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	<title>महागठबंधन &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>महागठबंधन &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>भाजपा जानवरो को तो रोक नही पाई आतंकवाद को रोकने की बात करती है : अखिलेश</title>
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		<pubDate>Sun, 05 May 2019 04:24:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमने तो दो दलों से गठबन्धन किया तो हम महा मिलावटी हो गए भाजपा ने तो 37 दलों से गठबन्धन किया उसे क्या कहा जाए! बाबा जी ठोक देने की बात करते है तभी तो कभी पुलिस पब्लिक को ठोक रही है तो कभी पब्लिक पुलिस को ठोक रही है ये है भाजपा सरकार क़ुतुब ... <a title="भाजपा जानवरो को तो रोक नही पाई आतंकवाद को रोकने की बात करती है : अखिलेश" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bjp-does-not-stop-animals-to-talk-about-preventing-terrorism-akhilesh-news/" aria-label="Read more about भाजपा जानवरो को तो रोक नही पाई आतंकवाद को रोकने की बात करती है : अखिलेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">
<ul>
<li dir="auto"><strong>हमने तो दो दलों से गठबन्धन किया तो हम महा मिलावटी हो गए भाजपा ने तो 37 दलों से गठबन्धन किया उसे क्या कहा जाए!</strong></li>
<li dir="auto"><strong>बाबा जी ठोक देने की बात करते है तभी तो कभी पुलिस पब्लिक को ठोक रही है तो कभी पब्लिक पुलिस को ठोक रही है ये है भाजपा सरकार</strong></li>
</ul>
<div dir="auto"><strong>क़ुतुब अंसारी</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बहराइच। शनिवार को बहराइच के गेंद घर मे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कैसरगंज के गठबंधन बसपा प्रत्याशी चन्द्रदेव राम यादव,बहराइच के सपा प्रत्याशी शब्बीर बाल्मीकि व श्रावस्ती के शिरोमणि वर्मा को भारी मतों से जिताने की अपील करते हुए  भाजपा पर जमकर तंज कसा कहा हमने गठबंधन किया हमारे गठबंधन को देख बीजेपी के होश उड़ गए है हमने दो दलों का गठबन्धन किया तो बीजेपी के लोग हमें महा मिलौटी कहने लगे और उन्होंने 37 दलों का गठबंधन किया तो वो कौन से मिलावटी हुए ? महा गठबंधन से बीजेपी का ऐसा होश उड़ गया है कि अब 2014 में किये गए एक भी वादा याद नहीं आ रहा l</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">अब नही बता रहे अच्छे दिन कब आएंगे  बीजेपी के लोगों ने कहा था हम किसानों की आय दोगुनी कर देंगे बताओ किस किसान की आय दोगुनी हुई l उन्होंने कहा था हम किसानों को लागत का डेढ़ गुना मुनाफा देंगे बताओ किस किसान को डेढ़ गुना मुनाफा मिला  बीजेपी के लोगो ने किसानों के पांच किलो यूरिया चोरी कर लिया पैसे लेते है पूरे और जब वजन करो तो उसमें पाँच किलो यूरिया कम निकलती है।</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बीजेपी ने नोट बंदी करी, कहते है भ्रष्टाचार खत्म हो गया l मैं कहता हूँ रुपया काला सफेद नहीं होता हमारा आपका लेन देन काला सफेद होता है l रुपया बन्द होने से कौन सा भ्रष्टाचार खत्म हो गया आज भी अधिकारी वही कर रहे है जो पहले करते थे ये बीजेपी वाले लोग प्रधान मंत्री को कह रहे थे पिछड़ा है और सही कागज़ चेक कर लो तो कुछ भी नहीं है धोका दे रहे थे ये लोग  सिर्फ चार पांच उद्योगपति को आपने सुना होगा पैसा लेकर भाग गए l ऐसे 36 हज़ार छोटे बड़े मिलाकर उद्योगपति है जो पैसे लेकर भारत छोड़ कर चले गए</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">बताओ नेता जी डिफेंस मिटिस्टर रहे मुख्यमंत्री रहे और हमे कह रहे है भैंस चरा रहे होते l जब मेरे बारे में बाबा जी ऐसा सोंच सकते है अन्य समाज के लिए क्या सोचते होंगे l बाबा जी मैं बता दूँ आपको मैं गाय भैंस वाला हूँ ढूध से काम चला लूंगा l आप ये बताइये आप क्या कर रहे होते मंदिर में घंटा बजा रहे होते   हमारे बाबा जी मुख्यमंत्री हमे कह रहे है अगर संविधान नहीं होता तो हम भैंस चरा रहे होते   हमारे बाबा मुख्य मंत्री जी कहते है कानून व्यवस्था ठीक करनी है तो ठोक दो   साँड़ से कितनो की जाने गई है मैं कहता हूँ अगर किसी को साँड मारे तो एफ आई आर बाबा जी पर होनी चाहिए  बीजेपी के लोग जब जानवरों को नहीं रोक पा ये तो ये आतंकवाद को क्या रोकेंगे हर रोज बॉर्डर पर एक जवान शहीद होता है  आज ये स्थिति हो गई है पुलिस जिसको चाहती है ठोक देती है पब्लिक को मौका मिलता है तो वो पुलिस को ठोक देती है ऐसी है हमारे बाबा जी की ठोको नीति आप लोग गठबंधन को जिताये हम आपको एक नया प्रधान मंत्री देंगे</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>डिग्री पर राजनीति: ईरानी के बचाव में बीजेपी ने उठाए राहुल के MPhil पर सवाल&#8230;</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/politics-on-degree-bjp-raises-questions-on-rahuls-mphil-in-defending-irani-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Apr 2019 15:11:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर सवाल उठाने के बाद अपने फेसबुक ब्लॉग के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की डिग्री और पढ़ाई पर सवाल खड़े किए हैं। जेटली ने पूछा कि राहुल गांधी ने बिना मास्टर डिग्री हासिल किए एमफिल की डिग्री कैसे हासिल कर ... <a title="डिग्री पर राजनीति: ईरानी के बचाव में बीजेपी ने उठाए राहुल के MPhil पर सवाल&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/politics-on-degree-bjp-raises-questions-on-rahuls-mphil-in-defending-irani-news/" aria-label="Read more about डिग्री पर राजनीति: ईरानी के बचाव में बीजेपी ने उठाए राहुल के MPhil पर सवाल&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone  wp-image-106357" src="http://janman.tv/wp-content/uploads/2019/04/WhatsApp-Image-2019-04-13-at-18.44.28-300x161.jpeg" alt="" width="1073" height="576" /></p>
<p>वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर सवाल उठाने के बाद अपने फेसबुक ब्लॉग के माध्यम से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की डिग्री और पढ़ाई पर सवाल खड़े किए हैं।</p>
<p>जेटली ने पूछा कि राहुल गांधी ने बिना मास्टर डिग्री हासिल किए एमफिल की डिग्री कैसे हासिल कर ली। अपने ब्लॉग &#8221;इंडियाज़ अपोजिशन इज ऑन ए रेंट ए कॉज कैंपेन&#8221; में जेटली ने कहा कि उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता पर बातें हो रही हैं लेकिन इस दौरान राहुल गांधी की शैक्षणिक योग्यता को भुला दिया जा रहा है। राहुल गांधी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर ऐसे कई सवाल हैं, जिनका अब तक जवाब नहीं मिला है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि राहुल ने बिना मास्टर डिग्री के एमफिल की पढ़ाई पूरी की है। इस बारे में आज तक कोई बात नहीं हो रही है, जबकि राहुल गांधी ने कई महीनों पहले खुद यह स्वीकार किया था। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने शनिवार को स्मृति ईरानी की डिग्री को लेकर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा था कि स्मृति ने अपने पिछले हलफनामे में खुद को ग्रेजुएट बताया था, जबकि अब वह कह रही हैं कि उन्होंने केवल 12वीं पास की है।</p>
