तिब्बत स्वतंत्रता में भारत ही होगा सहयोगी: स्वामी अवधेशानंद गिरी

-संघ के श्रावण महासंकल्प अभियान के पोस्टरों का किया लोकार्पण
–कैलाश मानसरोवर की चीन से मुक्ति का किया हर सनातनी से आह्वान

हरिद्वार। जूना अखाड़े के प्रथम पुरुष आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने कहा है कि तिब्बती स्वतंत्रता में तिब्बतियों को आगे आना होगा। उनके प्रयासों को हम भारतीयों का नैतिक ही नहीं बल्कि हर प्रकार का सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत व तिब्बत की संस्कृति एक है और वह हमसे सांस्कृतिक विषयों में अलग नहीं है इसलिए भारतीयों को तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए जुट जाना होगा।
देश के सबसे बड़े जूना अखाड़े के प्रधान अधिष्ठाता स्वामी अवधेशानंद गिरि जी आज अपने स्थानीय कनखल स्थित हरिहर आश्रम में भारत-तिब्बत समन्वय संघ यानी बीटीएसएस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल से श्रावण महासंकल्प अभियान के पोस्टरों का लोकार्पण करते हुए बोल रहे थे। बीटीएसएस ने चीन के चंगुल से शंकर भगवान के मूल स्थान कैलाश मानसरोवर को मुक्त कराने के लिए जनजागृति का प्रचार प्रसार करने का अभियान छेड़ रखा है। उसी क्रम में विभिन्न भारतीय भाषाओं में बनाए गए विशेष प्रचार पोस्टरों का लोकार्पण आज स्वामी अवधेशानंद गिरी जी ने किया। लोकार्पण करते हुए स्वामी जी ने कहा कि शंकर भगवान के मूल स्थान की मुक्ति के लिए लगे भारत-तिब्बत समन्वय संघ के इस प्रयास में वह उसके साथ हैं और वह प्रत्येक सनातनी से आह्वान करते हैं कि बीटीएसएस के इस आंदोलन से जुडें। उन्होंने कहा कि इस अभियान के लिए वह अपने स्तर से कुछ विशेष सहयोग भी करेंगे।
उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई वार्ता की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी तिब्बत समस्या को लेकर बहुत गंभीर हैं और वह उसके समाधान में लगे हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल में बीटीएसएस की केंद्रीय समिति के माननीय सदस्य व पूर्व वाइस चांसलर प्रो. दत्त जुयाल, राष्ट्रीय प्रभारी (पर्यावरण प्रभाग) कर्नल हरी राज सिंह राणा, प्रांत अध्यक्ष नरेंद्र चौहान, प्रांत संगठन मंत्री मोहन भट्ट, प्रांत महामंत्री मनोज गहतोड़ी आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे। भारत-तिब्बत समन्वय संघ ने स्वामी जी को यह विश्वास दिलाया कि यह श्रावण महासंकल्प अभियान प्रत्येक भारतीय तक पहुंचकर रहेगा।

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