‘सहयोगियों’ के ही वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में लालू के लाल !

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश में जुट गये हैं, शायद यही वजह है कि जीतन राम मांझी ने तेजस्वी पर एक खास बिरादरी की राजनीति करने का आरोप लगाया है, दरअसल तेजस्वी पटना जिला के घोसवरी प्रखंड जाकर दो महादलितों की हत्या पर ना सिर्फ शोक जाहिर किया, बल्कि परिजनों की आर्थिक मदद भी की, जिसके बाद उन्होने मांझी से लीड ले ली, इस पूरे मामले में तेजस्वी की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मांझी के वोट बैंक में वो सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।


इशारों में दे दिया संदेश
माना जा रहा है कि पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के सवाल का उन्हीं के अंदाज में जवाब देकर तेजस्वी ने अपने सहयोगियों को बड़ा संदेश दे दिया है, कि वो एक जाति विशेष की नहीं बल्कि पूरे समाज की राजनीति करना चाहते हैं, तेजस्वी को भी ये बात अच्छे से पता है कि उनके सहयोगी दलों में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उनके नेतृत्व को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे, इसलिये लालू के लाल ने घोसवरी जाकर दलितों के परिजनों से मुलाकात कर ये जताने की कोशिश की है, कि वो सभी जाति के नेता हैं।


मांझी की पार्टी का बयान
जीतन राम मांझी की पार्टी हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि तेजस्वी यादव कहीं भी जाएं, इससे कुछ खास फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन अगर राजनीति ही करना है, तो सहयोगियों का भी ध्यान रखें, तमाम जातियों की राजनीति करें, लेकिन सहयोगियों को साथ लेकर चलें, हमारे नेता मांझी जी ने जब सवाल उठाया कि तेजस्वी एक खास जाति की राजनीति करते हैं, तब जाकर उनकी नींद खुली है।


क्या था मामला
आपको बता दें कि घोसवरी में दो युवक परदेश से लौटे थे, स्थानीय दबंग लोगों ने उन दोनों को क्वारंटाइन सेंटर जाने को कहा, लेकिन वो नहीं मानें, जिसके बाद दोनों युवकों को अपने घर में ही क्वारंटाइन होने को कहा, इसी बात पर दोनों युवक और दबंग में झगड़ा हो गया, जिसके बाद दबंग ने दोनों की इतनी पिटाई की, कि दोनों की मौत हो गई। अब इस मामले पर बिहार में राजनीति हो रही है, विपक्ष मामले को भूनाने की कोशिश में लगा हुआ है।

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