150 कार्गो प्लेन, भारी हथियार और युद्ध की आहट…क्या ईरान पर बड़ा कदम उठाने वाले हैं ट्रंप?

वॉशिंगटन/तेहरान: मिडिल ईस्ट (Middle East) एक ऐसे ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा है जो किसी भी वक्त फट सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति की डोर अब टूटने की कगार पर है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 14 दिनों में कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया इस दशक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई देख सकती है। ताज़ा स्थिति यह है कि अमेरिका ने अपनी पूरी सैन्य मशीनरी को ‘वार मोड’ में डाल दिया है।

वेनेजुएला से भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की यह संभावित योजना किसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी सीमित नहीं होगी। यह एक व्यापक सैन्य अभियान (Major Military Campaign) होगा जो कई हफ्तों तक चल सकता है। जानकारों का कहना है कि यह पिछले महीने वेनेजुएला में हुई कार्रवाई से कहीं अधिक भीषण और बड़े पैमाने पर होगी। इसका उद्देश्य केवल चेतावनी देना नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना है।

रमजान और युद्ध का साया: टाइमिंग है बेहद संवेदनशील

19 फरवरी 2026 से पवित्र माह रमजान की शुरुआत हो चुकी है। ऐतिहासिक रूप से यह समय क्षेत्र में शांति का होता है, लेकिन वर्तमान हालात इसके ठीक उलट हैं। अमेरिका एक तरफ ईरान को परमाणु समझौते (Nuclear Deal) में वापस लाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। यदि कूटनीति विफल होती है, तो रमजान के दौरान ही संघर्ष की शुरुआत हो सकती है।

जिनेवा वार्ता: 3 घंटे की चर्चा, पर नतीजा सिफ़र?

हाल ही में जिनेवा में एक हाई-प्रोफाइल बैठक हुई, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के करीबी जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की।

  • प्रगति का दावा: दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर सहमति की बात कही।
  • मतभेद बरकरार: मुख्य विवाद परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर है।अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की सहनशक्ति अब खत्म हो रही है और “सैन्य विकल्प मेज पर सबसे ऊपर है।”

अमेरिका-इजराइल का ‘जॉइंट एक्शन’ प्लान

संभावना है कि इस बार अमेरिका अकेला नहीं होगा। इजराइल और अमेरिका मिलकर एक संयुक्त सैन्य ऑपरेशन (Joint Military Operation) को अंजाम दे सकते हैं।

फ्लैशबैक: जून 2025 में भी अमेरिका ने ईरान की अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया था, जो 12 दिनों तक चला था। लेकिन इस बार का ऑपरेशन उससे कहीं अधिक विनाशकारी होने की आशंका है।

युद्ध की अभूतपूर्व घेराबंदी: आंकड़ों में तैयारी

अगले दो हफ्तों का अल्टीमेटम देते हुए अमेरिका ने अपनी ताकत का भारी जमावड़ा किया है:

  • नौसेना: 2 एयरक्राफ्ट कैरियर और दर्जनभर से ज्यादा वॉरशिप (युद्धपोत) तैनात।
  • वायुसेना: सैकड़ों लड़ाकू विमान, जिनमें हाल ही में पहुंचे 50 नए फाइटर जेट्स भी शामिल हैं।
  • लॉजिस्टिक्स: 150 से ज्यादा मिलिट्री कार्गो विमानों के जरिए गोला-बारूद और हथियारों की सप्लाई पूरी की गई है।
  • डिफेंस: पूरे क्षेत्र में मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट कर दिए गए हैं।

निष्कर्ष: क्या युद्ध ही एकमात्र विकल्प है?

आने वाले 14 दिन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक होंगे। यदि ईरान और अमेरिका के बीच कोई ‘मिडल ग्राउंड’ नहीं निकलता, तो डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का यह सबसे बड़ा और जोखिम भरा फैसला हो सकता है। इस युद्ध का असर न केवल तेल की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख देगा। 

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