VIDEO : भाजपा को घेरने निकली ममता ने छुए आडवाणी के पैर

नई दिल्ली: असम में तैयार किए गए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बेहद नाराज हैं. वह इस मसौदे को खत्म करने के लिए न केवल विपक्षी बल्कि सत्ताधारी बीजेपी नेताओं से भी मुलाकात कर रही हैं. इसी कड़ी में ममता ने बुधवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मिलने उनके ऑफिस पहुंची. यहां पहुंचते ही ममता ने आडवाणी के पैर छूकर आशीर्वाद लेती दिखीं. इसके बाद ममता टेबल के दूसरी ओर लगी कुर्सी पर जाकर बैठ गईं.

मालूम हो कि लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में ममता बनर्जी भी भागीदार रह चुकी हैं. उस दौरान संसद में ममता ने वाजपेयी को पिता तुल्य बताया था. अब आडवाणी के पैर छूने की बात सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

ममता ने कहा NRC लिस्ट से हो सकता है खूनखराबा
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि असम में तैयार किए गए राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख लोगों को शामिल नहीं किए जाने से देश में ‘खूनखराबा’ और ‘गृह युद्ध’ हो सकता है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ममता के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया. ममता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक फायदे के लिए असम में लाखों लोगों को ‘राज्यविहीन’ करने की कोशिश कर रही है.

बहरहाल, शाह ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए असम के एनआरसी को राष्ट्रीय सुरक्षा और भारतीयों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे के तौर पर पेश किया और सभी विपक्षी पार्टियों से साफ करने को कहा कि वे एनआरसी का समर्थन करती हैं या नहीं.

ममता ने मोदी सरकार को निशाने पर लिया
ममता और कई विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर यह हमला तब बोला है जब एक दिन पहले ही प्रकाशित किए गए एनआरसी के अंतिम मसौदे में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए. असम में रह रहे अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए एनआरसी तैयार करने की कवायद पिछले कई साल से चल रही है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने यहां एक सम्मेलन में कहा, ‘‘राजनीतिक मंशा से एनआरसी तैयार किया जा रहा है. हम ऐसा होने नहीं देंगे. वे (बीजेपी) लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. इस हालात को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. देश में गृह युद्ध, खूनखराबा हो जाएगा.’

NRC पर संसद के अंदर बाहर हंगामा
इस मुद्दे पर बुधवार को भी संसद में भी हंगामा हुआ. कई राजनीतिक पार्टियों ने संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया और बीजेपी पर समाज को बांटने एवं भारतीय नागरिकों को अपने ही देश में शरणार्थी बनाने की कोशिश करने के आरोप लगाए.

असम की राष्ट्रीय नागरिक पंजी :एनआरसी: के मुद्दे पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज कहा कि एनआरसी का संबंध देश की सुरक्षा और देशवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा से जुड़ा है तथा कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए .

एनआरसी के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का विपक्ष पर आरोप लगाते हुए शाह ने कहा, ‘अलग अलग प्रकार की भ्रांतियां फैलायी जा रही हैं . प्रांत-प्रांत के बीच झगड़े जैसा एक माहौल खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है . मैं इसकी घोर निंदा करता हूं .’ एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बीजेपी के मन में बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषय पर कोई दुविधा नहीं है और इसलिए हम नागरिकता विधेयक लेकर आए . लोकसभा में यह पारित हो चुका है और राज्यसभा में लंबित है.

अमित शाह बोले-NRC पर जनता को गुमराह कर रहा विपक्ष
बीजेपी अध्यक्ष ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि हमारा पहले भी मत था कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश में रहने का कोई अधिकार नहीं है और अब भी मानते हैं कि एनआरसी को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए .

उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषय पर कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस समेत सभी दलों को अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए . उन्हें ‘हां’ या ‘नहीं’ में इस बारे में अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए . ‘ कांग्रेस ने भी कहा कि बीजेपी असम के एनआरसी मुद्दे पर राजनीति कर रही है और शाह जानबूझकर मामले को ‘‘शरारत भरे अंदाज में मोड़ रहे हैं.’ कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार को राष्ट्रहित एवं एकता के इस मुद्दे पर जिम्मेदाराना बर्ताव करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक बड़ी संख्या में भारतीयों को अपने ही देश में शरणार्थी की तरह छोड़ दिए जाने का मुद्दा उठा रही है और यह अस्वीकार्य है. बसपा अध्यक्ष मायावती ने 40 लाख से ज्यादा लोगों को एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने का मुद्दा उठाते हुए इस पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की.

एक प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा, ‘‘बीजेपी ने 40 लाख से अधिक धार्मिक तथा भाषाई अल्पसंख्यकों की नागरिकता को लगभग समाप्त करके केंद्र और असम की बीजेपी सरकारों ने अपना संकीर्ण एवं विभाजनकारी लक्ष्य प्राप्त कर लिया है.’ मायावती ने कहा कि इस ‘‘अनर्थकारी’ घटना से देश में एक ऐसा उन्माद उभरेगा, जिससे निपट पाना बहुत मुश्किल होगा.

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