गरीबों के लिए वरदान होगा आयुष्मान भारत योजनाः योगी आदित्यनाथ

गोपाल त्रिपाठी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर दौरे के दूसरे दिन आज बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। मेडिकल कॉलेज हाल में आयोजित आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की लॉचिंग कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना को लांच किया। इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मै कोई डाक्टर नहीं हूं, लेकिन इस चीज से गरीबो के दर्द को समझता हूं, इतनी बड़ी बीमा काफी लाभ उनके लिए है, सर्वे के बाद जो लोग छूट गए है। उनका प्रदेश की सरकार खुद कराएगी ताकि सही आंकड़े सामने आए। इस अवसर पर मै आपको दिल से बधाई देता हूं, कि इतनी बड़ी बीमा उनके लिए है। अगर कोई व्यक्ति सक्षम है, तो वो अपना खेत बारी बेच के उसका इलाज करता है, लेकिन अगर जो सक्षम नहीं है, वो अपने को अपने सामने मरते देखता है। तकलीफ में वो भी मरता है, लेकिन उसके दर्द को मोदी जी ने समझा, और इससे बड़ी लोक कल्याणकारी योजनाओं कोई हो ही नहीं सकता है।
राज्य सरकार स्वयं इसकी मांटिर्निग खुद करेगा। 1 करोड़ 18 हजार पहले चरण में होगा और 6 करोड़ के आस पास लोगो को इसका लाभ मिलेगा और जो छूटा हुआ है, वो उदास न हो उनके लिए हमारी सरकार है, और उन तक भी वो पहुंचेगी। इंसेफेलाइटिस की बीमारी पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1998 तक इस बीमारी का लोग संज्ञान भी नहीं लेते थे, लोग नौकी बीमारी के नाम से जानते थे। मै जब पहले आता था, तो यहां का शौचालय चोक था अंदर इतनी बदबू की मेरे साथ कुछ लोग गए तो उल्टी करने लगे, फिर मै प्रिंसिपल से समय मांगा तो वो चाहते ही नहीं थे की मै आऊं।
लोकमंगल भारतीय संस्कृति का मूलः योगी आदित्यनाथ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहाकि भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र लोक मंगल एवं लोक कल्याण भगवान शिवावतारी महायोगी गोरक्षनाथ की तपस्थली श्री गोरक्षपीठ का भी वैचारिक अधिष्ठान है। गोरक्षपीठाधीश्वर महंथ दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं गोरक्षपीठाधीश्वर महंथ अवेद्यनाथ जी महाराज का पूरा जीवन लोक-कल्याण एवं लोक मंगल को ही समर्पित था। भारतीय संस्कृति के अनेकानेक विशेषताओं में लोक कल्याण एक महत्वपूर्ण विशेषता है यदि भारतीय संस्कृति का हम निचोड देखे तो वह परोपकार है और परोपकार लोक कल्याण का ही पर्याय है।
वे गोरखनाथ मन्दिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त श्री दिग्विजयनाथ महाराज की 49वीं एवं राष्ट्रसंत महंथ अवेद्यनाथ महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार से प्रारम्भ विविध समसामयिक विषयों पर सम्मेलन के अन्तर्गत ‘लोक-कल्याण भारतीय संस्कृति की विशेषता है’ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि
भारतीय जीवन मूल्य में स्वयं के स्वार्थ को जगह नहीं है।
वही जीवन श्रेष्ठ है जो दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित हो। भारतीय संस्कृति की इसी लोक कल्याणकारी भावना से धर्म की वह शास्वत व्यवस्था प्रतिष्ठित हुई जो परोपकार का मार्ग दिखाता है, जो सदाचार की राह का अनुगामी बनाता है, जो कर्तव्यों का भान कराता है और नैतिक मूल्यों के प्रति आग्रही बनाता है। भारत ने इसी धर्म की व्यापक अवधारणा को स्वीकारा है। हमारे धर्म में कहीं नहीं कहा गया कि हम किसकी पूजा कर,ें किसकी न करें। यह कभी नहीं कहा गया कि हिन्दू का अर्थ मन्दिर में जाये, टिका लगाये। भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत भारतीय धर्म ने कभी उपासना को बन्धन नहीं बनाया और इसीलिए हमारी संस्कृति ने उद्घोष किया उदार चरितानाम ‘वसुधैवकुटुम्बकम’। इस मंत्र ने भी लोक कल्याण का वैश्विक मार्ग प्रशस्त किया। भारत की सनातन संस्कृति में सदैव दूसरों के लिए जीवन जीने को महत्वपूर्ण माना गया। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया’ का मंत्र भारतीय संस्कृति में ही गूंजा जो लोक कल्याण की ही प्रेरणा देता है।
