भारी संख्या में तैनात पुलिस बल के बीच उन्नाव की ‘निर्भया’ को किया गया दफन

- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आरोपितों को फांसी देने की मांग

 

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की जिद पर अड़े परिवार वालों को अफसरों ने मनाया
– उसी खेत में युवती को मिली जगह जहां उसके पुरखों को अब तक दफनाया गया था
– पीड़ित की बहन और परिवार को 24 घंटे सुरक्षा देने का कमिश्नर ने दिया आश्वासन

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उन्नाव । तनाव के माहौल और भारी संख्या में तैनात पुलिस बल के बीच रविवार दोपहर जलाई गई युवती को दफना दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने की जिद कर रहे परिजनों को कमिश्नर मुकेश मेश्राम और आईजी एसके भगत ने युवती का दाह संस्कार करने के लिए मनाया। उनके आश्वासन पर परिवार के लोग शव का अंतिम संस्कार करने के लिए गांव के उस खेत पर ले गए जहां इस परिवार को पुरखों को दफनाया गया है।

कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने कहा कि हमने पीड़ित की बहन को 24 घंटे सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया है और परिवार के अन्य सदस्यों को भी सुरक्षा दी जाएगी। पीड़ित के भाई की मांग के अनुसार आत्मरक्षा के लिए उसे शस्त्र अधिनियम के अनुसार हथियार रखने का लाइसेंस प्रदान करेंगे। योगी सरकार ने पहले ही पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के लिए 25 लाख रुपये और एक आवास देने का ऐलान किया है। पीड़ित की बहन ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और आरोपितों को फांसी दिए जाने की मांग की है।

पीड़ित युवती की दिल्ली के अस्पताल में मौत होने की खबर मिलने के बाद से ही उसके गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। क्षेत्र में हालात नाजुक देखते हुए शव के गांव पहुंचने पर कानून-व्यवस्था के मद्देनजर सीतापुर, हरदोई और लखनऊ से पुलिस फोर्स को उन्नाव बुलाया गया। इसके अलावा दो प्लाटून पीएसी को भी मौके पर बुलाकर तैनात किया गया। पीड़ित युवती का शव उसके घर के बाहर कच्चे बरामदे में रखा गया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती उन्नाव की दुष्कर्म पीड़ित युवती की मौत के बाद मृतका का भाई शव को लेकर शनिवार देर शाम उन्नाव पहुंचा था। पुलिस चाहती थी कि रात में ही अंतिम संस्कार हो जाए लेकिन परिवार के लोग नहीं माने। उन्नाव के जिला प्रशासन ने परिवार से बातचीत के बाद रविवार सुबह पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार का फैसला किया।

रविवार को अंतिम संस्कार की प्रशासनिक तैयारियों के बीच मृतका की बहन ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ मौके पर नहीं आते और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन नहीं देते, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिवार को मनाने के लिए कमिश्नर मुकेश मेश्राम और लखनऊ के आईजी एसके भगत मौके पर पहुंचे। काफी मान-मनौव्वल के बाद परिवार शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुआ। इसके बाद डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय, एसपी विक्रांत वीर समेत भारी पुलिस की मौजूदगी में शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाया गया। इसके बाद युवती का दाह अंतिम संस्कार के लिए गड्ढा खोदने की प्रक्रिया शुरू की गई। कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या, कमल रानी अरुण सहित अंतिम यात्रा में सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन, एमएलसी राजपाल कश्यप, सपा जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव, पूर्व छात्र सभा जिलाध्यक्ष आदिल खान शामिल हुए और सपा के कई नेता मौजूद रहे।

उन्नाव में पीड़ित युवती के ही गांव के रहने वाले शिवम और उसके चचेरे भाई शुभम ने रायबरेली के लालगंज में पिछले वर्ष 12 दिसम्बर को उसके साथ दुष्कर्म किया था। उसका वीडियो बनाकर लगातार ब्लैकमेल भी किया और पुलिस में रिपोर्ट नहीं दर्ज होने दी। इस पर उसने कोर्ट की शरण ली। इस तरह घटना के चार माह बाद कोर्ट के आदेश पर 5 मार्च 2019 को मुकदमा दर्ज हो पाया था। इसके बाद मुक़दमे में नामजद एक अभियुक्त ने कोर्ट में सरेंडर किया और दूसरे को आज तक पुलिस ने गिरफ्तार तक नहीं किया। घटना के दिन बीते गुरुवार को सुबह युवती इसी मुक़दमे की कोर्ट में पेशी पर रायबरेली जाने के लिए घर से निकली थी। तभी अलसुबह रास्ते में युवती पर इन्हीं लोगों ने घेर लिया और केरोसिन डालकर आग लगा दी। करीब 90 फीसदी झुलसी युवती को पहले लखनऊ और फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया था। शुक्रवार रात उसकी मौत हो गई, जिसके बाद देशभर में इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए।

पीड़ित के पिता और भाई ने दोषियों को फांसी देने की मांग की है। पिता ने भी शनिवार को गांव में मीडिया से बात करते हुए दरिंदों को हैदराबाद पुलिस की तरह एनकाउंटर करने की भी मांग की है। पीड़ित के भाई ने कहा कि न्याय पर उन्हें पूरा भरोसा है, लेकिन दोषियों को मौत की सजा मिलनी चाहिये, चाहे फांसी मिले या एनकाउंटर हो। उन्होंने कहा कि उनकी सिर्फ एक ही मांग है कि बहन की मौत का तुरंत इंसाफ मिले।

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