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		<title>लोहिया पर PM मोदी का ब्लॉग, कांग्रेस और समाजवादी दलों पर साधा निशाना</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/pm-narendra-modi-targets-congress-and-socialist-parties-through-reference-of-ram-manohar-lohia-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Mar 2019 07:02:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया को याद करते हुए लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ विपक्षी दलों के महागठबंधन को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र ... <a title="लोहिया पर PM मोदी का ब्लॉग, कांग्रेस और समाजवादी दलों पर साधा निशाना" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/pm-narendra-modi-targets-congress-and-socialist-parties-through-reference-of-ram-manohar-lohia-news/" aria-label="Read more about लोहिया पर PM मोदी का ब्लॉग, कांग्रेस और समाजवादी दलों पर साधा निशाना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया को याद करते हुए लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खिलाफ विपक्षी दलों के महागठबंधन को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ब्लॉग में डॉ. राममनोहर लोहिया को उनकी 109वीं जयंती पर याद करते हुए लिखा, डॉ. लोहिया वंशवादी राजनीति को हमेशा लोकतंत्र के लिए घातक मानते थे। आज उसी कांग्रेस के साथ तथाकथित लोहियावादी पार्टियां अवसरवादी महामिलावटी गठबंधन बनाने को बेचैन हैं। यह विडंबना हास्यास्पद भी है और निंदनीय भी है। मोदी ने कहा कि आज डॉ. लोहिया यह देखकर जरूर हैरान-परेशान होते कि उनके ‘अनुयायी’ के लिए अपने परिवारों के हित देशहित से ऊपर हैं।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">जो लोग आज डॉ. लोहिया के सिद्धांतों से छल कर रहे हैं, वही कल देशवासियों के साथ भी छल करेंगे।</p>
<p>जो लोग डॉ. लोहिया के दिखाए रास्ते पर चलने का दावा करते हैं, वही क्यों उन्हें अपमानित करने में लगे हैं? पढ़िए मेरे विचार&#8230; <a href="https://t.co/FVzjkEXXSd">https://t.co/FVzjkEXXSd</a></p>
<p>&mdash; Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1109306053429219329?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">March 23, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सपा और आरजेडी पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, वे दल जो डॉ. लोहिया को अपना आदर्श बताते हुए नहीं थकते, उन्होंने पूरी तरह से उनके सिद्धांतों को तिलांजलि दे दी है। यहां तक कि ये दल डॉ. लोहिया को अपमानित करने का कोई भी कोई मौका नहीं छोड़ते। मोदी ने कहा, जो लोग आज डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों से छल कर रहे हैं, वही कल देशवासियों के साथ भी छल करेंगे। जो लोग डॉ. लोहिया के दिखाए रास्ते पर चलने का दावा करते हैं, वही क्यों उन्हें अपमानित करने में लगे हैं। मोदी ने कहा कि इन पार्टियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके लिए डॉ. लोहिया के विचार और आदर्श बड़े हैं या फिर वोट बैंक की राजनीति। आज 130 करोड़ भारतीयों के सामने यह सवाल मुंह बाये खड़ा है कि जिन लोगों ने डॉ. लोहिया तक से विश्वासघात किया, उनसे हम देश सेवा की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। जाहिर है, जिन लोगों ने डॉ. लोहिया के सिद्धांतों से छल किया है, वे लोग हमेशा की तरह देशवासियों से भी छल करेंगे। उन्होंने लिखा कि कांग्रेसवाद का विरोध डॉ. लोहिया के हृदय में रचा-बसा था।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उनके प्रयासों की वजह से ही 1967 के आम चुनावों में सर्वसाधन संपन्न और ताकतवर कांग्रेस को करारा झटका लगा था। जब कभी भी डॉ. लोहिया संसद के भीतर या बाहर बोलते थे, तो कांग्रेस में उसका भय साफ नजर आता था। मोदी के अनुसार कांग्रेस देश के लिए कितनी घातक हो चुकी है, इसे डॉ. लोहिया भलीभांति समझते थे। इसलिए 1962 में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस शासन में कृषि हो या उद्योग या फिर सेना, किसी भी क्षेत्र में कोई सुधार नहीं हुआ है। डॉ. लोहिया के विचार आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कृषि को आधुनिक बनाने तथा अन्नदाताओं के सशक्तीकरण को लेकर काफी कुछ लिखा।</p>
<p>उनके इन्हीं विचारों के अनुरूप एनडीए सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि सिंचाई योजना, ई-नेम, सॉयल हेल्थ कार्ड और अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों के हित में काम कर रही है। डॉ. लोहिया समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और महिलाओं एवं पुरुषों के बीच की असमानता को देखकर बेहद दुखी होते थे।‘सबका साथ, सबका विकास’ का हमारा मंत्र तथा पिछले पांच सालों का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि हमने डॉ. लोहिया के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। अगर आज वे होते तो एनडीए सरकार के कार्यों को देखकर निश्चित रूप से उन्हें गर्व की अनुभूति होती।</p>
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		<title>बुआ-बबुआ का गठबंधन : क्या ये होगा सीटो का गणित !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jan 2019 11:42:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी लोक सभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गयी है. इस बीच मायावती अखिलेश के गठबंधन से ये चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने ही उम्मीद है. यहाँ एक तरह सपा-बसपा चुनाव की जीत के लिए प्रयास कर रही है वाही दूसरी तरह भाजपा भी अपनी कमर कस चुकी है. बताते चले इस बीच  भारतीय ... <a title="बुआ-बबुआ का गठबंधन : क्या ये होगा सीटो का गणित !" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/sp-bsp-big-alliance-can-again-spell-success-against-bjp-after-25-years-news/" aria-label="Read more about बुआ-बबुआ का गठबंधन : क्या ये होगा सीटो का गणित !">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://new-img.patrika.com/upload/images/2017/06/04/Akhilesh-Mumayam--1496570593_835x547.jpg" alt="Related image" /></p>
<p>आगामी लोक सभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गयी है. इस बीच मायावती अखिलेश के गठबंधन से ये चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने ही उम्मीद है. यहाँ एक तरह सपा-बसपा चुनाव की जीत के लिए प्रयास कर रही है वाही दूसरी तरह भाजपा भी अपनी कमर कस चुकी है. बताते चले इस बीच  भारतीय राजनीति में एक बात बड़े ही भरोसे से कही जाती है- प्रधानमंत्री बनने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है. बताते चले अयोध्या विवाद के चरम के दौर में बीजेपी को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और बीएसपी सुप्रीमो कांशीराम के गठबंधन के ठीक 25 साल बाद उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से यूपी की दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन के आसार दिख रहे हैं। मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव और कांशीराम की उत्तराधिकारी मायावती का यह कदम एक बार फिर से बीजेपी को ही रोकने के लिए है, जिसने साल 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को हाशिये पर धकेल दिया था।</p>
<p><b>बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है महागठबंधन</b><br />
मीडिया के अनुसार  नतीजों पर गौर करें तो अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में अगर वोटिंग पैटर्न यही रहा तो एसपी-बीएसपी का गठबंधन बीजेपी की बढ़त को आधे पर समेट सकती है। अगर इसमें कांग्रेस को भी शामिल कर लिया जाए तो महागठबंधन उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से दो-तिहाई सीटों पर जीत हासिल कर सकता है। बता दें कि साल 2014 में यूपी की 80 सीटों में से बीजेपी को 71 सीटों पर जीत मिली थी जबकि उसकी सहयोगी अपना दल ने दो सीटों पर कब्जा किया था। वहीं एसपी 5 सीट और कांग्रेस महज 2 सीटों पर सिमट गई थी। बीएसपी को किसी भी सीट पर जीत नहीं मिली थी।</p>
<p><strong>साथ आए एसपी-बीएसपी तो जीत सकते हैं 41 सीटें</strong><br />