अतिथियों का स्वागत एवं प्रस्ताविकी पूर्व कुलपति प्रो उदय प्रताप सिंह ने किया। मंच संचालन डाॅ श्रीभगवान सिंह ने किया। गोरक्षाष्टक पाठ अवनीश पाण्डेय, प्रियांशु चैबे, दिग्विजयस्रोत पाठ शिवांश मिश्र, महंथ अवेद्यनाथ स्रोत पाठ श्री प्रांगेश मिश्र द्वारा प्रस्तुत किया गया।   सम्मेलन में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कुलपति प्रो वीके सिंह, सिचाई मंत्री धर्मपाल सिंह, बडौदा से पधारे महंथ गंगादास, बडेभक्तमाल अयोध्या से पधारे अवधेशदास, महंथ धर्मदास जी, हरिद्वार से पधारे महंथ शांतिनाथ, कटक उडीसा से पधारे महंथ शिवनाथ, महंथ राममिलनदास, पंचानन पुरी, स्वामी जयबक्शदास, महंथ रविन्द्रदास, महंथ मिथिलेशनाथ सहित आगंतुक साधु संतो ंके अलावा प्रो विनोद सिंह, प्रो रविशंकर सिंह, प्रो सुधाकर लाल श्रीवास्तव, डाॅ बीएन सिंह, डाॅ उग्रसेन सिंह, अन्जू चैधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष जर्नादन तिवारी, डाॅ. शैलेन्द्र उपाध्याय, महेन्द्र सिंह, रामजन्म सिंह सहित बडी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने किया श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ
युगपुरुष ब्रह्मलीन महंथ दिग्विजयनाथ महाराज की 49 वीं एवं राष्ट्र सन्त ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज की चतुर्थ पुण्यतिथि समारोह पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मन्दिर में ‘श्रीराम-कथा ज्ञान-यज्ञ’ का शुभारम्भ किया। यज्ञ से पूर्व भव्य शोभा-यात्रा निकाली गई जिसमें मुख्यमंत्री के अलावा काशी से पधारें कथाव्यास जगदगुरू अनन्तानन्द द्वाराचार्य, स्वामी डाॅ0 रामकमल दास वेदान्ती, सहित साधु-संतों ने भाग लिया।
श्री वाल्मीकि रामायण की शोभा-यात्रा के साथ महायोगी गुरू श्री गोरखनाथ का पूजन-अर्चन, युगपुरूष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्र-सन्त ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज सहित सभी प्रमुख समाधियों पर पुष्पार्चन किया। शोभा यात्रा दिग्विजयनाथ स्मृति साभागार में पहुंची। अखण्ड ज्योति के स्थापित होने एवं दोनो ब्रह्मलीन महाराज जी की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ श्रीराम कथा प्रारम्भ हुई। श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ का उद्द्याटन करते हुए उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने कहा कि श्री गोरक्षपीठ की समृद्ध परम्परा को नई दिशा देने वाले युगपुरूष महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं राष्ट्रसंत महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज भारतीय संस्कृति एवं संतो-योगियों की परम्परा के दिव्याकाश में चमकते हुए नक्षत्र हैं। उनका व्यक्तित्व कृतित्व तत्कालीन देश काल और परिस्थितियों की चुनौतियों का समाधान करते हुए देश, समाज तथा धर्म को समर्पित था।
उनकी पूर्ण स्मृति में प्रति वर्ष सप्ताह भर धार्मिक आध्यात्मिक आयोजनों के साथ सम सामयिक विषयों पर सम्मेलन आयोजित कर हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होने कहा कि भारत की समृद्ध सनातन हिन्दु धर्म की परम्परा में वाल्मीकि रामायण में अपना विशिष्ट है। श्रीराम धर्म के साक्षात् विग्रह है। वह कर्तव्य, नीति, नैतिकता, मर्यादा के प्रतीक है। श्रीराम के प्रति भारत में जब तक आगाध आस्था एवं अटूट श्रद्धा रहेगी दुनिया की कोई ताकत भारत का बाल भी बांका नहीं कर सकती।
कथा के नौ मंत्र
1. धर्म और धैर्य का परित्याग कभी भी न करें।
2. श्रीरामचरित मानस काव्य है, और रामायण इतिहास।
3. मनव जीवन का दिव्य ज्ञान है, श्रीराम कथा।
4. श्रीराम नाम की महिमा अनन्त और प्रभाव अद्भुत है
5. श्रीराम कथा का एक-एक अक्षर मानव जीवन के पापों का नाश करने में समर्थ है।
6. श्रीराम नाम ही रत्नाकर को वाल्मिकि बना सकता है।
7. अपरिमित श्रद्धा, अगाध निष्ठा एवं शाश्वत विश्वास ही भगवत प्राप्ति का मूल आधार है।
8. भारत की नारी का जीवन श्रद्धा, शक्ति और तपस्या की प्रतीक है।
9. संत महात्मा रूप से नहीं आचरण से पहचाने जाते हैं।
Back to top button
E-Paper