क्या आप जानते है ‘वैवाहिक बलात्कार ?’, क्यों छिड़ा है इस पर जंग

किसी से जबरदस्ती करना रेप कहलाता है. रेप मतलब बलात्कार. जब-तक संबंध बनाने के लिए दोनों पार्टनर की रजामंदी ना हों तबतक संभोग नहीं किया जा सकता.कानून की भाषा में समझाएं तो अपनी पत्नी से जबरन संबंध बनाना भी बलात्कार की श्रेणी में आता है. आइये आपको मैरिटल रेप से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं.

“शादी का ये मतलब बिल्कुल नहीं की पत्नी सेक्स के लिए हमेशा तैयार बैठी है” – दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ़ जस्टिस गीता मित्तल और सी हरि शंकर की बेंच ने ये टिप्पणी की.

रेप, मतलब बलात्कार, और मैरिटल मतलब वैवाहिक. अब दोनों शब्दों को जोड़िये तो समझ आ जायेगा कि आखिर मैरिटल रेप क्या होता है. नहीं समझ आया तो हम सरल शब्दों में बता देते हैं कि मैरिटल रेप का मतलब होता है वैवाहिक रेप. सारा बवाल इसी शब्द से शुरू हुआ है. कुछ लोगों का मानना है कि आखिर इस तरह का कोई काम या शब्द भला हो भी कैसे सकता है? क्योंकि पति-पत्नी के बीच संबंध तो बनेंगे ही ना? अगर नहीं तो उनके शादीशुदा होने का मतलब ही क्या हुआ?

सुनकर अजीब भी लगता है और शर्म भी आती है लेकिन भारत में ‘वैवाहिक बलात्कार’ या ‘मैरिटल रेप’ कानून की नज़र में अपराध नहीं है. मतलब अगर एक पति अपनी पत्नी की मर्ज़ी के बगैर जबरदस्ती भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे अपराध नहीं माना जायेगा? लेकिन सवाल है कि ऐसा क्यों?

देश की कई महिलाओं का यही सवाल जब याचिका बनकर दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचा कि आखिर ”मैरिटल रेप’ को ‘अपराध करार क्यों नहीं कर सकते तो जवाब मिला कि अगर ऐसा किया तो ‘विवाह की संस्था अस्थिर’ हो सकती है.

इस गंभीर मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि “हम मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में नहीं खड़ा कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है जो सही नहीं है. अगर ऐसा हुआ तो भविष्य में ये एक ऐसे औजार के रूप में सामने आ सकती है जिससे पत्नियाँ अपने पति को परेशान कर सकती हैं.”

पहले समझिये रेप होता क्या है?

किसी भी उम्र की महिला की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ या उसकी सहमति के बिना, उसके शरीर (वजाइना या एनस) में अपने शरीर का कोई अंग डालना रेप कहलाता है. महिला के निजी अंगों को पेनिट्रेशन के मक़सद से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना भी रेप है, किसी महिला के मुंह में जबरन अपने निजी अंग का कोई भी हिस्सा डालना, रेप है, महिला के साथ ओरल सेक्स करना भी रेप है.

IPC की धारा 375 के अनुसार अगर कोई पुरुष किसी महिला के साथ नीचे दी गयी परिस्तिथियों में संबंध बनाता है तो इसे रेप की श्रेणी में गिना जाता है. जान लीजिये कि क्या हैं वो परिस्थितियां:

1. महिला/लड़की की मर्ज़ी के बिना उसके साथ संबंध बनाना.
2. महिला/लड़की की इच्छा के बिना उसके साथ संबंध बनाना.
3.महिला की मर्ज़ी तो हो लेकिन ये सहमती उसे जान/माल या किसी करीबी इंसान को मारने की धमकी देकर हासिल की गयी हो.
4. महिला ने सहमती दी हो लेकिन ये सहमती सिर्फ इसलिए दी गयी हो क्योंकि वो इस भ्रम में है कि वो सामने वाले व्यक्ति की ब्याहता है.
5. महिला की मर्ज़ी हो, लेकिन सहमती देते समय महिला का मानसिक संतुलन ठीक ना हो, या लड़की सहमती देते समय नशे में हो, या लड़की ने बिना परिणाम जाने सहमती दे दी हो(बिना इसका नतीजा जाने). 
6. लड़की की उम्र अगर 16 साल से कम हो तो उसकी मर्जी से या उसकी सहमति के बिना किया गया सेक्स भी रेप की श्रेणी में आता है.

रेप की परिभाषा तो हमनें जान-समझ ली लेकिन IPC या भारतीय दंड विधान में ना ही मैरिटल रेप की कोई परिभाषा है ना ही इसका कोई ज़िक्र.

हाँ, वैसे IPC की धारा 376 के हिसाब से पत्नी का रेप करने वाले पति के लिए सजा का प्रावधान है लेकिन यहाँ शर्त ये है कि ऐसे मामलों में पत्नी की उम्र 12 साल से कम होनी चाहिए. ऐसा करने के दोषी पाए जाने वालों के ऊपर जुर्माना या 2 साल की कैद या किन्ही-किन्ही मामलों में दोनों का भी प्रावधान है.

इतना पढ़ने के बाद जो बात यहाँ समझ आती है वो ये कि सेक्स करने के लिए सहमति देने की उम्र तो 16 साल तय है लेकिन 12 साल से बड़ी उम्र की पत्नी की सहमति या असहमति की कोई वैल्यू नहीं है.

इस बारे में क्या है हिन्दू मैरिज एक्ट की राय

हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार पति और पत्नी दोनों के लिए एक दूसरे के प्रति कुछ जिम्मेदारियां होती हैं जिनमें संबंध बनाने का अधिकार भी शामिल है. सिर्फ इतना ही नहीं क़ानूनन ये भी माना गया है कि सेक्स के लिए इनकार करना एक प्रकार की क्रूरता है और इसके आधार पर तलाक भी मांगा जा सकता है.

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी महिला के साथ मैरिटल रेप होता है तो वो कहाँ जाये?

तो इसका जवाब है कि वैवाहिक रेप का कोई कानून ना होने की वजह से अक्सर महिलाएं IPC धारा 498(ए) का सहारा लेती है. हालाँकि ये सिर्फ वैवाहिक बलात्कार से डील नहीं करता है बल्कि इसमें शादीशुदा महिला के साथ हो रहे किसी भी तरह के शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न की सुनवाई होती है.

दोषी पाए जाने पर इस धारा के तहत पति को ज्यादा से ज्यादा तीन साल की सज़ा का प्रावधान है. बलात्कार के क़ानून में अधिकतम उम्रक़ैद और जघन्य हिंसा होने पर मौत की सज़ा का प्रावधान है.

कब मिलेगा इन्साफ?

मैरिटल रेप पर केन्द्र सरकार जल्द से जल्द कोई कानून बनाए, इस मांग को लेकर पिछले दो साल से दिल्ली हाई कोर्ट में बहस चल रही है. वैसे जानकारी के लिए बताएं तो इस मामले पर अगली सुनवाई 8 अगस्त को होनी है. उस दिन दोनों पक्ष अपने तरफ से नई दलीलें पेश करेंगे जिसके बाद तय होगा कि इस तरह का क्या कोई कानून वाकई देश में आना चाहिए या नहीं?

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