ब्रह्मचारी नहीं थे बजरंग बलि, ऐसे हुई थी उनकी शादी, जानिए ये अनोखी कहानी

यदि हम आपसे कहे कि हनुमान जी ब्रह्मचारी नहीं थे, बल्कि उनकी शादी भी हुई थी, तो यक़ीनन आप भी हैरान रह जायेंगे. जी हां अब भले ही आप माने या न माने लेकिन ये सच है. वैसे अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर वो कौन सी कन्या थी, जिससे बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी का विवाह हुआ था. बरहलाल ये जानने के लिए आपको इस पोस्ट को पूरा पढ़ना होगा. यक़ीनन आज हनुमान जी के बारे में जो बातें हम आपको बताने वाले है, उसके बारे में जान कर आप चौंक जायेंगे. वैसे आपको जान कर ताज्जुब होगा कि हनुमान जी का पूरे रीती रिवाजो और मंत्रो के साथ विवाह संपन्न किया गया था. इसके इलावा उनका एक पुत्र भी था.

हालांकि विवाह होने के बाद भी हनुमान ब्रह्मचारी कहलाते है. अब इसकी क्या वजह है, ये भी आज हम आपको जरूर बताएंगे. दरअसल ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी जब अपने गुरु सूर्य देव से शिक्षा प्राप्त कर रहे थे, तब पूरी शिक्षा लेने के बाद उनकी आखिरी शिक्षा अधूरी रह गई थी. वो इसलिए क्यूकि यह शिक्षा अविवाहित व्यक्ति को नहीं दी जा सकती थी. जिसके चलते हनुमान जी बड़ी दुविधा में फंस गए थे. बरहलाल हनुमान जी को परेशान देख कर सूर्य देव ने कहा कि तुम मेरी पुत्री सुवर्चला से विवाह कर लो. बता दे कि इसके बाद पूरे रीती रिवाजो और वैदिक मंत्रो के साथ हनुमान जी का सम्पन्न किया गया था.

वही अगर पराशर संहिता की माने तो हनुमान जी ने जीवनभर ब्रह्मचारी रहने का प्रण ले रखा था और दूसरी तरफ सूर्य देव की पुत्री भी तपस्विनी थी. गौरतलब है कि हनुमान जी से शादी करने के बाद उनकी पत्नी दोबारा तपस्या के लिए चली गई. हालांकि हनुमान जी ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए विवाह करने की शर्त तो पूरी कर ली, लेकिन वो कभी गृहस्थ जीवन में नहीं रहे. ऐसे में उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा पूरी की. गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है. जी हां बता दे कि इस मंदिर में हनुमान जी के साथ उनकी पत्नी की मूर्ति भी बनी हुई है. यही वजह है कि इस मंदिर को हनुमान जी के विवाहित होने का इकलौता गवाह भी माना जाता है.

इसलिए ऐसा कहा जाता है कि जो दम्पति इस मंदिर में जाकर हनुमान जी का आशीर्वाद लेते है, उनका वैवाहिक जीवन सुखमय चलता है और उनके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाएँगी. हालांकि यहाँ ये भी सवाल उठता है कि जब हनुमान जी कभी अपनी पत्नी से मिले ही नहीं थे, तो वह पिता कैसे बन गए. बरहलाल इसका जवाब आपको वाल्मीकि रामायण में मिल जाएगा. इसके अनुसार जब हनुमान जी लंका दहन करने के लिए गए थे, तब लंका नगरी से उठने वाली तेज ज्वाला की आंच से हनुमान जी को पसीना आ गया.

ऐसे में पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए हनुमान जी समुन्द्र में जा पहुंचे. बता दे कि इसी दौरान उनके शरीर से टपकी पसीने की एक बून्द को एक मछली ने अपने मुँह में ले लिया. जिसके चलते वह मछली गर्भवती हो गई और फिर उसी मछली ने एक वानर रूपी मानव को जन्म दिया. बता दे कि इसी वानर रूपी मानव को बाद में रावण के भाई अहिरावण ने पाताल लोक का द्वारपाल बना दिया.

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