साल 2014 में अपना दल और बीजेपी का वोट शेयर एसपी-बीएसपी के कंबाइंड वोट शेयर से ज्यादा था। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हर सीट पर माइक्रो अनैलेसिस करने पर पता चला कि अगर एसपी-बीएसपी साथ आए तो तकरीबन 41 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को हरा सकते हैं। अगर इस गठबंधन में आरएलडी को भी शामिल कर लें तो यह आंकड़ा 42 तक पहुंच सकता है। अगर बीएसपी-एसपी-आरएलडी एक साथ आते हैं तो यह बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों को बुरी तरह हराने में कामयाब हो सकती हैं। हाल ही में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के लोकसभा उपचुनावों में इनका संयुक्त प्रभाव दिखा भी था।</p>
<div>
<div class="image">
<div class="imagecaption"><strong>मोदी सरकार का प्रदर्शन होगा मुख्य मुद्दा!</strong></div>
</div>
</div>
<p>वहीं राजनीतिक पंडितों का मानना है कि चुनाव परिणाम आंकड़ों के हिसाब से प्रेडिक्ट नहीं किए जा सकते। यह इस पर निर्भर है कि लोग किन मुद्दों पर वोट कर रहे हैं। साल 2014 में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार को लेकर जबर्दस्त एंटी-इंकम्बेंसी थी और लोगों ने बदलाव के लिए वोट किया था। 2019 में मोदी सरकार का प्रदर्शन मुख्य मुद्दा होगा।</p>
<p><strong>महागठबंधन को भुनाना भी आसान नहीं</strong><br />
हालांकि, महागठबंधन को भुना पाना भी आसान नहीं होगा। एक राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि एसपी के बहुत से वोटर्स ऐसे हैं जो बीएसपी को वोट नहीं करना चाहते। ऐसे ही बीएसपी के कई दलित वोटर्स एसपी से असहज होते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आरएलडी के वोटर्स बीएसपी को वोट नहीं करना चाहते। ऐसी सीटों पर पार्टी के बागी नेताओं को काफी फायदा मिल सकता है। गठबंधन को इस दिशा में सोचकर ही सीटों का बंटवारा करना फायदेमंद होगा।</p>
<p><strong>एसपी-बीएसपी के गठबंधन में नहीं है 1993 वाली बात</strong><br />
कुछ राजनीतिक विश्लेषक साल 1993 के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हैं जब एसपी-बीएसपी ने साथ चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में बीजेपी और एसपी-बीएसपी ने लगभग बराबर सीटें हासिल की थीं। तब उत्तराखंड यूपी का हिस्सा था और बीजेपी ने वहां 19 सीटें जीती थीं। एक अन्य राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि साल 1993 में आरएलडी चीफ अजीत सिंह जनता दल में थे और आज वह एसपी-बीएसपी गठबंधन में हैं। वहीं कुर्मी और राजभर जैसी ओबीसी जातियों का प्रतिनिधि करने वाले कई नेता जो तब बीएसपी में थे, अब बीजेपी में हैं। ऐसे में साल 1993 से इस गठबंधन की तुलना कुछ खास निष्कर्ष नहीं देगी।</p>
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		<title>मायावती बनीं अखिलेश के लिए रक्षाकवच, भाजपा के लिए ये जोड़ी बनी मुसीबत&#8230;</title>
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		<pubDate>Tue, 08 Jan 2019 11:44:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली. । &#8221;बुआ&#8221; (मायावती)बनीं &#8221;बबुआ&#8221;(अखिलेश ) की ढाल,अब देखना है कि बाद में दोनों को होगा मलाल या दोनों मिलकर उ.प्र. में लोक सभा चुनाव में करेंगे कमाल। इसके कारण अपनी करनी पर भाजपा को होगा मलाल। यह कहना है कि उ.प्र. के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र का। सुरेन्द्र कहते हैं कि भाजपानीत केन्द्र सरकार ... <a title="मायावती बनीं अखिलेश के लिए रक्षाकवच, भाजपा के लिए ये जोड़ी बनी मुसीबत&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mayawati-becomes-akhileshs-protectorate-bjp-made-trouble-for-the-pair-news/" aria-label="Read more about मायावती बनीं अखिलेश के लिए रक्षाकवच, भाजपा के लिए ये जोड़ी बनी मुसीबत&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://i.ndtvimg.com/i/2017-03/akhilesh-yadav-afp_650x400_71489070150.jpg" alt="Image result for à¤à¤à¤¿à¤²à¥à¤¶ à¤®à¤¾à¤¯à¤¾à¤µà¤¤à¥ " /></p>
<p>नई दिल्ली. । &#8221;बुआ&#8221; (मायावती)बनीं &#8221;बबुआ&#8221;(अखिलेश ) की ढाल,अब देखना है कि बाद में दोनों को होगा मलाल या दोनों मिलकर उ.प्र. में लोक सभा चुनाव में करेंगे कमाल। इसके कारण अपनी करनी पर भाजपा को होगा मलाल। यह कहना है कि उ.प्र. के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र का। सुरेन्द्र कहते हैं कि भाजपानीत केन्द्र सरकार और उसके हुक्मरानों का सीबीआई से समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव को डराने का दांव उल्टा पड़ गया। तथाकथित रणनीति तो यह थी कि जिस तरह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों के पहले बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को डराकर, उनके भाई को आय से अधिक सम्पत्ति व अन्य कई मामलों में सीबीआई के मार्फत पूछताछ के लिए तीन दिन रोक कर, बसपा का कांग्रेस से गठबंधन नहीं करने दिया गया|उसी तरह से अखिलेश के मुख्यमंत्री रहने के दौरान खनन मामले में आईएएस महिला अफसर चंद्रकला सहित 11 लोगों के 14 स्थानों पर सीबीआई से छापा मरवाकर, अखिलेश यादव को डरा दिया जाएगा।</p>
<p>इस मामले में पूछताछ व गिरफ्तारी के डर से अखिलेश यादव भी उसी तरह से बसपा से गठबंधन नहीं करेंगे, जिस तरह से मायावती ने सीबीआई के डर से कांग्रेस से गठबंधन नहीं किया। लेकिन इस बार भाजपानीत केन्द्र सरकार का यह दांव उल्टा पड़ गया। इसकी वजह यह है कि अब लोकसभा चुनाव सिर पर है। महाराष्ट्र भाजपा के एक पदाधिकारी ने संकेत दे ही दिया है कि मार्च के पहले सप्ताह में लोकसभा चुनाव की घोषणा हो जाएगी। उसके पहले जनवरी के अंत में कुछ दिन के लिए बजट सत्र होगा। इस दौरान यदि केन्द्र की सत्ताधारी पार्टी ने किसी मामले में अखिलेश यादव को सीबीआई के मार्फत गिरफ्तार कराया, तो उनकी गिरफ्तारी के विरोध में न केवल सपा कार्यकर्ता बल्कि बसपा कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आएंगे।</p>
<p>इसका समर्थन अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ता भी करेंगे। सीबीआई ने बुआ व बबुआ दोनों को डराकर एकजुट होने के लिए मजबूर कर दिया। इनके पीछे अन्य राज्यों के विपक्षी दलों के नेता जिनके पीछे सीबीआई को लगाया गया है, वे भी एकजुट हो गए। इस तरह केन्द्र की सत्ताधारी पार्टी का सीबीआई वाला दांव उल्टा पड़ गया है। इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय के वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी जिन्होंने आय से अधिक सम्पत्ति मामले में सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव, उनके पुत्र अखिलेश यादव व अन्य के विरूद्ध 11 वर्ष पहले मुकदमा किया है और उस पर न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है, का कहना है कि केन्द्र की भाजपानीत सरकार ने खनन मामले में तो अखिलेश यादव को केवल डराने के लिए और बसपा से गठबंधन नहीं करने देने के लिए सीबीआई का छापा आईएएस अफसर चन्द्रकला सहित 11 लोगों के 14 स्थानों पर डलवाया है। इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि न्यायालय के आदेश पर सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है| वह अखिलेश से भी पूछताछ कर सकती है, गिरफ्तार कर सकती है।</p>
