
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को अब तीन साल से भी अधिक समय हो चुका है. इस संघर्ष ने जहां दुनियाभर की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है, वहीं अब यह लड़ाई एक और खतरनाक मोड़ लेती नजर आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस अब बच्चों को भी इस युद्ध में परोक्ष रूप से शामिल करने की योजना बना रहा है.
रूसी स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से ड्रोन उड़ाने की तकनीक को नियमित पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. बताया जा रहा है कि अब 7 साल के बच्चे भी इस विषय की शुरुआती जानकारी हासिल करेंगे. वहीं, नौवीं कक्षा तक आते-आते छात्रों को लड़ाकू ड्रोन असेंबल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिनका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ हमलों में किया जा सकता है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब रूस पर लंबे युद्ध के चलते संसाधनों और मानव संसाधन की भारी कमी बताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति बच्चों को देशभक्ति के नाम पर सैन्य उद्देश्यों के लिए तैयार करने की कोशिश हो सकती है.
अलाबुगा कॉलेज की हकीकत
रूस के स्वेर्दलोव्स्क क्षेत्र स्थित अलाबुगा पॉलिटेक्निक कॉलेज इन दिनों काफी चर्चा में है. यह संस्थान विशेष रूप से किशोरों को यूएवी (Unmanned Aerial Vehicle) या ड्रोन तकनीक की बारीकियों की ट्रेनिंग देता है. हालांकि यहां की परिस्थितियां बेहद चिंताजनक बताई जाती हैं.
माता-पिता का कहना है कि उनके बच्चों के साथ मशीन के पुर्जों जैसा व्यवहार किया जाता है. शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं. एक 17 वर्षीय छात्र डेनिस ने तो आत्महत्या तक कर ली, जिससे कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे. इसके बावजूद यहां आकर्षक वेतन और प्रचार के जरिए किशोरों को भर्ती किया जा रहा है. रूसी मानकों के अनुसार, यहां हर महीने 700 डॉलर से अधिक वेतन दिया जाता है, जो कई परिवारों को लुभाता है.
13 साल के बच्चे का चौंकाने वाला बयान
एक रिपोर्ट में 13 साल के बच्चे के बयान ने सबको चौंका दिया. उसने कहा, “ड्रोन बनाना अच्छा लगता है, इससे लोग मरते हैं लेकिन ड्रोन बच जाते हैं.” यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि किस तरह छोटी उम्र से ही बच्चों की सोच को युद्ध की दिशा में मोड़ा जा रहा है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में ड्रोन प्रशिक्षण के लिए प्रवेश की न्यूनतम आयु सीमा को 10 साल से घटाकर 7 साल कर दिया है. उनका कहना है कि यह स्किल बच्चों के लिए जरूरी है और इससे वे “बिजी” भी रहेंगे.
भविष्य की चिंता
यूक्रेन पहले ही रूस पर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहा है. अब जब युद्ध तकनीक में बच्चों की भागीदारी बढ़ेगी, तो इसका असर केवल मौजूदा युद्ध पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों पर भी पड़ेगा. यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या युद्ध के मैदान की इस होड़ में हम मासूमियत की बलि दे रहे हैं?