सऊदी पर ईरानी हमले नाकाम ! मल्टी-लेयर्ड डिफेंस सिस्टम बना सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल

रियाद/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा खूनी संघर्ष अब पूरे खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) को अपनी चपेट में ले चुका है। ताजा हमलों में ईरान ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया है। इतना ही नहीं, सऊदी की तेल रिफाइनरियों पर भी ईरानी मिसाइलें कहर बनकर टूटी हैं। हालांकि, सऊदी अरब के आधुनिक डिफेंस सिस्टम ने इस हमले के बड़े खतरे को टाल दिया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी अब तक 160 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं, जिनमें से केवल 4-5 ही जमीन पर गिर सकीं, बाकी को हवा में ही ध्वस्त कर दिया गया।

78 अरब डॉलर का सुरक्षा कवच: अभेद्य बना सऊदी अरब

सऊदी अरब अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए दुनिया के सबसे महंगे और मल्टी-लेयर्ड डिफेंस नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है। 78 अरब डॉलर के भारी-भरकम रक्षा बजट के साथ सऊदी ने आसमान में एक ऐसी दीवार खड़ी की है जिसे भेदना ईरान के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। साल 2025 में सेना पर 80 अरब डॉलर खर्च करने वाले सऊदी अरब ने अमेरिकी ‘थॉड’ (THAAD) और ‘पैट्रियट’ सिस्टम के दम पर अपनी रॉयल एयर डिफेंस फोर्स को दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में शुमार कर लिया है।

अमेरिकी ‘पैट्रियट’ और ‘थॉड’ का डबल अटैक

ईरानी मिसाइलों को रोकने के लिए सऊदी अरब अमेरिका में बने 640 पैट्रियट पीएसी-3 इंटरसेप्टर का इस्तेमाल कर रहा है। यह सिस्टम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, सऊदी ने अपनी पहली ‘थॉड’ (Terminal High Altitude Area Defense) यूनिट को भी एक्टिवेट कर दिया है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा सिस्टम है जो पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर, दोनों जगहों पर दुश्मन की मिसाइलों का शिकार कर सकता है।

रेगिस्तान में फेल हुई ‘चीनी लेजर’ तकनीक

इस युद्ध के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। सऊदी अरब ने सुसाइड ड्रोनों को मार गिराने के लिए चीन से 30-किलोवॉट का ‘साइलेंट हंटर’ लेजर सिस्टम खरीदा था, लेकिन रेगिस्तान की भीषण गर्मी और उड़ती धूल के सामने यह तकनीक बेअसर साबित हो गई। लेजर की ऑप्टिकल ट्रैकिंग बार-बार नाकाम होने के बाद सऊदी सेना ने अब इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और जैमिंग गाड़ियों पर फोकस बढ़ा दिया है। चीन के ही जेएन1101 (JN1101) सिस्टम के जरिए अब ड्रोन के झुंड को सिग्नल जैम करके हवा में ही बेअसर किया जा रहा है।

ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के लिए ‘स्काईगार्ड’ तैनात

कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और क्रूज मिसाइलों से निपटने के लिए सऊदी अरब 35एमएम स्काईगार्ड ट्विन कैनन का इस्तेमाल कर रहा है। आधुनिक रडार से लैस यह आर्टिलरी सिस्टम तेल डिपो और रिफाइनरियों के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाता है। सऊदी अरब ने रूस, अमेरिका और चीन की बेहतरीन तकनीकों का मिश्रण कर एक ऐसा ‘मल्टी-लेयर्ड शील्ड’ तैयार किया है, जिसने ईरान के हमलों की धार को काफी हद तक कुंद कर दिया है।

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