<p>चतुर्वेदी का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेश की दुहाई दी जा रही है, तो सर्वोच्च न्यायालय ने तो मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के आय से अधिक सम्पत्ति मामले में 11 वर्ष पहले ही सीबीआई जांच के आदेश दे रखा है। अभी तक सीबीआई ने उस मामले में क्या किया है। उसी का डर दिखाकर बिहार विधानसभा चुनाव के समय मुलायम सिंह यादव को महागठबंधन से अंतिम समय में अलग कराकर गठबंधन के नेताओं को झटका दिया गया था। इसलिए यह तर्क देना कि सीबीआई उच्च न्यायालय के आदेश ( 2016 में) पर जांच कर रही है और छापे मारी है, तो 2016 से अब तक, तीन साल से सीबीआई क्या कर रही थी? जब अखिलेश यादव दिल्ली में मायावती से मिले, उ.प्र. में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा-बसपा गठबंधन करके चुनाव लड़ने के लिए बातचीत करने गये थे| उसके दूसरे दिन चन्द्रकला सहित 11 लोगों के यहां छापा पड़ता है और सीबीआई व पार्टी विशेष के लोग बयान देते हैं कि अब अखिलेश यादव से इस मामले में पूछताछ होगी, उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।</p>
<p>इससे साफ संकेत है कि अखिलेश पर बसपा से गठबंधन नहीं करने के लिए दबाव बनाने के लिए यह सब किया गया है। यदि इस मामले में सीबीआई व डीओपीटी तथा केन्द्र सरकार को सचमुच कुछ करना होता, भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाना होता तो वह दो वर्ष पहले ही यह काम कर सकती थी। इसके अलावा भी मायावती, मुलायम व अखिलेश यादव के विरूद्ध कई मामले न्यायालय के आदेश से सीबीआई के पास जांच के लिए पड़े हुए हैं।</p>
<p>उनके विरूद्ध खाद्यान्न घोटाले, जमीन आवंटन घोटाले जैसे मुद्दों पर सीबीआई, केन्द्र सरकार एक दशक से क्यों कुंडली मारे बैठी है? इससे आशंका होने लगी है कि केन्द्र सरकार की मंशा अपने तथाकथित औजार तोता (सीबीआई) के मार्फत सपा व बसपा नेताओं को डरा कर अपना राजनीतिक हित साधने की है। इस बारे में भाजपा सांसद लालसिंह बड़ोदिया का कहना है कि सीबीआई न्यायालय के आदेश से अपना काम कर रही है। इसमें भाजपा व केन्द्र सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए जो लोग भी इस तरह का आरोप लगा रहे हैं वह गलत है। जनता सबके बारे में जानती है कि कौन क्या है। इसका जवाब वह लोकसभा चुनाव में देगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>यूपी में &#8220;गठबंधन&#8221; तैयार : मायावती + अखिलेश -राहुल, अब एक क्लिक में जानिए आगे क्या होगा&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jan 2019 12:12:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी लोक सभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गयी है. इस बीच मायावती अखिलेश के गठबंधन से ये चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने ही उम्मीद है. यहाँ एक तरह सपा-बसपा चुनाव की जीत के लिए प्रयास कर रही है वाही दूसरी तरह भाजपा भी अपनी कमर कस चुकी है. बताते चले इस बीच  भारतीय ... <a title="यूपी में &#8220;गठबंधन&#8221; तैयार : मायावती + अखिलेश -राहुल, अब एक क्लिक में जानिए आगे क्या होगा&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/mahagathbandhan-sp-bsp-congress-mayawati-akhilesh-yadav-rahul-gandhi-uttar-pradesh-bjp-lok-sabha-elections-news/" aria-label="Read more about यूपी में &#8220;गठबंधन&#8221; तैयार : मायावती + अखिलेश -राहुल, अब एक क्लिक में जानिए आगे क्या होगा&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आगामी लोक सभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गयी है. इस बीच मायावती अखिलेश के गठबंधन से ये चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने ही उम्मीद है. यहाँ एक तरह सपा-बसपा चुनाव की जीत के लिए प्रयास कर रही है वाही दूसरी तरह भाजपा भी अपनी कमर कस चुकी है. बताते चले इस बीच  भारतीय राजनीति में एक बात बड़े ही भरोसे से कही जाती है- प्रधानमंत्री बनने का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है.</p>
<p>इस भरोसे की सबसे बड़ी वजह तो यही है कि भारत में सबसे ज़्यादा &#8211; जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी और तो और नरेंद्र मोदी भी(NKB) &#8211; प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश से चुनाव जीतकर आते रहे.</p>
<p>दूसरी वजह देखनी हो तो 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए इस राज्य ने सबसे ज़्यादा 73 सांसदों को जिताया,</p>
<p>ये सवाल पिछले साल हुए गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के उपचुनाव के नतीजों के बाद से ही तैरने लगे थे, जिसमें विपक्ष के महागठबंधन ने बीजेपी के उम्मीदवारों को हरा दिया था.<br />
शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी के अध्यक्ष मायावती की मुलाकात ने नई दिल्ली की ठिठुराती सर्दी में राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है.</p>
<p>माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान 2019 के आम चुनावों के लिए बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में सहमति बन गई है, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. लेकिन दोनों पार्टी में कई नेताओं का दावा है कि कुछ दिनों में तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो जाएगी.</p>
<p><strong>गठबंधन पर सहमति</strong></p>
<p>अखिलेश यादव के भाई और बदायूं से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव का कहना है, &#8220;यूपी में गठबंधन के लिए शीर्ष स्तर पर लगातार बात हो रही है, समय आने पर गठबंधन की घोषणा कर दी जाएगी. &#8221;<br />
वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हफ़ीज गांधी बताते हैं, &#8220;गठबंधन को लेकर आपसी सहमति बन गई है.&#8221;<br />
राहुल गांधी- सोनिया गांधी</p>
<p><strong>मायावती ने ऐसा क्या कह दिया कि मोदी की नींद उड़ जाएगी?</strong></p>
<p><strong>क्यों बोलीं मायावती, &#8216;फिर होगी बीजेपी की हालत ख़राब&#8217;</strong></p>
<p>हालांकि अभी ये पूरी तरह तय नहीं है कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा, इसको लेकर तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अभी ये भी तय नहीं है कि गठबंधन में कौन कौन से दूसरे दल शामिल होंगे.<br />
अब्दुल हफ़ीज कहते हैं, &#8220;कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा या फिर गठबंधन में और कौन से दल शामिल होंगे, इसके बारे में अंतिम फ़ैसला दोनों पार्टी के अध्यक्ष तय करेंगे.&#8221;<br />
वैसे गठबंधन के भविष्य को लेकर कुछ सवाल सहयोगी दलों को लेकर भी बने हुए हैं, मसलन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन में कांग्रेस शामिल होगी या नहीं, ये सस्पेंस बना हुआ है.</p>
<p>मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के दो सांसद हैं- सोनिया गांधी और राहुल गांधी. ये भी कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इन्हीं दोनों सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार हैं.<br />
जबकि दूसरी ओर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने से कांग्रेस पार्टी का मनोबल बढ़ा हुआ है. लेकिन कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने की संभावना अभी भी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है.</p>
<p><strong>कांग्रेस का क्या होगा?</strong></p>
<p>कांग्रेस विधानमंडल के नेता अजय कुमार लल्लू ने बताया, &#8220;महागठबंधन के लिए शीर्ष नेताओं के स्तर पर लगातार बातचीत जारी है. अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.&#8221; हालांकि कांग्रेस राज्य की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने के प्लान बी पर भी काम शुरू कर चुकी है.</p>
<p>समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के खेमे में भी कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने की</p>
<p>स्थिति में भारतीय जनता पार्टी का नुक़सान बढ़ेगा.<br />
वैसे, समाजवादी पार्टी- बहुजन समाज पार्टी अपने गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल के अलावा कुछ अन्य दलों को भी साथ लेने पर विचार कर रही है, इसमें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (अभी एनडीए में शामिल) और अन्य छोटे छोटे दल शामिल हैं.</p>
