
हम सभी जानते हैं कि परिस्थितियां कभी भी एक जैसी नहीं होती है। इन्हीं परिस्थितियों के चलते ही इंसान में कई बड़े बदलाव भी देखे जाते हैं। जिसके चलते कभी कभी वह बुरे रास्तो को भी अपनाने में नही कतराता है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी ही घटना से रूबरू कराने जा रहे हैं , जिसके साथ कुछ ऐसी ही घटना घटी है, जिससे वह एक डाकू के रूप में लोगों के सामने आई । जी हां , दरअसल हम बात कर रहे हैं रेनू यादव की। इन्हें तो कौन नहीं जानता लेकिन फिर भी हम आपको बता दे कि यह यूपी और राजस्थान की जानी-मानी डकैत में से एक है। उनके नाम से कई क्रिमिनल रिकॉर्ड्स भी हैं। लेकिन ऐसा इनके साथ क्या घटित हुआ कि जिसके कारण इन्हें ये सब अपनाना पड़ा। तो चलिए बताते है आपको इस बारे में।
उत्तर प्रदेश में ओरैया जिले के गांव जमालीपुर में रहने वाले विधाराम यादव के घर रेनू यादव का जन्म पांच भाई-बहन के साथ हुआ। जिसमें वो सबसे बडी हैं। विधाराम यादव आर्थिक समस्याओं के चलते उनके पास उपलब्ध संसाधन कमी थी। लेकिन बच्चों के साथ उनका जीवन खुशहाल ही चल रहा था। लेकिन फिर कुछ ऐसा घटित हुआ जिससे रेनू की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया।
यह सब 29 नवम्बर 2003 को हुआ। इस दिन स्कूल गई हुई रेनू जब घर लौट रही थी, तो उसी बीच रास्ते में चंदन यादव नाम के एक खतरनाक डकैत ने उसे किडनैप कर लिया और ओरैया के बीहड़ में ले गया। चंदन यादव ने इसके बदले फिरौती में विधाराम से दस लाख रुपये की मांग की। लेकिन गरीब के चलते इतनी रकम जुट न सका। ऐसे में वे पुलिस की भी मदद मांगी लेकिन पुलिस की भी ओर से उन्हें किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिली।
ऐसे में फिरौति न मिल पाने के कारण रेनू को चंदन ने अपने पास ही रख लिया। इसके साथ ही चन्दन डाकू ने रेनू को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दे डाली। इसी तरह वह जब भी डाका डालने के लिए जाता था तो अपने अन्य शागिर्दों के साथ वह उसे भी लेकर जाता था। धीरे धीरे कर के कुछ ही दिनों में रेनू की दहशत इतनी फैल गई कि राजस्थान और यूपी के लोग आज भी रेनू के नाम से कांपने लगते हैं।
रेनू के नाम से कई दर्जन डकैतियां व हत्याऐं थाने मे दर्ज हैं। ऐसे में दो साल बीत जाने के बाद 2005 में एक दिन रामवीर गुर्जर और चंदन यादव की गैंग के बीच भारी गोलीबारी हुई। जिसमें रेनू ने मौके का फायदा उठाते हुए चंदन यादव को गोली मार दी और वहां से भागकर पुलिस को सरेंडर कर दिया क्योंकि वहां रहने पर उन्हें रामसिंह गुर्जर के साथ रहना पड़ता। जिसकी नजर रेनू की सुंदरता पर थी। आपको बता दे कि रेनू सुन्दरता के मामले में भी किसी हिरोइन से कम नहीं है और इसके साथ ही वो काफी फिट भी है।
अब वह सात साल की सजा काट चुकी है एयर अब वह कानपुर में अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव के पास रहती हैं। फिलहाल अब वो दो साल से गौ रक्षक दल की महासचिव का कार्य भार उठा रहीं हैं और इसके साथ ही वह समाजवादी पार्टी से भी जुडी हुई हैं।















