
नई दिल्ली/भोपाल (ईएमएस)। संघ, संगठन और इंटेलिजेंस की सर्वे रिपोर्ट के बाद भाजपा हाईकमान ने चुनावी रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है और मप्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम पर ही चुनाव लडऩे का फैसला किया है। पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संघ के दिशा-निर्देश पर यह फैसला लिया गया है कि मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सीएम फेस नहीं होंगे। यानी आगामी चुनाव में अगर भाजपा जीत भी जाती है तो मुख्यमंत्री कोई दूसरा बनेगा।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी भाजपा इस बार सीएम फेस पर शुरू से चुप्पी साधे हुए है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में शिवराज की छवि का ग्राफ इतनी तेजी से नीचे गिरा है कि पार्टी अब उनके नाम पर चुनाव लडऩा नहीं चाहती है। माना जा रहा है कि भाजपा इस बार पीएम मोदी के चेहरे पर विधानसभा का चुनाव लड़ सकती है। राज्य में लंबे समय से भाजपा की सरकार है जिस कारण से पार्टी को एंटी इनकंबेंसी का डर है।
-भाजपा चोट नहीं खाना चाहेगी
मप्र में इसी साल होने वाले विधानसभा के चुनाव कशमकश भरे होंगे। बाजी किसके हाथ लगेगी इसका पूवार्नुमान किसी को नहीं है। लिहाजा सत्ताधारी दल भाजपा किसी तरह की चूक करने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को सामने रखकर चुनाव लडऩे का लगभग मन बना लिया है। राज्य में भाजपा की लगभग दो दशक से सरकार है। बीच में लगभग सवा साल ऐसा आया था जब कांग्रेस के हाथ में सत्ता थी। लंबे अरसे से सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथ में होने के कारण पार्टी को एंटी इनकंबेंसी की चिंता सता रही है। पिछले कुछ महीनों में पार्टी के अंदरूनी सर्वे में भी पार्टी को खुश करने वाले नहीं रहे। उसके बाद से पार्टी ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे एक तरफ एंटी इनकंबेंसी के प्रभाव को रोका जा सके तो वहीं प्रधानमंत्री की छवि को आगे रख कर जनता को लुभाया जा सके। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन का प्रदेश में लगातार दखल बढ़ रहा है और यही कारण है कि वरिष्ठ नेताओं की राज्य में सक्रियता भी बड़ी है। विशेष संपर्क अभियान के तहत यह नेता न केवल लोकसभा, विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं बल्कि समाज के प्रबुद्ध लोगों से भी संवाद कर रहे हैं। इसके पीछे पार्टी का मकसद जमीनी स्थिति का आकलन करना और उसमें सुधार लाना है।
-एंटी इनकंबेंसी के डर से बदली रणनीति
पिछले कुछ दिनों में पार्टी के अंदरूनी सर्वे में भी पार्टी को खुश करने वाले नहीं रहे। उसके बाद से पार्टी ऐसी रणनीति पर काम कर रही है जिससे एक तरफ एंटी इनकंबेंसी के प्रभाव को रोका जा सके तो वहीं प्रधानमंत्री की छवि को आगे रख कर जनता को लुभाया जा सके। इसी के चलते पीएम मोदी के राज्य में प्रवास भी बढ़ रहे हैं। वो 27 जून को राज्य में आ रहे हैं। भाजपा प्रधानमंत्री के प्रवास के जरिए आदिवासी वोट बैंक को लुभाने की कोशिश कर रही है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को आदिवासी इलाके में बड़ा नुकसान हुआ था। 47 सीटों में से भाजपा सिर्फ 16 सीटें जीत सकी थी और कांग्रेस 30 सीटों पर आगे रही थी।
-भाजपा का फीड़बैक अच्छा नहीं
राज्य सरकार को लेकर भाजपा के अच्छा फीडबैक नहीं मिल रहा है। लिहाजा पार्टी की कोशिश है कि प्रधानमंत्री के चेहरे को आगे रखा जाए और हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ा जाए, जिसका राज्य में पार्टी को लाभ मिल सकता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की लगातार राज्य में आमद बढ़ रही है। भाजपा, प्रधानमंत्री की छवि को मध्य प्रदेश में भुनाना चाह रही है। 2018 में पार्टी की हार हुई तो पार्टी ने माना कि शिवराज ने पार्टी के सुझावों को दर किनार किया और उनके मन माफिक टिकट बांटे, नतीजा ये रहा की शिवराज ने जिन लोगों को विरोध के बाद भी टिकट दिए, उन्हें चुनावी मैदान में बुरी तरह से हार मिली। लेकिन ऑपरेशन लोटस की सफलता के बाद शिवराज का कद फिर से बढ़ा, हालांकि पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व शिवराज को सीएम नहीं चाहता था, लेकिन पीएम मोदी ने शिवराज पर मुहर लगा दी। हालांकि तमाम विपरीत परिस्थितियों में शिवराज ने खुद को साबित किया और अब पार्टी का विरोधी खेमा भी अब शिवराज के सामने नतमस्तक है।
-राष्ट्रीय नेतृत्व का दखल बढ़ा
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन का प्रदेश में लगातार दखल बढ़ रहा है और यही कारण है कि वरिष्ठ नेताओं की राज्य में सक्रियता भी बड़ी है। विशेष संपर्क अभियान के तहत यह नेता न केवल लोकसभा, विधानसभा क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं बल्कि समाज के प्रबुद्ध लोगों से भी संवाद कर रहे हैं। इसके पीछे पार्टी का मकसद जमीनी स्थिति का आकलन करना और उसमें सुधार लाना है। इसके अलावा पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के दौरे भी राज्य में बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की छवि को पार्टी आगे रखकर राज्य के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरने का मन बना चुकी है।
– सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा चुनाव
मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत 5 राज्यों में होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने रणनीति तैयार कर ली है। इसमें दो बातें अहम हैं। पहली यह कि पांचों राज्यों में चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। यानी किसी भी नेता को सीएम फेस के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया जाएगा। दूसरी बात यह कि स्थानीय मुद्दों पर फोकस रहेगा। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि छग, राजस्थान और तेलंगाना में सीएम प्रोजेक्ट नहीं किया जाएगा। मप्र और मणिपुर में भाजपा की सरकार है, इसलिए वहां सीएम का चेहरा प्रोजेक्ट करने की जरूरत नहीं है। क्या मप्र में शिवराज के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा? इस सवाल पर भाजपा के एक महासचिव ने कहा कि सामूहिक नेतृत्व में सीएम पूर्व सीएम और सभी बड़े नेता आते हैं। भाजपा मप्र में किन उपलब्धियों को आगे रखकर चुनाव में उतरेगी? इस सवाल पर एक वरिष्ठ ने कहा- पिछले 4 साल में राज्य सरकार ने क्या किया, यही मुद्दा नहीं है। शिवराज के पूरे शासनकाल में मप्र किस तरह बीमारू प्रदेश का दाग मिटाने में कामयाब रहा, लोगों को यह बताएंगे। किस उपलब्धि को कैसे रखना है, अभी नहीं बता सकते।