<p>कयास लगाए जा रहे हैं कि इस गठबंधन का एलान मायावती के जन्मदिन पर यानी 15 जनवरी को किया जा सकता है, वैसे दिलचस्प ये है कि इसी दिन अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का भी जन्म दिन पड़ता है.<br />
औपचारिक एलान होने से पहले ही, अखिलेश यादव और मायावती की मुलाकात ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. मुलाकात की ख़बर आने के कुछ ही घंटों के बाद उत्तर प्रदेश में अवैध खनन मामले में सीबीआई जांच की ख़बर भी सामने आई है.<br />
इस मामले में उत्तर प्रदेश में सीबीआई ने 12 जगह छापे मारे हैं, जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मामले में अखिलेश यादव से भी पूछताछ हो सकती है, क्योंकि मुख्यमंत्री रहते हुए 2012-13 के दौरान कुछ समय के लिए खनन विभाग उनके अधीन रहा है.</p>
<p><strong>सीबीआई की जांच</strong></p>
<p>वैसे तो ये जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से हो रही है जिसके तहत सीबीआई राज्य के पांच ज़िलों शामली, हमीरपुर, फतेहपुर, देवरिया और सिद्धार्थ नगर में अवैध रेत खनन के मामलों की जांच कर रही है. लेकिन गठबंधन की ख़बर सामने आने के बाद जिस तरह से जांच में तेजी देखने को मिली है, उसे देखते हुए इस जांच की टाइमिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं.</p>
<p><strong>महागठबंधन बना तो होगा कितना दमदार</strong></p>
<p>समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हफ़ीज गांधी कहते हैं, &#8220;हम सीबीआई जांच का स्वागत करते हैं. लेकिन यूपी में उभरते गठबंधन की ख़बर आने के एक दिन बाद ही सीबीआई रेड डालना कहीं ना कहीं केंद्र सरकार की मंशा पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है.&#8221;<br />
वैसे भी जिस तरह से भारत में विपक्षी दलों को डराने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल होता रहा है, उसे देखते हुए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि ये जांच राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा हो, कम-से-कम टाइमिंग से यही आशंका उभरती है.</p>
<p>ये आशंका पहले भी जताई जा रही थी कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों और जांच एजेंसियों के रहते, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के किसी गठबंधन की कोशिशों को प्रभावित करना आसान होगा.<br />
वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार अंबिकानंद सहाय कहते हैं, &#8220;जांच की टाइमिंग पर तो सवाल उठेंगे ही लेकिन इससे अखिलेश यादव को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होने वाला है क्योंकि परसेप्शन तो यही बनेगा कि गठबंधन के चलते ही जांच में तेजी आई है. तो चुनावी फ़ायदा उनको मिलने की संभावना ज़्यादा होगी.&#8221;</p>
<p><strong>वोट बैंक में किसका पलड़ा भारी?</strong></p>
<p>दरअसल, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के एक साथ चुनाव मैदान में आने से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों को नुक़सान पहुँचना तय है, इसकी सबसे बड़ी वजह दोनों पार्टियों का अपना-अपना वोट बैंक है जिसके एक साथ आने पर राजनीतिक तौर पर वह विनिंग कॉम्बिनेशन बनाते हैं.<br />
2014 के चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी 73 सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब रही थी, तब बीजेपी को 42.6 फ़ीसदी वोट मिले थे. उस वक्त समाजवादी पार्टी को 22.3 फ़ीसदी और बहुजन समाज पार्टी को 20 फ़ीसदी के करीब वोट मिले थे.<br />
वहीं 2017 के विधानसभा चुनावों में 312 सीटें जीतने वाली बीजेपी को 39.7 फ़ीसदी वोट मिले थे जबकि बहुजन समाज पार्टी को 22 और समाजवादी पार्टी को 22 फ़ीसदी वोट मिले थे.<br />
ज़ाहिर है समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का अपना वोट बैंक मिलकर बीजेपी के मुक़ाबले बीस बैठता है, इसके अलावा दोनों पार्टी अपने कैडर वोट के सीधे ट्रांसफ़र कराने का दावा करती रही है.</p>
<p>समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव कहते हैं, &#8220;एक महीने पहले भी हमारे कार्यकर्ताओं को मालूम हो जाए कि गठबंधन हो गया है तो उससे कोई गफ़लत नहीं होगी, हालांकि इस बार हमलोग चुनाव में तैयारी के साथ जाएंगे तो कार्यकर्ताओं को बहुत पहले से सब मालूम रहेगा.&#8221;<br />
समाजवादी पार्टी के वोट बैंक को शिवपाल यादव के मोर्चे के अलग चुनाव लड़ने से नुक़सान भी उठाना पड़ेगा. इसके अलावा सीटों के बंटवारे से दोनों पार्टियों को कुछ सीटों पर बाग़ी उम्मीदवारों का सामना करने की आशंका भी है, बावजूद इसके समाजवादी पार्टी- बहुजन समाज पार्टी के मतदाताओं का गणित भारतीय जनता पार्टी की मुसीबतों को बढ़ा सकता है.</p>
<p><strong>क्या मंच पर लागू नहीं होता योगी का क़ानून राज?</strong><br />
<strong>राजनीतिक भूकंप के वो तीन घंटे जिसमें टूट गया महागठबंधन</strong></p>
<p>इसकी झलक गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के उपचुनावों के दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के आपसी गठबंधन के दौरान बीजेपी के नेताओं के बयानों से झलकता है. गोरखपुर उपचुनाव की एक रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था, &#8216;जब तूफ़ान आता है तो सांप और छुछूंदर एक साथ खड़े हो जाते हैं.&#8217;</p>
<p><strong>मोदी-योगी के नाम का भरोसा</strong></p>
<p>लेकिन बीजेपी को भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता उसकी नैया को पार लगा देगी. हालांकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया है. नड्डा के अलावा गोरधन झपाड़िया, दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा को सह-प्रभारी बनाया है.</p>
<p>दुष्यंत गौतम ने बीबीसी से बताया, &#8220;सपा-बसपा के जिस गठबंधन की बात हो रही है, वो स्वार्थ पर आधारित गठबंधन होगा, इन लोगों के पास राज्य के लोगों के लिए कोई योजना नहीं है. जबकि बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारें लगातार लोगों के लिए काम कर रही हैं. हमें मोदी जी और योगी जी के कामों का फ़ायदा मिलेगा.&#8221;</p>
<p>दुष्यंत गौतम ये भी दावा करते हैं कि सपा-बसपा गठबंधन का बहुत ज़्यादा असर इसलिए भी नहीं होगा क्योंकि देश का युवा प्रधानमंत्री मोदी में अपना भविष्य देख रहा है. वे कहते हैं कि लोगों को मालूम है कि 2019 का चुनाव प्रधानमंत्री पद के लिए होना है और इस रेस में मोदी जी के सामने कोई है ही नहीं.</p>
<p>हालांकि राज्य में बीजेपी के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और अपना दल भी नाराज चल रहे हैं, इन दोनों दलों का पूर्वी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर अच्छा प्रभाव है, ऐसे में बीजेपी की कोशिश अपने कुनबे को संभालने की भी है. ऐसा करके ही बीजेपी अपने सवर्ण वोट बैंक के अलावा पिछड़ों और दलितों के कुछ तबके का वोट हासिल कर पाएगी.<br />
लेकिन वोटों के गणित में पलड़ा सपा-बसपा गठबंधन का भारी दिख रहा है. ठीक 25 साल पहले, 1993 में मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम से हाथ मिलाकर राम मंदिर आंदोलन की लहरों पर सवार बीजेपी को पछाड़ कर सरकार बनाने का करिश्मा कर दिखाया था.</p>
<p><strong>25 साल पुराना इतिहास</strong></p>
<p>अंबिकानंद सहाय कहते हैं, &#8220;जब जब चुनाव में विकास का मुद्दा पिछड़ेगा, चुनाव जाति आधारित होगा, तब तब यही तस्वीर उभरेगी. 1993 में तो नारा लगा था, मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्रीराम.&#8221;<br />
