हाजी इकबाल गए समय की बात, अब कौन कर रहा अवैध खनन

कितने स्टोन क्रेशरों के पास है एनओसी

रात में 18-24 टायरा ट्रको से हो रहा अवैध खनन का परिवहन

ड्रोन कैमरे और सेटलाइट से पहले की भांति अब निगरानी क्यों नही?

भास्कर समाचार सेवा
सहारनपुर। अवैध खनन के लिए सहारनपुर को राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने में जहां हाजी इकबाल और उनके गुर्गों की भूमिका रही है जिनमे ऐसे गुर्गे भी है जो सैकड़ो करोड़ रुपये कमाकर अब भाजपा की शरण मे स्वयं को सुरक्षित किये हुए हैं वहीं ये सवाल भी खड़ा हो रहा है कि अब कौन हाजी इकबाल के नक्शे कदम पर चलते हुए अवैध खनन करने का दुस्साहस कर पा रहा है? हाजी इकबाल को प्रशासन का ही नही बल्कि सत्ता का भी अवैध संरक्षण मिलता रहा है जिसके चलते ही उस दौर में जहां 10-12 टायरा ट्रकों में खनन ढोया जाता था। जिनकी जगह अब 16-18-24 टायरा ट्रकों से माल ढोया जा रहा है। ये बात तो साफ है कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्य नाथ की अवैध कामो पर सख्ती से रोक के बाद प्रशासन तो इसमें संलिप्त नही है तो फिर अवैध खनन करने का दुस्साहस आखिर कर कौन रहा है। खनन के पट्टो की आड़ में भी जहां यमुना का सीना चीरा जा रहा है और शाम 6 बजे के बाद विभिन्न मार्गों से खनन सामग्री के साथ बड़े वाहनों में प्रवेश करते देखा जा सकता है। व्यापारियो को सुरक्षा के लिए सीसी टीवी कैमरे लगाने की सलाह और सुझाव देने वाली पुलिस और राजस्व की चोरी रोकने के लिए ज़िम्मेदार प्रशासन सीसीटीवी कैमरे लगाने से आखिर क्यों परहेज़ किये हुए है? प्रतिदिन हज़ारो गाड़ियों से निकलने वाले खनन पर रोक क्यों नही लग पाई है? कलसिया से छुटमलपुर और सहारनपुर मार्ग पर तो शाम 6 बजे के बाद पुलिस पिकेट के सामने से अवैध खनन के बड़े वाहनों को निकलते देखा जा सकता है। बिना रॉयल्टी (रवन्ना) के निकलने वाली खनन सामग्री को पकड़ पाने में खनन विभाग पूरी तरह विफल है जबकि कभी वह स्टाफ के नही होने का रोना रोते हैं जबकि उप जिलाधिकारी और उनकी टीम भी कभी अवैध खनन को रोकने की कार्यवाही करने में परहेज़ नही करती है। लेकिन दिन में ही कभी कभार किसी बुग्गी आदि के खिलाफ कार्यवाही करने वाली खनन विभाग की किस्मत हो तो कोई वाहन भी यदा-कदा हाथ लग जाता है। नुनिहारी घाट पर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावाजूद नियमित खनन हो रहा है। पूर्व में भी अवैध खनन को रोकने और राजस्व तथा पर्यावरण की रक्षा के नाम पर सेटलाइट और ड्रोन कैमरों से भी निगरानी होती रही है तो फिर अब किसे हाजी इकबाल बनने की छूट मिल रही है? ये सवाल तो खड़ा होगा ही।

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