राफेल सौदा पर गरमाई सियासत : राहुल को मिला अखिलेश का साथ…

राफेल सौदा: राहुल को मिला अखिलेश का साथ

लखनऊ।  लोकसभा चुनाव से पहले छत्तीसगढ और मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से मिले झटके के बाद राफेल युद्धक विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में कद्दावर समाजवादी पार्टी (सपा) का साथ मिला है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि राफेल सौदे का मामला अब देश की सीमा को लांघ चुका है और बिना संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच के बिना सत्य की तह तक नहीं पहुंचा जा सकता।

राफेल विमान सौदे में अब तक सिर्फ कांग्रेस ही सत्तारूढ भाजपा पर हमलावर रूख बनाये हुयी थी। इस मामले में सपा ऐसी दूसरी बडी पार्टी है जो इस मसले पर केन्द्र सरकार के खिलाफ मुखर हुयी है। इससे पहले कांग्रेस को उत्तर प्रदेश की एक अहम पार्टी बसपा से करारा झटका मिल चुका है जब पिछले सप्ताह बसपा प्रमुख ने कांग्रेस से किनारा करने वाले अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस के साथ छत्तीसगढ में चुनाव लडने का एलान किया था। इतना ही नहीं सुश्री मायावती ने मध्यप्रदेश में भी 22 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर कांग्रेस के महागठबंधन के प्रयास को चोट पहुंचायी थी।

बसपा प्रमुख के हालिया रूख को लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा-कांग्रेस और रालोद के बीच महागठबंधन की कोशिश को झटका माना जा रहा है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में समूची कांग्रेस ने राफेल विमान सौदे को लेकर विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाने पर रखा है। श्री गांधी इस सौदे पर भ्रष्टाचार और अनिमियतिता का आरोप लगाकर जेपीसी के गठन की मांग पर अमादा है। कांग्रेस के इस अभियान को सपा अध्यक्ष अखिलेश ने हवा दे दी है। वर्ष 2017 में सपा और कांग्रेस ने मिलकर विधानसभा चुनाव लडा था। उस चुनाव में अखिलेश और राहुल की जोडी को ‘ यूपी के लडके’ की संज्ञा से नवाजा गया था।

यादव ने सोमवार को यहां साइकिल रैली के समापन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा “ हम राफेल सौदे में जेपीसी जांच की मांग करते है। जेपीसी के बिना सच सामने नही आ सकता। यह मामला अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बन चुका है। ”

अायुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना को भी कठघरे में खडा करते हुये श्री यादव ने कहा कि यह योजना सार्वजनिक क्षेत्र में स्वास्थ्य ढांचे को कमजोर करेगी। इस योजना का फायदा निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को मिलना तय है हालांकि सरकारी अस्पताल की दशा इस योजना के आने से और बदहाल होगी।

 

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