यही वो भरोसा है कि मार्च, 2018 में राज्यसभा सीट के अपने उम्मीदवार भीमराव आंबेडकर की हार के बाद भी गठबंधन पर भरोसा जताते हुए मायावती ने कहा था, &#8220;जीत के बाद रात भर लड्डू खा रहे होंगे लेकिन मेरी प्रेस कांफ्रेंस के बाद बीजेपी वालों को फिर नींद नहीं आएगी.&#8221;</p>
<p>अब जब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ आकर गठबंधन पर सहमत हो गए हैं, ऐसे में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को उत्तर प्रदेश के अंदर अपनी रणनीति को चाक चौबंद करना होगा, क्योंकि यूपी में अगर खेल बिगड़ा तो फिर केंद्र में वापसी नामुमकिन होगी.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उ.प्र. बना लोकसभा चुनाव का रण केन्द्र, चलने लगे गठबंधन, सीबीआई, आईटी, ईडी के ब्रह्मास्त्र</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/u-p-lok-sabha-polling-center-running-coalition-cbi-it-ed-brahmastra-news/</link>
		
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		<pubDate>Sun, 06 Jan 2019 08:39:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली । लोकसभा के चुनाव में दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश ही आसान बनाता है । वर्तमान परिस्थितियों और केन्द्रीय एजेंसियों की कारवाइयों से लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बड़ा रण केन्द्र उ.प्र. बन गया है। 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में उ.प्र. की बदौलत ही कांग्रेसनीत संयुक्त ... <a title="उ.प्र. बना लोकसभा चुनाव का रण केन्द्र, चलने लगे गठबंधन, सीबीआई, आईटी, ईडी के ब्रह्मास्त्र" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/u-p-lok-sabha-polling-center-running-coalition-cbi-it-ed-brahmastra-news/" aria-label="Read more about उ.प्र. बना लोकसभा चुनाव का रण केन्द्र, चलने लगे गठबंधन, सीबीआई, आईटी, ईडी के ब्रह्मास्त्र">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली । लोकसभा के चुनाव में दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश ही आसान बनाता है । वर्तमान परिस्थितियों और केन्द्रीय एजेंसियों की कारवाइयों से लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बड़ा रण केन्द्र उ.प्र. बन गया है। 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में उ.प्र. की बदौलत ही कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के लिए दिल्ली की सत्ता की राह आसान हुई थी।</p>
<p>2014 के लोकसभा चुनाव में उ.प्र. ने ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लोकसभा की 71 सीटें देकर दिल्ली पर राज करने लायक बनाया था । अब 2019 के लोकसभा चुनाव में उ.प्र की जनता क्या करती है, इस पर सबकी निगाह लगी हुई है। जहां तक राजनीतिक जोड़-तोड़, गणित का सवाल है तो 2014 के लोकसभा चुनाव में उ.प्र. में कांग्रेस , समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अलग-अलग लड़े थे। भाजपा अपना दल के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी। भाजपा को राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटें और 42.6 प्रतिशत वोट मिले थे। बसपा 19.8 प्रतिशत और सपा को 22.3 प्रतिशत वोट मिले थे। इन दोनों (सपा व बसपा) को अलग-अलग जो वोट मिले थे उसे जोड़ने पर 42.1 प्रतिशत होता है।</p>
<p>इस बारे में उ.प्र. के पूर्व मंत्री सुरेन्द्र का कहना है कि यदि सपा और बसपा 2014 में लोकसभा चुनाव मिलकर लड़े होते तो इन दोनों के मतदाताओं के एकजुट होने व इससे माहौल बनने से इनके संयुक्त वोट 02 प्रतिशत के लगभग बढ़कर 44.1 प्रतिशत के लगभग हो गये होते। यह हुआ होता तो यह गठबंधन 2014 में ही भाजपा को उ.प्र. में 34 सीटों पर समेट दिया होता। सपा-बसपा गठबंधन को लगभग 36 सीटें मिल गयी होती । 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों यदि गठबंधन करके चुनाव लड़ें, तब राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से लगभग 40 सीटें जीत सकते हैं। बसपा नेता ईश्वर मावी का कहना है कि बसपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उ.प्र. में 45 सीटों पर जीत की मार्जिन से अधिक वोट पाई है। वरिष्ठ पत्रकार वशिष्ठ नारायण का कहना है कि यदि इसका गठबंधन 2019 में सपा से हो जाता है, तो उन लोकसभा सीटों पर जहां सपा दूसरे स्थान पर थी ,</p>
<p>वे सीटें वह आसानी से निकाल सकती हैं | और जिन सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर थी वे सीटें बसपा आसानी से निकाल लेगी। वरिष्ठ पत्रकार नवेन्दु का कहना है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती ने आपसी राग-द्वेष भुलाकर 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने के लिए जो पहल की है , यदि वह परवान चढ़ गई और ये दोनों थोड़ा झुककर कांग्रेस और रालोद से भी गठबंधन कर लें , तब तो जो माहौल बनेगा उसमें यह गठबंधन उ.प्र. में लोकसभा की 80 में से 70 से अधिक सीटें जीत सकता है। यही वजह है कि सभी लोग उ.प्र. में अगले दो माह में बनने – बिगड़ने वाले राजनीतिक समीकरण की तरफ देख रहे हैं । इस संभावना से डरी भाजपानीत केन्द्र सरकार ने अपना ब्रह्मास्त्र सीबीआई, ईडी,आयकर चलाना शुरू कर दिया है।</p>
<p>अध्ययन अवकाश पर गईं उ.प्र. की चर्चित आईएएस अफसर चन्द्रकला सहित 11 लोगों के यहां अवैध खनन मामले में शनिवार 5 जनवरी 2019 को सीबीआई ने 14 जगहों पर जो छापा मारा है वह इसका प्रमाण है। चन्द्रकला को यदि सीबीआई गिरफ्तार करती है, तो उनसे पूछताछ को आधार बनाकर तबके मुख्यमंत्री व खनन मंत्री अखिलेश यादव को भी पूछताछ के लिए नोटिस दिया जा सकता है | बसपा प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती व उनके भाई से भी पूछताछ कर सकती है। नवेन्द् का कहना है, “अब देखना है कि इस डर से अखिलेश व मायावती गठबंधन क्या नहीं करते हैं? सपा व बसपा अकेले – अकेले लड़ते हैं |</p>
<p>या अपने अस्तित्व की अंतिम लड़ाई मानकर लड़ते हैं | अखिलेश व मुलायम दोनों को ही पता है कि इस बार यदि गठबंधन नहीं हुआ तो कांग्रेस से अधिक सपा व बसपा को नुकसान होगा, रालोद को भी नुकसान होगा । इस तरह चारो को ही बहुत अधिक नुकसान होगा। यदि चारो का गठबंधन हो गया तब तो भाजपा के चुनावी रथ के धुर्रे बिखर जायेंगे और उसको अकेले उ.प्र. में ही 60 से अधिक सीटों का नुकसान पहुंचाते हुए सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद व अन्य दलों के महागठबंधन का संयुक्त विजय रथ दिल्ली की सत्ता की राह ले सकता है |</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>बिहार में महागठबंधन में महासंग्राम, कुशवाहा पर बोले तेजस्वी- आज शाम तक पत्ते हो जायेंगे साफ</title>
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		<pubDate>Thu, 20 Dec 2018 08:59:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी  लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में सियासी संग्राम शुरू हो गया है. बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) गुरुवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में शामिल हो सकती है  खबर के मुताबिक, गुरुवार शाम तक महागठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है और इसमें राष्ट्रीय लोक समता ... <a title="बिहार में महागठबंधन में महासंग्राम, कुशवाहा पर बोले तेजस्वी- आज शाम तक पत्ते हो जायेंगे साफ" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/tejashwi-yadav-said-things-will-be-clear-by-today-evening-for-bihar-mahagathbandhan-news/" aria-label="Read more about बिहार में महागठबंधन में महासंग्राम, कुशवाहा पर बोले तेजस्वी- आज शाम तक पत्ते हो जायेंगे साफ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="" src="https://static.langimg.com/thumb/msid-66772407,width-400,resizemode-4/1.jpg" alt="Image result for à¤¤à¥à¤à¤¸à¥à¤µà¥" width="829" height="620" /></p>
