बीजिंग-शंघाई नहीं, तियानजिन क्यों? जानिए क्या है चीन की नई रणनीति…क्या बदल जाएगा एशिया का…

Why Did China Choose Tianjin for SCO Summit: चीन के दिमाग को समझना वाकई मुश्किल है! देखिए, जब भी कोई बड़ा इंटरनेशनल इवेंट होता है, तो सबसे पहले ख्याल आता है राजधानी बीजिंग का… या फिर, अगर बात SCO की हो, तो दिमाग में आता है शंघाई, क्योंकि SCO (Shanghai Cooperation Organization) का जन्म ही शंघाई में हुआ था… लेकिन इस बार, चीन ने SCO समिट के लिए इन दोनों को छोड़कर, एक ऐसे शहर को चुना है, जिसका नाम शायद आपने सुना भी न हो – तियानजिन. अब सवाल ये है कि आखिर क्यों? क्या है इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी चाल? आइए समझते हैं…



बीजिंग या शंघाई नहीं, तियानजिन ही क्यों?

सबसे पहले तो हमें ये समझना होगा कि चीन के लिए बीजिंग उसकी शान है. राजधानी होने के नाते, यहां किसी भी बड़े इवेंट को होस्ट करना बहुत मुश्किल होता है. पूरी दिल्ली को बंद करने जैसा हाल हो जाता है – ट्रैफिक जाम, सिक्योरिटी, वगैरह-वगैरह. चीन ने सोचा, क्यों ना इस सिरदर्द से बचा जाए!

अब बात करें शंघाई की, तो ये चीन की बिज़नेस कैपिटल है. यह शहर पहले से ही SCO का नाम दे चुका है. एक बार फिर यहां समिट करने का कोई ख़ास फायदा नहीं था. तो फिर, तियानजिन में ऐसा क्या ख़ास है?

तीन बड़े फायदे जो सिर्फ तियानजिन में

आर्थिक शक्ति का दिखावा : तियानजिन चीन का सबसे बड़ा और सबसे आधुनिक बंदरगाह वाला शहर है. ये ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (Belt and Road Initiative) का एक बहुत अहम हिस्सा है. चीन को मौका मिला है दुनिया को ये दिखाने का कि देखिए, हम सिर्फ बिज़नेस और राजनीति में ही आगे नहीं हैं, बल्कि हमारे पास तियानजिन जैसी टेक्नोलॉजी और आर्थिक ताकत वाले शहर भी हैं. तियानजिन को चुनकर चीन ने एक तरह से पूरी दुनिया को अपने विकास का शो-केस दिखाया है.


दिमागी चाल, लॉजिस्टिक का कमाल: तियानजिन, बीजिंग से सिर्फ 30 मिनट की बुलेट ट्रेन की दूरी पर है. इसका मतलब है कि VIP लोग बीजिंग में रह सकते हैं और बिना किसी दिक्कत के आराम से समिट में हिस्सा ले सकते हैं. ये एक तरह से ‘विन-विन’ सिचुएशन है. राजधानी का रुतबा भी बचा रहा और समिट में कोई दिक्कत भी नहीं हुई.


पुरानी कहानी, नया मैसेज: तियानजिन की एक और खासियत है. ये एक ऐसा शहर था, जहां कभी विदेशी ताकतों का कब्ज़ा था. चीन ने इस शहर को चुना ताकि वो दुनिया को एक मैसेज दे सके कि जिस शहर पर कभी दूसरों का कब्ज़ा था, वो आज कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गया है. ये चीन के लिए अपनी राष्ट्रीय गौरव की कहानी दिखाने का एक मौका है.

चीन की दूर की सोच
तो बात साफ है. चीन ने तियानजिन को चुनकर सिर्फ एक जगह नहीं चुनी है, बल्कि एक बहुत सोची-समझी चाल चली है. उसने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। अपनी आर्थिक ताकत दिखाई है, लॉजिस्टिक्स को आसान बनाया है और अपनी एक नई पहचान भी पेश की है. ये दिखाता है कि चीन अब सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि दिमागी चालों से भी दुनिया पर राज करना चाहता है.

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