
अमरावती । आंध्र प्रदेश की राजनीति और धार्मिक आस्था के केंद्र तिरुपति मंदिर के प्रसाद को लेकर छिड़ा विवाद अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट के हवाले से जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। हालांकि जांच में पशु चर्बी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घी में प्लांट ऑयल और बेहद खतरनाक इंडस्ट्रियल केमिकल्स के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान कुछ ऐसी कंपनियों का पता चला है जिन्होंने लैक्टिक एसिड और लिनियर अल्काइल बेंजीन सल्फोनिक एसिड जैसे पदार्थों की आपूर्ति की थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एक नॉन-फूड ग्रेड केमिकल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से डिटर्जेंट और सफाई उत्पादों में किया जाता है। खाद्य पदार्थों में इसका सेवन शरीर के अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि विश्व प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले घी में बाथरूम साफ करने वाले रसायनों (केमिकल्स) की मिलावट की गई थी। मुख्यमंत्री के इस बयान ने न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत किया है, बल्कि देश भर में एक नई बहस छेड़ दी है। नायडू ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इस विवाद की जड़ें पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से जुड़ी बताई जा रही हैं। आरोपों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच मंदिर को आपूर्ति किए जाने वाले घी की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया। मुख्यमंत्री नायडू ने यह भी संकेत दिए कि यह अनियमितता केवल तिरुपति तक सीमित नहीं हो सकती और अन्य प्रमुख मंदिरों के प्रसाद की भी जांच की आवश्यकता है।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। विपक्ष का तर्क है कि सत्ताधारी दल अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक मुद्दों का सहारा ले रहा है। तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने इस मामले में और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि 2022 से 2024 के बीच फर्जी बिल बनाकर इन केमिकल्स की आपूर्ति की गई थी। आरोप यह भी है कि इन खतरनाक रसायनों के ऑर्डर व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से दिए गए और हजारों किलो केमिकल डेयरी कंपनियों के जरिए मंदिर की व्यवस्था तक पहुँचाया गया।
इस खुलासे के बाद श्रद्धालुओं के बीच भारी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। पलटवार करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि सरकार की बनाई गई विशेष जांच समिति सिर्फ एक दिखावा है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सीबीआई की रिपोर्ट में पशु वसा की पुष्टि नहीं हुई है, तो सरकार जानबूझकर जनता को गुमराह कर रही है। वाईएसआर कांग्रेस ने इस मुद्दे को अदालत में चुनौती देने की बात कही है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने आंध्र प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी गूँज आने वाले समय में और भी तेज होने की संभावना है। धर्म और राजनीति के इस टकराव में अब सबकी नजरें आगामी अदालती कार्यवाही और विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं।














