सीबीएसई का बड़ा ऐलान : 2026 से 10वीं की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार, छात्रों को मिलेगा अंक सुधारने का अवसर।

पवन सक्सेना

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए ऐतिहासिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि वर्ष 2026 से बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित होंगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर से मानसिक दबाव को कम करना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के अधिक मौके प्रदान करना है। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के दिशा-निर्देशों के तहत लिया गया है।
नई प्रणाली के तहत छात्रों को एक शैक्षणिक सत्र में दो बार परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। पहली परीक्षा को मुख्य परीक्षा माना जाएगा, जबकि दूसरी परीक्षा को अंक सुधारने का मौका कहा जाएगा। यदि छात्र पहली परीक्षा में अपेक्षित अंक नहीं ला पाते हैं तो उन्हें परिणाम सुधारने के लिए दूसरी परीक्षा देने का विकल्प होगा।

मार्च-अप्रैल और जून-जुलाई में होंगी परीक्षाएं

सीबीएसई के अनुसार, पहली परीक्षा मार्च-अप्रैल में होगी, जिसका परिणाम मई में आएगा। दूसरी परीक्षा जून-जुलाई में आयोजित होगी और परिणाम अगस्त में जारी किए जाएंगे। इससे छात्रों को समय से कक्षा 11वीं में प्रवेश मिल सकेगा। ‘
नई नीति में परीक्षा बहुविकल्पीय (MCQ) और वर्णनात्मक प्रश्नों का मिश्रण होगी। इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल परीक्षाओं को भी अहमियत दी जाएगी। स्कूलों को अब पूरे शैक्षणिक सत्र में छात्रों का मूल्यांकन करना होगा ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके।

विद्यार्थियों को अपनी क्षमता साबित करने के लिए मिलेंगे दो मौके : डीसी डॉ. शैलेन्द्र

लखीमपुर खीरी के डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने इस बदलाव को शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा, “यह निर्णय छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद होगा। अब वे बिना मानसिक दबाव के अपनी पढ़ाई कर पाएंगे और उन्हें अपनी क्षमता साबित करने के लिए दो मौके मिलेंगे। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और शिक्षा का माहौल अधिक सहज और ज्ञान-केंद्रित बनेगा।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी सीबीएसई स्कूलों को नई नीति के अनुरूप ढालने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षकों को परीक्षा पैटर्न और मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आगामी महीनों में वर्कशॉप और ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए शिक्षकों को तैयार किया जाएगा ताकि वे बच्चों को नई व्यवस्था के अनुरूप पढ़ा सकें। इसके अलावा, स्कूलों में इंटरनल असेसमेंट को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
NEP-2020 के सुझावों के अनुरूप यह कदम छात्रों की प्रगति का आकलन केवल एक परीक्षा तक सीमित न रखकर पूरे शैक्षणिक वर्ष में किए गए प्रयासों के आधार पर करने की पहल है। यह बदलाव शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रगतिशील, प्रतिस्पर्धी और छात्र-केंद्रित बनाने में मदद करेगा।

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