
हमारे देश मे जब किसी के घर में कन्या का जन्म होता है तो उसे लक्ष्मी का रूप माना जाता है। लड़कियों को सम्मान की नजरों से देखा जाता है। जब किसी महिला का विवाह हो जाता है तो वह अपने ससुराल जाती है तो ससुराल के लोग भी अपनी बहु को लक्ष्मी का रूप मान लेते है। लेकिन अफसोस की हमारे देश मे पश्चिमी संस्कारों के अनुशरण के चलते कई सारे अपवाद सामने आते है। जो चिंता का विषय है।
आज भी कई लोग है जो व्यक्ति के चाल चलन को देखकर उसके व्यक्तित्व के बारे में जान जाते है। हिन्दू धर्म के अनुसार पवित्रता इंसान के चरित्र में होती है न कि उसके शरीर मे। यदि किसी पुरूष या फिर महिला का चरीत्र सही है तो उसके शरीर के सभी अंग पवित्र होते है। वैसे ही अगर महिला के शरीर मे शुद्धता की बात की जाए तो उसके हाथ सबसे पवित्र माने जाते है क्योंकि वह अपने हाथों से एक परिवार का निर्माण करती है।
उन्ही हाथों से एक बेटे या बेटी की गंदगी साफ करके उसे पालकर बड़ा करती है। जब किसी को भूख लग रही है तो महिला अपने हाथों से बनाकर उसकी भूख को शांत करती है। जिससे उसकी आत्मा को सुख मिलता है। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि महिला के हाथ सबसे पवित्र होते है। वही अगर पवित्रता की बात करे तो चरीत्र ही सब कुछ होता है।
इसिलिए किसी ने कहा है कि मनुष्य ना तो जन्म से तिलक लगाकर आता है और ना ही जनेव पहनकर जो जैसा कर्म करता है वह वैसा ही बन जाता है। कहा जाता है कि हिन्दू धर्म में स्त्रियों को घर की इज्जत मानते है। वह अपने पति का भाग्य बदल देती है. अपने परिवार को छोड़कर वह पराए परिवार के लिए सारे जतन करती है और घर की मान मर्यादा को बनाए रखती है।














