंजाम नही दिया जा सकता। जो भी बदमाश पकड़े गए है वह भी घटना को अंजाम देने वाले बदमाशो से मेल नही खा रहे हैं।
थानाध्यक्ष नीरज पाठक व्यापारियों को बार बार जल्द मुख्य आरोपी को पकड़ने का आश्वासन व दावा करते रहे लेकिन व्यापारी पूरी तरह से उनकी बातों को नकारते हुए उच्चाधिकारियों द्वारा लिखित रूप से मांगो को पूरा करने पर अड़े रहे। इस बीच सड़क के दोनों किनारे गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रही। करीब एक घंटे के बाद सीओ घोसी नंदलाल द्वारा 48 से 72 घण्टे के अंदर भूमिगत बदमाशो व मुखबिर को पकड़ने, व्यापारियों की सुरक्षा, बैंको व सुरक्षा, बैंको व उसके आने जाने वाले रास्तो पर पुलिस की तैनाती, पुलिस बूथ व कस्बे के चैराहों को सीसी कैमरे से लैस करने, खुलासे में पुलिस द्वारा लूटकांड में 18लाख नब्बे हजार रुपये की जगह 13 लाख दिखाने गया जोकि गलत है
पूरा रुपया बरामद करने की मांग पर आश्वासन देने के बाद जाम हटाया गया। इसके बाद शव को मुक्तिधाम घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। जहां मृतक के पिता रामअवध गुप्त ने मुख्याग्नि दी। दौरान पूर्व चेयरमैन गुलाबचंद गुप्त, नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष विनय जायसवाल, चेयरमैन वेदाना सोनकर, डॉ एचएन सिंह पटेल, मनोज राजभर, अरबिंद साहू, पंकज मद्धेशिया, अमीरचंद, मनोज जायसवाल, गोपाल जायसवाल, कृष्णगोपाल, विनोद वर्मा, उमेश चंद, दीपेंद्र गुप्त, बाबूलाल, अजय गुप्ता, सुरेंद्र साहू, विजय गुप्त, लक्ष्मण, कमलेश पाल सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
इन बदमाशों को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
पेट्रोल पंप मालिक उमेश गुप्ता को गोली मार कर लूट की घटना को अंजाम देने वाले बदमाश गोरखपुर जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर निवासी प्रेम साहनी, तिवारीपुर थाना क्षेत्र के माधवापुर निवासी गणेश गौड व विशाल उर्फ मंटू निषाद को पुलिस ने गिरफ्तार कर सात लाख रूपया बरामद किया था। जबकि गैंग का सरगना मुख्य आरोपी गोला थाना क्षेत्र का सहडौली निवासी बृजेन्द्र नारायण राय उर्फ झिनकू राय अभी भी फरार चल रहा है।
मुख्य अभियुक्त के खिलाफ कुर्की की नोटिस चस्पा
दोहरीघाट पेट्रोल पंप मालिक को गोली मार कर 18 लाख की लूट की घटना को अंजाम देने वाले बदमाश बृजेंद्र राय उर्फ झिनकू राय पुत्र प्रसिद्ध नारायण राय निवासी मन्नीपुर सहरौली थाना गोला पर तिवारीपुर थाना क्षेत्र के एक मामले में फरार होने पर एसएसआई सत्य प्रकाश ने डुगडुगी बजवा कर आम व खास को सूचित किया कि मुकदमा अपराध संख्या 158 ध् 18 धारा 302, 307, 34 ,216 आईपीसी थाना तिवारीपुर से बृजेन्द्र राय वांछित है आज उसके घर पर न्यायालय के आदेश से बकायदा डुगडुगी बजवा के कार्रवाई अंतर्गत धारा 82 सीआरपीसी के तहत की गई।
पुलिस के अनुसार उपरोक्त मुकदमे में ही सह आरोपी प्रशांत उर्फ रिंकू राय पुत्र जय राम राय निवास फरसाद थाना बड़हलगंज जनपद गोरखपुर के घर भी नोटिस चस्पा करके अंतर्गत धारा 82 सीआरपीसी के तहत कार्यवाही की गई।
     संचार के इस आधुनिक दौर में भी ब्रिटिश काल की डुगडुगी पुलिस को बजानी पड़ रही है जबकि पुलिस के पास डुगडुगी बजाने वाला कोई कर्मचारी भी नही होता स्थानीय थाने को अपने माध्यम से ही इसका बंदोबस्त करना होता है 1860 ई. में बनाये गए इस कानून का पालन आज भी हो रहा है जबकि संदेश पहुचाने के अनेक सरल और तीव्र माध्यम उपलब्ध है। पुलिस भी क्या करे न्यायालय के आदेश को मानना उनकी बजबूरी है।लेकिन सरकार को इसपर गौर करना चाहिये।इस तरह के पुराने कानून को बदलने की ज़रूरत है इस काम को अंजाम देने में कई पुलिसकर्मी का समय और सरकार का पैसा बर्बाद होता है।
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