महाभियोग क्या होता है, क्या होगा ट्रंप का? जानिये हर सवाल का जवाब

अमेरिका की राजनीति में तनाव अपने चरम पर है. ट्रम्प पहले ऐसे राष्ट्रपति बन चुके हैं जिन पर दो बार महाभियोग लगाया गया है. तो अब सवाल ये कि ट्रम्प का क्या होगा, महाभियोग क्या होता है. ये कब लगाया जाता है. कैसे लगाया जाता है. क्यों लगाया जाता है. अब तक कितने पर लगाया गया. क्या डोनाल्ड ट्रंप पर हमेशा के लिए बैन लग सकता है? ट्रम्प का क्या होगा, क्या वो कभी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. क्या वो देश द्रोही बन चुके हैं.

क्या कहता है अमेरिका का क़ानून, और आगे क्या होने वाला है. आज आपको हम तमाम सवालों का जवाब देंगे. पहले ये बता दें कि अभी तक क्या क्या हुआ. दरअसल अमेरिका में चुनाव हुए ट्रम्प की हार हुई जो बाइडेन जीत गए. ट्रम्प को ये हार बर्दाश्त नहीं हुई, उन्होंने अपना अड़ियल रुख अपना और अभी तक सीट पर बने हुए हैं. इन सबके बीच उन्होंने भाषण दिया, तो उनके समर्थकों ने कैपिटल हिल्स पर चढ़ाई कर दी. माहौल गर्माते हुए देख सोशल मीडिया ने उन पर बैन लगा दिया, हालांकि सोशल मीडिया कंपनियों का काफी नुकसान हो चुका है. अब ट्रम्प को हटाने के लिए महाभियोग लाया गया है.

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के दबदबे वाली प्रतिनिधि सभा ने बुधवार देर रात अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महाभियोग प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है. और इसी के साथ ट्रम्प ने एक नया रिकॉर्ड भी कायम कर दिया एक ऐसे राष्ट्रपति का जिस पर दो बार महाभियोग लगाया जा चुका है. प्रतिनिधि सभा में ट्रंप के महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के दौरान पक्ष में 232 वोट पड़े जिसमे डेमोक्रेट्स के 222 थे और रिपब्लिकन के 10 जो की ट्रम्प की ही पार्टी है तो वही विपक्ष में 197 वोट पड़े. बता दें कि 1868 में एंड्रयू जॉनसन, 1998 में बिल क्लिंटन और 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ निचले सदन से महाभियोग का प्रस्ताव पास हो चुका है. हालांकि जॉनसन और क्लिंटन दोनों सीनेट से बच गए थे. पर ट्रम्प का मामला कुछ अलग ही है

तो क्या होता महाभियोग की प्रक्रिया बताते हैं. महाभियोग की प्रक्रिया काफी मुश्किल होती है. दरअसल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने के लिए एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा करना होगा. इसकी पूरी प्रक्रिया कुछ इस तरह से है. सबसे पहली बात तो ये कि अमेरिकी संविधान के अनुसार किसी राष्ट्रपति को उसके 4 साल का कार्यकाल पूर्ण होने से पहले महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है. यानि ट्रम्प को कभी भी टाटा बाय बाय कह सकते हैं पर अमेरिका के राष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए कुछ मानदंड है. या यूँ कहें कि कुछ मानक तैयार किये गए हैं.

संविधान के अनुसार अगर राष्ट्रपति राजद्रोह करने, रिश्वत लेने, उच्च अपराध और कदाचार में लिप्त होने का दोषी पाया जाता है उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाया जा सकता है.यहाँ पर भी एक लोचा है वो ये कि उच्च अपराध और कदाचार के दायरे में कौन से अपराध आ सकते हैं. इसके फैसला कांग्रेस के समझदारी पर छोड़ दिया जाता है. यानि वो तय करेंगे कि ये मामला गंभीर है या नहीं, या फिर देश को इससे कितना नुकसान हो सकता है. वैसे इन मामलों में भष्ट्राचार, दुर्व्यवहार और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना बड़े लेवल के क्राइम में शामिल है.

ये तो थी अपराध की बात इसके बाद राष्ट्रपति को उसके पद से हटाने के लिए हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव एक ज्यूरी की तरह दो तिहाई बहुमत से महाभियोग का प्रस्ताव पास कर सकती है. साथ ही सीनेट के पास अधिकार होता है कि महाभियोग का प्रस्ताव पास होने के बाद वह एक अदालत के तौर पर राष्ट्रपति को उसके पद से हटा दे. तो अब महाभियोग प्रस्ताव पास हो चूका है तो सबसे बड़ा सवाल यही कि ट्रम्प का अब क्या होगा क्या उन्हें हर एक पद से बैन कर दिया जाएगा. वहीं सीनेट में आगे किया हो सकता है. पर इससे पहले ये समझना जरुरी है कि सीनेट क्या होता है और हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव क्या है.

