विपक्ष की चुनाव आयोग से मांग, 50 प्रतिशत वीवीपीएटी मशीनों के जांचे जाए मत

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नई दिल्ली । कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के शीर्ष नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में विश्वास बहाली के मुद्दे पर चुनाव आयोग से मिला। इन विपक्षी पार्टियों का मानना है कि आयोग को ईवीएम से मतदान कराने की स्थिति में 50 प्रतिशत वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों से मतों की जांच करानी चाहिए। वीवीपीएटी मशीन ईवीएम में किस पार्टी को वोट किया गया उसके नाम की पर्ची निकालती है। इस पर्ची को देखा जा सकता है।

इनका इस्तेमाल कर ईवीएम के नतीजों को सत्यापित किया जा सकता है। वर्तमान में आयोग एक पोलिंग बूथ की एक मशीन के आंकड़ों का ईवीएम से मिलान करता है। चुनाव आयोग से मुलाकात के पहले विपक्षी पार्टी के नेताओं ने संसद परिसर में बैठक की।

यहां से प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने आयोग से मांग की है कि अगर मतपत्रों से चुनाव कराना संभव नहीं है तो आयोग को करीब 50 प्रतिशत वीवीपीएटी मशीनों से मतों की गणना करानी चाहिए। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों में बहुत थोड़ा समय रह गया है।

ऐसे में विपक्ष की मांग है कि ईवीएम के नतीजों की पुष्टि करने के लिए 50 प्रतिशत वीवीपीएटी मशीनों के वोटों की गिनती की जानी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक की थी। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि ईवीएम को लेकर लोगों के मन में अभी भी शंका बनी हुई है। लोगों में इसके प्रति विश्वास बनाने के लिए विपक्ष ने एक प्रोपोजल तैयार किया है जिसे विपक्ष चुनाव आयोग से मिलकर उन्हें सौपा जाएगा।

आयोग ने क्या कहा?
वहीं, EC ने एक बयान में कहा कि कुछ राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों के प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल आज चुनाव आयोग से मिला। आयोग ने प्रतिनिधियों की VVPAT संबंधी मांगों को सुना और आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

चुनाव में समय कम इसलिए मांग बदली
आजाद ने बताया कि तमाम दलों ने पहले मतपत्र से चुनाव कराने की मांग की थी लेकिन अगले लोकसभा चुनाव में कम समय होने के कारण सभी दलों ने आयोग के समक्ष यह मांग पेश नहीं की। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता चाहते हैं कि ईवीएम में हरसंभव पारदर्शिता कायम रखी जाए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि सभी दलों की सहमति से आयोग के समक्ष ईवीएम की विश्वसनीयता को बरकरार रखने के लिए हर राज्य में आधे मतदान केंद्रों पर ईवीएम के मतों का वीवीपैट की पर्चियों से मिलान करने का सुझाव पेश किया गया।

आजाद ने बताया कि आयोग से यह व्यवस्था लोकसभा और विधानसभा चुनाव सहित सभी चुनावों में लागू करने का अनुरोध किया गया है। प्रतिनिधिमंडल में आजाद, खड़गे और पटेल के अलावा TDP के चंद्रबाबू नायडू, NCP के माजिद मेमन, एसपी के रामगोपाल यादव, बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा, RJD के मनोज झा, माकपा के मोहम्मद सलीम, भाकपा के डी राजा, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और AAP के संजय सिंह सहित अन्य दलों के नेता शामिल थे।

कांग्रेस के नेता ने कहा कि विपक्ष के सभी नेताओं को पूरा विश्वास है कि चुनाव आयोग लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए मतदाताओं का मत उनकी मर्जी के उम्मीदवार को ही मिले, यह व्यवस्था कायम रखेगा।

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