
- अफसरशाही से खफा ब्राह्मणों को रिझाने में जुटे सपा के सिपाही
- कानपुर के बाद कई अन्य शहरों-कस्बों में होंगे ब्राह्मण सम्मेलन
कानपुर। सभागार में लाल-हरा झंडा मौजूद नहीं था, किसी कोने में साइकिल चुनाव चिह्न भी नजर नहीं आया। माहौल सिर्फ ब्राह्मण बिरादरी के अनुकूल था और बातों का लब्बोलुआब भी मौजूदा वक्त में ब्राह्मण बिरादरी के अनादर और तिरस्कार पर फोकस था। बिकरू कांड के एक दिन विधवा हुई एक दिन की सुहागन खुशी का दर्द गूंजा तो राष्ट्र-समाज हित के लिए ब्राह्मणों के बलिदान की गाथाएं भी। 12 महीने बाद सूबे की सत्ता के लिए लोकतांत्रिक युद्ध होगा, इस जंग में स्वयं को उपेक्षित महसूस करने वाली ब्राह्मण बिरादरी भी तमाम विधानसभा सीटों पर निर्णायक होगी। कानपुर की अधिकांश सीटों पर पंडितों के जरिए ही हार-जीत तय होती रही है। इसी नाते पीडीए की नैया के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में जुटी समाजवादी पार्टी अब पंडितों का आशीर्वाद भी हासिल करना चाहती है। शहर-कस्बों में ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए नए जातीय समीकरण तैयार करने की जुगत है। नए प्रयोग का श्रीगणेश का साक्षी बना क्रांति गढ़ने वाला कानपुर शहर।
दधीचि से लेकर खुशी दुबे तक की दास्तां
मंच पर मौजूद दिग्गज ब्राह्मण चेहरों के पीछे समग्र ब्राह्मण समन्वय समिति का बैनर मौजूद था। प्रबुद्ध सम्मेलन के झंडाबरदार थे समाजवादी कुनबे में ब्राह्मण चेतना की नींव रखने वाले आशीष चौबे। यूं तो सम्मेलन का विषय था- सामाजिक समरसता, ब्राह्मण संगठन की मजबूती एवं समसामयिक वैचारिक विषय, लेकिन वक्ताओं ने मौजूदा वक्त में तिरस्कार के शिकार ब्राह्मणों के स्वाभिमान को कायदे से कुरेदा। बलिया के सांसद सनातन पाण्डेय ने ब्राह्मणों के अपमान के किस्से बयां करते आदिकाल में महर्षि दधीचि के महादान से लेकर क्रांतिकारी दौर में मंगल पाण्डेय और बागी बलिया के चित्तू पाण्डेय की कहानियां सुनाकर बिरादरी को सम्मान हासिल करने के लिए एकजुट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहाकि, ब्राह्मणों का सम्मान सिर्फ और सिर्फ समाजवादी पार्टी में है। इसी कारण मुलायम सिंह यादव ने भगवान परशुराम की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था। मौजूदा वक्त में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी भी समाजवादी पार्टी ने माता प्रसाद पाण्डेय को सौंपी है। विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री प्रोफेसर अभिषेक मिश्र ने बिकरू कांड के नतीजे में सात फेरों के एक दिन बाद विधवा हुई खुशी दुबे को निर्दोष करार देते हुए कहाकि, ब्राह्मण समाज की बेटी की सार्वजनिक रूप से मदद करके समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साबित किया है कि, सिर्फ सपा में ब्राह्मणों का सम्मान सुरक्षित है।
पांच विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण असरदार
कानपुर की बात करें तो किदवईनगर, गोविंद नगर, महाराजपुर, बिठूर और आर्यनगर में ब्राह्मण मतदाता असरदार हैं। मौजूदा वक्त में सपा के कब्जे में सिर्फ आर्यनगर विधानसभा है। ऐसे में मौजूदा अफसरशाही से नाराज शहर के ब्राह्मण मतदाताओं को रिझाकर समाजवादी पार्टी नई सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सत्ता समीकरण सुधारना चाहती है। कोशिश कामयाब हुई और सत्ता विरोधी रुझान ने साथ दिया तो बड़ी बात नहीं होगी कि, वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कानपुर शहर की दस सीटों में सपा के हिस्से पांच-छह सीटें आ जाएं। गौरतलब है कि, कानपुर की दस विधानसभा सीटों में फिलवक्त सपा के कब्जे में छावनी, आर्यनगर और सीसामऊ सीटें हैं। आशीष चौबे ने बिठूर विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए मोर्चा संभाल रखा है। कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी की ष्ट्रीय सचिव अपर्णा जैन, राष्ट्रीय प्रवक्ता नितेंद्र यादव व पूर्व विधायक सतीश निगम भी मौजूद थे। समग्र ब्राह्मण समन्वय समिति के महानगर अध्यक्ष किसलय दीक्षित, ग्रामीण अध्यक्ष ऋषि दुबे के साथ मनोज शुक्ला, दीपू त्रिपाठी, हरिओम पाण्डेय, योगेश तिवारी, सुभाष द्विवेदी, पवन तिवारी, रामजी शुक्ला, प्रमुख रूप से मौजूद थे।













