
आखिर कैसे सुरक्षित पनाहगाह को भेद रहे हैसजायाफ्ता मुजरिम…कन्नौज के बाद अब अयोध्या जेल से भागे कैदी
डीजी जेल पीसी मीणा ने की बड़ी कार्रवाई जेलर डिप्टी जेलर समेत दस को किया सस्पेंड बैठाई गई जांच
कैदियों की तलाश में दर्जनों टीमें लगी स्पेशल टास्क फोर्स की भी ली जा रही मदद दबिशों का दौर जारी
खिड़की उखाड़ी दर्जन भर ईंट निकाली और कंबल और रुमाल के सहारे फांद गए 20 फीट की दीवार
लखनऊ। अपराधियों के लिए जेल एक सुरक्षित पनाहगाह मानी गई है। जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता लेकिन ये कहावत इन दिनों यूपी की जेलों पर लागू नहीं हो पा रही जहां इंतजाम तो बड़े ही हाईट है, मगर मुजरिम उन इंतजामों को ठेंगा दिखाते हुए फिल्मी स्टाइल में कहीं कंबल की रस्सी तो कहीं दीवार काटकर नौ दो ग्यारह हो जा रहे है। पूर्व में कन्नौज जेल प्रशासन को चकमा देकर दो कैदी भागे थे। जिसमें एक को हाफ फाई के बाद पकड़ लिया गया। लेकिन दूसरे की तलाश में अभी भी ऐठी चोटी का जोर लगाया जा रहा है। वहीं अब खरबूजे को देखकर खरबूजे ने रंग पकड़ा और अयोध्या जेल की स्पेशल सेल में बंद हत्या और दुष्कर्म के दो कैदियों ने दीवार ही काट डाली।और फरार हो गए। कन्नौज में तो जेल प्रशासन नए साल की पार्टी में बिजी था। लेकिन अयोध्या जेल प्रशासन कहां सो रहा था कि कैदी खिड़की को उखाड़ते रहे दीवार तोड़ी दर्जनों ईट निकाली और हाईटेक कैमरों को मात देते हुए भाग निकले। ये घटना सुरक्षित पनाहगाह की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही जिसका जवाब बस लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की आड़ में छिप जाता है । तो क्या जेल को जेल बनाने की कोशिश अधूरी साबित हो रही है।
कब और कैसे भेद गए दो कैदी 20 फीट ऊंची दीवार
शेर अली पुत्र रफीक निवासी जनपद सुल्तानपुर 28 नवंबर 2024 से और गोलू अग्रहरि पुत्र साधूराम निवासी जनपद अमेठी जो 24 सितंबर 2025 से दर्जनों गंभीर मामले में बंद थे। उन्हें स्पेशल रेल नंबर-4 में रखा गया था। बुधवार को गिनती हुई उन्हें कोठरी में बंद कर दिया गया। सुबह यानी गुरुवार उसी वक्त जब बाहर निकालकर गिनती का वक्त हुआ और कोठरी नंबर-4 में आवाज लगाई गई तो कोई जवाब नहीं मिली। जिसके जेल प्रशासन पसीना आना शुरू हुआ अंदर पहुंचे तो देखा रोशनदान से टूटी थी। आनन फानन में दौड़ के देखा गया तो दीवार टूटी मिली और कई ईट पड़ी मिली। जेल के अंदर हड़कंप मच गया खोजबीन शुरू हुई तो कहीं दोनों कैदी नजर नहीं आए जिसके बाद सीसीटीवी देखे गए वहां भी कुछ ना मिला।
क्या कई दिनों से थी दोनों कैदियों की भागने की तैयारी एक रात में नहीं टूट सकती दीवार जेल प्रशासन के मुखबिर सोते रहे
अब ना तो शोले फिल्म में दिखाए गए अंग्रेजों के जमाने के जेलर मौजूद ना तो कलियां फिल्म वाले जेलर प्राण ना तो हरिराम नाई जैसे मुखबिर मौजूद जो पल पल की खबर जेलर साहब तक पहुंचाएं। अब उनका सीसीटीवी कैमरों के हवाले मगर वहां से भी कुछ हाथ नहीं आ रहा। आखिर कैसे दो कैदी बड़ी ही आसानी से कोठरी के पीछे मौजूद खिड़की को हटाते फिर दीवार तोड़ते है, लेकिन उनके पास वो चीज जिसे दीवार तोड़ी दर्जनों ईंट उखाड़ डाली आखिर कैसे उन्हें वो चीजें कहां से मिली किसने दी कौन मददगार बना ये सवाल अब उठ रहा है।
डीजी जेल ने जेलर डिप्टी जेलर समेत दस लोगों को लापरवाही बरतने पर किया निलम्बित बैठाई जांच
घटना के बाद जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए मौके पर एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर डीएम निखिल टिकाराम समेत तमाम अधिकारी जेल पहुंचे और मुआयना की रस्म अदा की। डीजी जेल पीसी मीणा ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक उदय प्रताप मिश्रा, डिप्टी जेलर जितेन्द्र कुमार यादव, हेड वार्डन हरिहर प्रसाद, मयंक त्रिपाठी, त्रिपुरारी मिश्रा, सुरेश कुमार दुबे, जयप्रकाश यादव, सुनील कुमार, रमेश साहनी, समेत दस लोगों पर कार्रवाई की गई।










