
देहरादून । उत्तराखंड में बादल फटने से अतिवृष्टि में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि 11 लोग लापता हो गए हैं। चमोली, रुद्रप्रयाग व बागेश्वर जिले में तबाही का मंजर है। दिनभर राहत एवं बचाव कार्य जारी रहा। मुख्यमंत्री ने स्वयं निगरानी की।
चमोली जिले की तहसील थराली के अन्तर्गत ग्राम मोपाटा में अतिवृष्टि की घटना घटित में 01 आवासीय भवन व 01 गौशाला के क्षतिग्रस्त हुई। आपदा में दो की मौत हो गई जबकि दो लोग घायल हो गए। कमला देवी, उम्र 60 वर्ष, पत्नी तारा सिंह व उनके पति तारा सिंह उम्र 62 वर्ष, पुत्र भगवान सिंह निवासी ग्राम मोपाटा, देवाल, थराली की मलबे में दबे से मौत हो गई। इसी गांव की दुर्गा देवी, उम्र 37 वर्ष, पत्नी विक्रम सिंह व विक्रम सिंह उम्र 45 वर्ष, पुत्र आलम सिंह घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र देवाल में भर्ती कराया गया है। डीडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन टीम व राजस्व की टीम घटनास्थल पर मौजूद हैं, जिनके द्वारा खोज-बचाव का कार्य किया जा रहा है।
रुद्रप्रयाग जिले की तहसील बसुकेदार एवं जखोली क्षेत्रान्तर्गत छेनागाड, तालजामण के बगड़ तोक, बडेथ, स्यूंर, किमाणा व अरखुण्ड में अतिवृष्टि से गदेरों में पानी, मलबा आने के कारण 30 से 40 परिवारों के फंसे गए। जखोली ब्लाक में सरिता देवी पत्नी जसपाल लाल की मौत हुई है, जबकि छेनागाड बाजार में 08 लोगों की तलाश जारी है। प्रशासन के अनुसार सते सिंह नेगी निवासी भैवर गांव, हाल निवासछेनागाड, कुलदीप सिंह नेगी, वनश्रमिक, निवासी छेनागाड, नीरज (दुकानदार),राज बुगाना ग्राम-डांगीव अज्ञात 04 श्रमिक लापता हैं।
वहीं जनपद टिहरी की तहसील बालगंगा ग्राम-गेंवाली से लगभग 500 मीटर दूरी पर अतिवृष्टि से गेवाली गदेरे का जल स्तर बढने के कारण मलबा आने से निजी सम्पत्तियों के हानि होने की हुई है। जिसमे कोई भी जन हानि नहीं है। ग्राम गेंवाली – 02 छानी, 01 गौशाला , 02 मन्दिर, जलस्त्रोत, कृषि भूमि, गांव के सम्पर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए। ग्राम गेंवाली के पारसील नामे तोक में पैदल पुलिया भी बह गई है।
कुमाऊं मंडल के बागेश्वर में भी आपदा ने दो लोगों की जा ले ली। 03 लोग लापता बताए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने मृतकों के प्रति शोक संवेदनाएं व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
आईएमडी के एलर्ट को लेकर अपर सचिव ने दिए निर्देश:
मौसम विज्ञान विभाग की ओर से राज्य के विभिन्न जनपदों के लिए जारी रेड व ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप ने जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि से नुकसान कम से कम हो, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियों पूर्व से ही सुनिश्चित कर ली जाएं व अधिकारी प्रत्येक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार रहें। उन्होंने सभी जनपदों को क्षति का आकलन कर जल्द से जल्द रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर जो भी स्थान आपदा के दृष्टिकोण से असुरक्षित हैं, वहां से लोगों को तुरंत शिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों/राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। उन्होंने आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी लेते हुए वहां भोजन, पानी, बिस्तर की समुचित व्यवस्था करने तथा बिजली, शौचालय तथा जनरेटर के प्रबंध भी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आश्रय स्थलों को ऐसे स्थानों पर बनाया जाए जो आपदा के लिहाज से सुरक्षित हों।
पहाड़ों में बारिश का मैदानों में पड़ेगा असर:
आनंद स्वरूप ने कहा कि पहाड़ों में अधिक वर्षा होने पर इसका प्रभाव कहीं ना कहीं मैदानी क्षेत्र में भी पड़ेगा। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ व जल भराव की संभावना हो सकती है। उन्होंने ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने सैटेलाइट फोन की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनका उचित रखरखाव करने के निर्देश दिए।
सूचनाओं के आदान-प्रदान में कमी न रहे: डीआईजी नेगी
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने कहा कि इस बार चुनौतियां अधिक हैं, इसलिए सूचनाओं के आदान-प्रदान में कहीं पर भी किसी स्तर में कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सभी जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्वयं व डीईओसी के माध्यम से राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के संपर्क में रहते हुए प्रत्येक घटना की जानकारी एसईओसी को उपलब्ध कराएं।
उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से भेजे जाने वाले अलर्ट पहुंचने बहुत जरूरी हैं, ताकि लोग न सिर्फ जागरूक रहें बल्कि समय रहते अपनी सुरक्षा के लिए उचित कदम भी उठा सकें। उन्होंने नए बने सभी पंचायत प्रतिनिधियों के नंबर व्हाट्सएप ग्रुप में अपडेट करने को कहा।