<p>आगामी  लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में सियासी संग्राम शुरू हो गया है. बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) गुरुवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) में शामिल हो सकती है  खबर के मुताबिक, गुरुवार शाम तक महागठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है और इसमें राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी शामिल हो सकते हैं। आरजेडी नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस ओर इशारा करते हुए कहा है कि आज शाम तक तस्वीर साफ हो जाएगी। उधर एलजेपी के अल्टिमेटम देने के बाद बिहार सीएम नीतीश कुमार दिल्ली में शुक्रवार को अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं।</p>
<h3>मीडिया से बातचीत में तेजस्वी ने कहा</h3>
<p>&#8216;चीजें आज शाम तक स्पष्ट हो जाएंगी और आपको सब मालूम हो जाएगा। हमने पहले भी लोगों को बुलाया है। अगर उपेंद्र कुशवाहा जी देश के लिए अच्छा चाहते हैं तो हम उन्हें आमंत्रित करते हैं। इधर क्षेत्रीय पार्टियों को कुचलने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां तक कि एलजेपी भी मोदी जी के गुट से खुश नहीं है और यह तथ्यों को साबित करता है।&#8217;</p>
<p>बताया जा रहा है कि दिल्ली में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा( हम) नेता जीतनराम मांझी, आरएलएसपी लीडर उपेंद्र कुशवाहा की बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद ही महागठबंधन का औपचारिक रूप से ऐलान हो सकता है। हालांकि सीटों के बंटवारे में अभी कुछ और वक्त लिया जा सकता है। अभी तक जो तस्वीर बनती दिख रही है उसके अनुसार, विपक्षी खेमे को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव लीड कर सकते हैं।</p>
<p>उधर, कांग्रेस नेता रंजीत रंजन का भी बयान इस पर सामने आया है। रंजन ने कहा, &#8216;चिराग पासवान जी और रामविलास पासवान जी ने मौसम का मिजाज समझ लिया है और अब वे डूबती नैया में पांव नहीं रखना चाहते हैं। उन्हें एहसास हो चुका है कि जो मुद्दे ये NDA के साथ लेकर चले थे वे गलत हैं। वैसे तो तय आलाकमान करते हैं लेकिन मुझे लगता है कि हमारे दरवाजे खुले हैं और हम स्वागत करेंगे।&#8217;</p>
<p><strong>बिहार में महागठबंधन की हो रही तैयारी </strong><br />
लोकसभा चुनाव में विरोधी दलों ने महागठबंधन की कवायद तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी तीन राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद सबके साथ चलने की बात कही थी। बिहार में महागठबंधन से एनडीए की उम्मीदों को झटका लग सकता है। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अभी चर्चा की शुरुआत कह सकते हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव लगातार महागठबंधन की बात कर रहे हैं और तीन राज्यों के शपथ ग्रहण समारोह में तेजस्वी का हिस्सा लेने उसी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>कुशवाहा के बाद पासवान ने भी दिखाए तेवर </strong><br />
उधर बिहार में एनडीए के सहयोगी एलजेपी के रामविलास पासवान और उनके बेटे चिराग ने कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी की तारीफ कर अपने बदले हुए तेवर दिखा दिए हैं। तीन राज्यों के नतीजों के बाद से सीट शेयरिंग को लेकर एलजेपी की तरफ से भी दबाव बनाया जा रहा है। वहीं मंगलवार को चिराग पासवान के एक ट्वीट ने इसे और स्पष्ट कर दिया है। इसके बाद बुधवार को पार्टी की ओर से बीजेपी को 31 दिसंबर तक का अल्टिमेटम भी दे दिया गया था।<br />
<strong><br />
फैसला पासवान को ही लेना होगा</strong><br />
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस वक्त बैक डोर से रामविलास पासवान से कोई बातचीत नहीं हो रही है। हालांकि कांग्रेस सूत्र ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि देश हित में फैसला रामविलास पासवान को ही लेना है। कांग्रेस पार्टी इस वक्त पासवान के लिए उस तरह से सख्त नहीं हो सकती जैसे नीतीश कुमार के लिए है।</p>
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		<title>लखनऊ : नागरिक एकता पार्टी ने फूंका चुनावी बिगुल&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Sep 2018 16:09:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[नागरिक एकता पार्टी]]></category>
		<category><![CDATA[महागठबंधन]]></category>
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					<description><![CDATA[जाति, पंथ, मजहब से परे होगी नागरिक एकता पार्टी-मो. शमीम -नवगठित नागरिक एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया पार्टी का एजेंडा &#8211; पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी सपा-बसपा को लिया आड़े हाथों लखनऊ। देश-प्रदेश में हो रही धर्म और जाति की राजनीति को जड़ से खत्म करना पार्टी का मुख्य उद्देश्य है। सपा ... <a title="लखनऊ : नागरिक एकता पार्टी ने फूंका चुनावी बिगुल&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/lucknow-citizen-ekta-party-blows-election-campaign-news/" aria-label="Read more about लखनऊ : नागरिक एकता पार्टी ने फूंका चुनावी बिगुल&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>जाति, पंथ, मजहब से परे होगी नागरिक एकता पार्टी-मो. शमीम</strong><br />
<strong>-नवगठित नागरिक एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया पार्टी का एजेंडा</strong><br />
<strong>&#8211; पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी सपा-बसपा को लिया आड़े हाथों</strong></li>
</ul>
<p>लखनऊ। देश-प्रदेश में हो रही धर्म और जाति की राजनीति को जड़ से खत्म करना पार्टी का मुख्य उद्देश्य है। सपा और बसपा का सपोर्ट करने वालों का हाल बेहाल है। लोकसभा चुनाव में सभी 80 सीटों पर चुनाव लडऩे की तैयारी की जा रही है। यह बातें नागरिक एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. शमीम खान ने बुधवार को गोमती नगर स्थित एक होटल में कही। उन्होंने कहा कि 2022 तक हमारी पार्टी और भी मजबूत स्थिति में होगी। कहा कि बिना हमारी पार्टी के सपोर्ट के देश अथवा प्रदेश में किसी की सरकार नहीं बन सकती।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-11027" src="http://www.dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-300x169.jpeg" alt="" width="747" height="421" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-1024x576.jpeg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-192x108.jpeg 192w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-384x216.jpeg 384w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-364x205.jpeg 364w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-728x410.jpeg 728w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-561x316.jpeg 561w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-758x426.jpeg 758w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-608x342.jpeg 608w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-85x48.jpeg 85w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-171x96.jpeg 171w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-313x176.jpeg 313w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47-600x338.jpeg 600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/09/WhatsApp-Image-2018-09-26-at-18.34.47.jpeg 1032w" sizes="(max-width: 747px) 100vw, 747px" /></p>
<p><strong>युवाओं को मिले 18,000 प्रतिमाह</strong><br />