तो बता दें कि हमारी संसद की तरह ही यूनाइटेड कांग्रेस के दो हिस्से हैं. सीनेट यानी ऊपरी सदन और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव यानी निचला सदन. सीनेट में 100 सीनेटर्स होते हैं. संयुक्त राज प्रांत में कुल 50 प्रांत है और हर प्रांत पर दो सीनेटर्स होते हैं. वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में कुल 435 निर्वाचित सदस्य होते हैं. छह नॉन वोटिंग सदस्य अतिरिक्त होते हैं. महाभियोग की प्रक्रिया में इन दोनों सदनों की भूमिका अहम है.

तो अब क्या ट्रम्प पर पूरी तरह से बैन लग सकता है. तो बता दें कि अमेरिकी संविधान के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति पर महाभियोग चलाया जाता है तो उसको दो तरह से सजा दी जा सकती है. पहला उसे मौजूदा ऑफिस से हटाया जाए या फिर उसे हमेशा के लिए ही किसी पद से वंचित रखा जाए.

अब किसी व्यक्ति को कुर्सी से हटाने के लिए सीनेट में दो तिहाई बहुमत के साथ इस मत को पास कराना होगा. अगर ऐसा होता है तो उसके बाद सीनेट में एक और वोटिंग होगी जिसके तहत व्यक्ति को भविष्य में किसी पद पर बैठने से रोका जाएगा. यानी राजनीति से उसकी छुट्टी हमेशा के लिए हो जाएगी.

अब अगर सीनेट में बहुत न मिले तो क्या होगा. जानकारों के मुताबिक, सीनेट में महाभियोग पर वोटिंग हो सकती है जिससे उन्हें मौजूदा पद से हटाया जा सकता है. अब ऐसा लगता है कि ट्रम्प की सत्ता खत्म, क्यूंकि रिपब्लिकन पार्टी के नेता भी उनसे खासे नाराज है. पर हमेशा के लिए सार्वजनिक पद से हटाना है, तो पहले एक ट्रायल से गुजरना होगा जहाँ डोनाल्ड ट्रंप को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा. उसके बाद अगर वो दोषी साबित होते हैं तो ही आगे की प्रक्रिया होगी. हालाँकि ट्रम्प कोर्ट जा सकते हैं. उनके पास पूरा हक है. मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों में से रिपब्लिकन के पक्षकारों की संख्या भी अधिक है. वो अलग मसला है. और ट्रम्प के मन की बात है.

पर अब महाभियोग प्रस्ताव सीनेट यानी उच्च सदन में पेश किया जाएगा. सीनेट में इसका ट्रायल होना है. अब मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, सीनेट का अगला सेशन 19 जनवरी को है और 20 तारीख को डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप का ट्रायल उनके कार्यकाल के खत्म होने के बाद ही शुरू होगा, जो कि अयोग्यता साबित करने को लेकर होगा. यानी सारा खेल अब सीनेट में खेला जाएगा.

और सीनेट में फैसला अपने हक में लाने के लिए दो तिहाई वोट की जरूरत है. और सबसे बड़ी बात कि अभी सीनेट के प्रमुख रिपब्लिकन मैककॉनल ही हैं, ऐसे में अगर वो ट्रंप का साथ देते हैं या फिर पलट जाते हैं तो अधिकतर रिपब्लिकन ऐसा ही कर सकते हैं. अभी तक रिपब्लिकन ने ट्रंप को पद छोड़ने की सलाह दी है. तो मामला ट्रम्प के लिए बिलकुल उलटा साबित होगा. हालंकि पिछली बार जब हाउस में महाभियोग पर वोटिंग हुई थी, तब ट्रंप के पक्ष में मतदान हुआ था.

अब सवाल ये की ट्रम्प का आगे क्या होगा. तो डोनाल्ड ट्रंप सीनेट के ट्रायल में दोषी पाए गए फिर उनके अयोग्य साबित होने को लेकर वोटिंग की जाएगी. हालांकि, मौजूदा संकेत ये हैं कि सीनेट में अधिकतर लोग डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाना चाहते हैं, लेकिन एक सच ये भी है कि भविष्य में उनपर किसी तरह का बैन लगाने के पक्ष में कोई नहीं हैं.


आपको बता दें कि पिछली बार डोनाल्ड ट्रंप पर यूक्रेन मामले को लेकर महाभियोग चलाया गया था. लेकिन इस बार मामला अलग है. उन पर इस बार अमेरिका में ही दंगे भड़काने का आरोप लगा है. ऐसे में ट्रायल की प्रक्रिया में क्रिमिनल चार्ज को केंद्र में रखा जाएगा. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप लगातार चुनाव नतीजों के खिलाफ बयान देते आए हैं. उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उन्हें भाषण देना उनका अधिकार था, उन्होंने अपने भाषण में हिंसा का प्रयोग नहीं किया. साथ ही ना ही उन्होंने किसी को भड़काया है. ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की नज़र राष्ट्रपति पद पर बनी हुई तो वो शांति से प्रक्रिया का पालन करने पर ध्यान देंगे. कहते हैं न कि शेर अगर दो कदम पीछे हटता है तो ज़रूरी नहीं कि वो डर गया, वो शिकार की तैयारी कर रहा होता है. और वैसे भी ट्रम्प के समर्थकों की कोई कमी नहीं है. इस बार उनके ऊपर बैन नहीं लगाया गया तो अगली बार वो फिर बाउंस बैक ज़रूर करेंगे.

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