भास्कर एक्सक्लूसिव : यूपी में डायरिया होने का आंकड़ा दो तिहाई घटा, पढें एनएफएचएस की सर्वे रिपोर्ट

• 15 प्रतिशत से गिरकर यह आंकड़ा 5.6 प्रतिशत पहुंचा

• ओआरएस कवरेज 37.90 % से बढ़कर 50.70 % हुआ

• डायरिया केस में जिंक कवरेज 12.6% से 30.5% हुआ

• यूपी: आईडीसीएफ की कवरेज 17% से 80.4 % तक हुई

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में अतिसार यानि डायरिया होने का आंकड़ा दो तिहाई घटा गया है। जी हां, यह उपलब्धि पता चली है एनएफएचएस सर्वेक्षण के तुलनात्मक अध्यन में। आंकड़ों के अनुसार जागरूकता बढ़ने से ओआरएस का उपयोग डेढ़ गुना बढ़ गया है। साथ ही डायरिया नियंत्रण में खास उपयोग किया जाने वाला जिंक का कवरेज भी करीब ढाई गुना बढ़ा है।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के महाप्रबंधक डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को 35/1000 (यूपी में: 48/1000) से घटाकर 2019 में 25 तक 2025 तक करना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है। देश में हर साल करीब 64 हजार बच्चे डायरिया से और यूपी में 18312 बच्चों की मौत हो जाती है। डायरिया से होने वाली मौतें आमतौर पर गर्मी और मानसून के दौरान होती हैं।

उन्होंने बताया कि एनएफएचएस ने आंकड़ों के अनुसार यूपी में वर्ष 2015-16 में डायरिया की व्यापकता 15% थी जो वर्ष 2019-21 तक गिरकर 5.6% रह गई। वहीं भारत में यह 9.2% से गिरकर 7.3% हो गई। इसके आलावा वर्ष 2015-16 में यूपी में डायरिया के मामलों में ओआरएस कवरेज 37.9% था। जबकि वर्ष 2019-21 के दौरान यह 50.7% तक पहुंच गया। वहीँ राष्ट्रीयस्तर पर यह आंकड़ा 50.6% से 60.6 % तक पहुंच चुका है। डायरिया के मामलों में अहम् भूमिका निभाने वाले जिंक का कवरेज वर्ष में 2015-16 में 12.6% था जबकि 2019-21 में यह 28.5% हो गया। वहीँ भारत में यह 20.3% से बढ़कर 30.5% हो गया है। देश में चलने वाले आईडीसीएफ कवरेज 17% का आंकड़ा 80.4% तक पहुंच चुका है।

क्या है डायरिया

असामान्य रूप में मल त्याग होना (पानी के अत्यधिक निकलना) ही डायरिया है. इससे होने वाली मौतों को ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के उपयोग और जिंक के साथ दस्त के दौरान बच्चे द्वारा पर्याप्त पोषण के सेवन से निर्जलीकरण को रोकने और इलाज करके रोका जा सकता है। साफ पेयजल, हाथ धोने, स्वच्छता, टीकाकरण और स्तनपान / उचित पोषण के उपयोग से डायरिया रोका जा सकता है।

आईडीसीएफ बना रामबाण

सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) डायरिया नियंत्रित करने में रामबाण साबित हो रहा है। एक जून से चल रहे इस पखवाड़े के कई उद्देश्य हैं. जैसे बचपन के दस्त के लिए ओआरएस और जिंक के उपयोग में सुधार करना। पांच साल से कम उम्र के बच्चों के डायरिया की रोकथाम और प्रबंधन के लिए देखभाल करने वालों में उचित व्यवहार को शामिल करना। साथ ही इस पखवाड़ा के पीछे तीन स्तरीय रणनीति काम कर रही है। 1- समुदाय में ओआरएस और जिंक की बेहतर उपलब्धता और उपयोग 2- निर्जलीकरण के मामलों के प्रबंधन के लिए सुविधा स्तर को मजबूत बनाना 3- आईईसी अभियान के माध्यम से डायरिया की रोकथाम और नियंत्रण पर बेहतर समर्थन और संचार। गौरतलब है कि समुदाय में डायरिया की घटना को रोकने और ठीक करने के लिए स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हर साल जून-जुलाई में आईडीसीएफ मनाया जाता है। वर्तमान में 1 जून से यह पखवाड़ा मनाया जा रहा है। जो 30 जून तक चलेगा।

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