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि हर सरकार रोजगार देने का दावा करती है। हमारी पार्टी का मुख्य मुद्दा भी रोजगार को लेकर है। हमारी पार्टी रोजगार के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। आज का युवा 6000 और 8000 की नौकरी कर रहा है। जबकि युवाओं को कम से कम 18000 रुपए प्रतिमाह किया जाना चाहिए। पिछली सरकार सिर्फ दावा करती है, हमारी सरकार आने पर काम करेगी। युवा वर्ग देश का भविष्य है। इसकी उपेक्षा हमारी पार्टी कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगी।</p>
<p>तीन बीघे से कम खेती वाले किसानों का बिल माफ<br />
बसपा, सपा या भाजपा सभी पार्टियों ने किसानों का शोषण किया है। उनके हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हमारी पार्टी यदि सत्ता में आई तो तीन बीघे से कम खेती वाले किसानों का बिजली बिल माफ करेंगे। यही नहीं किसानों को मिलने वाले डीजल के दाम भी अलग से निर्धारित किया जाएगा। किसानों के लिए बिजली माफ होनी चाहिए। किसानों से ही हमें अनाज मिलता है उनकी उपेक्षा हर पार्टी ने की है। नागरिक एकता पार्टी किसानों के लिए बेहतर काम करेगी।</p>
<p>पार्टी में दागियों को जगह नहीं<br />
जाति व्यवस्था और बंटवारे के विरोध के लिए ही इस पार्टी का उदय हुआ है। पार्टी में दागी नेताओं की कोई भी जगह नहीं है। दागी नेता अपने साथ ही पार्टी की छवि भी धूमिल करते हैं। पार्टी में युवा वर्ग के लोगों को जगह दी गई है। युवा वर्ग पार्टी और देश को एक नई दिशा प्रदान करेंगे।</p>
<p><strong>ताकि ना लेना पड़े किसानों को कर्ज</strong><br />
सपा से दूरी बनाकर नागरिक एकता पार्टी में शामिल हुए सुमित अग्रिहोत्री ने कहा कि सपा और बसपा सरकार मेंं पीडि़त हुए किसानों का दर्द जानने सर्वे किया गया है। हमने पाया है कि किसानों का कर्ज माफ होना ही नहीं चाहिए। क्योंकि उन्हें इसकी आदत पड़ जाएगी। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि क्या कर्ज माफ कर देने से किसान आत्महत्या नहीं करेंगे। जबकि ऐसा होना चाहिए कि किसानों को कर्ज लेने की जरूरत ही ना पड़े। हमारी पार्टी किसानों के हित के बारे में जानती है।</p>
<p><strong>महागठबंधन से कोई मतलब नहीं</strong><br />
सपा और बसपा के बीच फिलहाल गठबंधन को लेकर रुख साफ नहीं है, लेकिन नागरिक एकता पार्टी किसी के साथ हाथ नहीं मिलाएगी। वहीं सपा और बसपा की बात की जाए तो दोनों पार्टियों के बीच सीटों को लेकर खींचतान मची है। अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और जीत हासिल करेगी।</p>
<p><strong>गड्ढा मुक्त सड़क का दावा करने वाली सरकार खुद गड्ढे में</strong><br />
प्रदेश अध्यक्ष कमर रजा ने कहा कि भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार का गड्ढा मुक्त का दावा हर तरफ से फेल नजर आ रहा है, बल्कि यह कहा जाए कि गड्ढा मुक्त सड़क का दावा करने वाली सरकार खुद गड्ढे में है। इस सरकार ने सिर्फ दावे ही किए हकीकत तो कुछ और ही बयां कर रही है। प्रदेश की जनता इस बार होने वाले चुनाव में भाजपा को सबक सिखाकर ही रहेगी। तेल की बढ़ती कीमतों ने जो आग लगाई है उससे परेशान जनता भाजपा को औंधे मुहं गिराने वाली है।्र</p>
<p><strong>ये थे मौजूद</strong><br />
रानी सिंह, सुनीता शर्मा, सुशील एवं श्याम किशोर शुक्ला (यूनियन लीडर उन्नाव) आदि ने भाजपपा छोड़कर तथा शकील अहमद (राजू), सुमित अग्रिहोत्री, नजमी किदवई, पी.एन. दिक्षित ने सपा छोड़कर नागरिक एकता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही सैकड़ों कार्यकताओं ने पार्टी की सदस्ता ग्रहण की।</p>
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		<title>बसपा ने छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस से किया गठबंधन, कांग्रेस ने बोली ये बड़ी बात&#8230;</title>
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		<pubDate>Thu, 20 Sep 2018 16:29:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रायपुर।  छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की काफी समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की नवगठित जनता कांग्रेस से आज गठबंधन का ऐलान कर दिया। बसपा प्रमुख मायावती एवं जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अजीत जोगी के हस्ताक्षरित आज यहां जारी बयान के अनुसार ... <a title="बसपा ने छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस से किया गठबंधन, कांग्रेस ने बोली ये बड़ी बात&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/bsp-combines-alliance-with-janata-congress-in-chhattisgarh-news/" aria-label="Read more about बसपा ने छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस से किया गठबंधन, कांग्रेस ने बोली ये बड़ी बात&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2018/09/20/750x506/ajit-jogi-and-mayawati_1537457360.jpeg" alt="Ajit Jogi and Mayawati" /></p>
<p>रायपुर।  छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की काफी समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की नवगठित जनता कांग्रेस से आज गठबंधन का ऐलान कर दिया।<br />
बसपा प्रमुख मायावती एवं जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अजीत जोगी के हस्ताक्षरित आज यहां जारी बयान के अनुसार 90 सदस्यीय विधानसभा में जनता कांग्रेस 55 सीटों पर तथा बहुजन समाज पार्टी(बसपा) 35 सीटो पर चुनाव लड़ेगी।इस गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी श्री अजीत जोगी होंगे।<br />
दोनो नेताओं के अनुसार पिछले 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ का असन्तुलित विकास हुआ है।भाजपा के शासनकाल में गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर बना है।राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा दूर करने के लिए एक मजबूत क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और नेतृत्व की जरूरत के मद्देनजर यह गठबंधन करने का निर्णय़ लिया गया।</p>
<h2 class="storyheadline">मध्यप्रदेश विस चुनाव:बसपा ने जारी की प्रत्याशियों की सूची</h2>
<div class="storyImg"><img decoding="async" src="http://www.uniindia.com/cms/gall_content/2018/9/2018_9$largeimg20_Sep_2018_190521650.jpg" alt="मध्यप्रदेश विस चुनाव:बसपा ने जारी की प्रत्याशियों की सूची" /></div>
<p>महागठबंधन की कोशिशों को तगड़ा झटका देते हुये बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने गुरूवार को साल के अंत तक होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिये 22 उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी कर दी।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले रविवार को बसपा प्रमुख मायावती ने कहा था कि महागठबंधन में सम्मानजनक सीटे नही मिलने की दशा में चुनाव पूर्व गठबंधन के कोई आसार नही है।</p>
<p>पार्टी महासचिव एवं मध्यप्रदेश के प्रभारी रामअचल राजभर और मध्य प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने 22 प्रत्याशियों की सूची जारी की। उन्होने कहा कि पार्टी मुखिया मायावती से मंजूरी मिलने के बाद पार्टी प्रत्याशियों के नामो की घोषणा की गयी।</p>
<p>मध्यप्रदेश के 14 जिलों में बसपा अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारेगी जिनमे रीवा में सबसे ज्यादा चार सीटों पर और सतना में तीन सीटों पर बसपा किस्मत आजमायेगी। दोनो ही जिले उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हैं। ज्यादातर जिलो में बसपा ने एक विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है हालांकि दमोह और मुरैना में दो दो उम्मीदवार चुनाव मैदान पर उतरेंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं।</p>
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