विवेक हत्या कांड : सामने आया एक और हत्यारोपी पुलिस वाले का शिकार

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नई दिल्ली। राजधानी लखनऊ  के मिस्ट्री बना विवेक तिवारी हत्या कांड केस की गुत्थी सुलझने का नाम नहीं ले रही आये दिन कुछ न कुछ चौका देने वाले मामले सामने आने लगते है  इस  मर्डर केस में आरोपी दोनों सिपाहियों को दो दिन के लिए रिमांड पर लिए जाने के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एसआईटी के अधिकारियों ने दोनों सिपाहियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का फिर से नाट्य रूपांतरण किया तो कहानी कई जगह उलझ गई। इस बीच अब केस में एक ऐसा शख्स सामने आया है, जिसने कहा है कि वो भी आरोपी सिपाहियों की ‘दबंगई’ का शिकार बन चुका है। इस शख्स ने कहा है कि वो विवेक तिवारी मर्डर केस में कोर्ट जाकर गवाही देने के लिए भी तैयार है।

बीएसएनएल के इंजीनियर ने सुनाई आपबीती

दरअसल, विवेक तिवारी मर्डर केस में मुख्या आरोपी प्रशांत चौधरी पर पहले भी आरोप लग चुके हैं कि वह रात में लोगों को डरा-धमकाकर अवैध वसूली करता था। अब बीएसएनएल के एक इंजीनियर ने बताया है कि वह भी आरोपी प्रशांत चौधरी का शिकार बन चुका है। इंदिरानगर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी के रहने वाले इस इंजीनियर ने बताया कि बीते 28 अगस्त की देर रात को वह अपने एक दोस्त के साथ जनेश्वर मिश्र पार्क की ओर से घर लौट रहे थे। उसी दौरान उन्होंने पार्क के कोने पर स्थित पान की दुकान से सिगरेट खरीदी और वहीं खड़े होकर पीने लगे। तभी अचानक अपाचे बाइक पर सवार दो पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और उनसे पूछताछ करने लगे।

5 हजार देकर सिपाहियों के चंगुल से छूटे

इंजीनियर ने बताया कि पूछताछ के दौरान उनमें से एक सिपाही ने तलाशी लेते हुए उनका पर्स निकाल लिया और कुछ दूर हटकर उसे चैक करने लगा। इसके बाद जब वो सिपाही वापस लौटा तो पर्स से गांजे की एक पुड़िया निकालते हुए उनकी पिटाई शुरू कर दी। सिपाहियों ने मामला रफा-दफा करने के लिए उनसे 10 हजार रुपए की मांग की और ना देने पर थाने ले जाकर मार-पिटाई करने लगे। इंजीनियर ने बताया कि सिपाहियों ने उनका मोबाइल भी छीन लिया और किसी से बात नहीं करने दी। उन्होंने गांजा सप्लाई करने के आरोप में जेल भेजने की धमकी दी। इसके बाद किसी तरह एक दोस्त से 5 हजार रुपए लेकर उन्होंने सिपाहियों को दिए और उसके बाद ही थाने से निकल पाए।

खबरों में फोटो देखकर पहचाना, गवाह बनने को तैयार

इंजीनियर का कहना है कि इस घटना के बाद वो काफी डर गए थे और उन्होंने मामले की कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने बताया कि जिस समय लखनऊ में विवेक तिवारी की हत्या हुई, वो हरिद्वार गए हुए थे। वापस आकर अखबारों और टीवी में खबरें देखी तो आरोपी प्रशांत चौधरी को पहचान लिया। उन्होंने बताया कि प्रशांत ने ही उनसे गांजे की पुड़िया रखने के नाम पर अवैध वसूली की थी। इंजीनियर का कहना है कि इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर विवेक तिवारी की हत्या का केस लड़ रहे वकीलों से संपर्क किया है और प्रशांत चौधरी की अवैध वसूली के खिलाफ गवाही देने के लिए तैयार हैं। इंजीनियर ने उस पान की दुकान और पान बेचने वाले की भी फोटो ले ली है।

एक गुमनाम शिक्षक भी लगा चुके हैं वसूली के आरोप

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही एक निजी कॉलेज के शिक्षक ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया था कि जिस रात विवेक तिवारी की हत्या हुई, उसी रात दोनों सिपाहियों ने उनसे धमकी देते हुए 3 हजार रुपए ऐंठे थे। शिक्षक ने बताया कि वो अपने कुछ दोस्तों के साथ एक बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे। लौटते हुए उन्होंने एक पान की दुकान से सिगरेट ली। इसके कुछ देर बाद ही दोनों पुलिसकर्मी वहां आ गए और धमकाते हुए हमसे 3000 रुपए ऐंठ लिए। शिक्षक ने बताया कि उन्हें शक हुआ कि पान वाले ने ही फोन से पुलिसकर्मियों को सूचना दी थी। शिक्षक ने बताया कि हो सकता है कि वो पान वाला ही शिकार भांपकर पुलिसकर्मियों को सूचना देता हो।

रिमांड पर सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

इससे पहले, शनिवार को मामले की जांच कर रही एसआईटी ने देर रात आरोपी दोनों सिपाहियों के बयानों के आधार पर पूरी घटना का फिर से नाट्य रूपांतरण किया। इस दौरान आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को जहां घटनास्थल से दूर एक गाड़ी में बिठाए रखा गया, वहीं नाट्य रूपांतरण के दौरान कई नए और चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए। एसआईटी के अधिकारियों ने आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को घटनास्थल से करीब 80 मीटर दूर कार में ही बिठाए रखा। पहले नाट्य रूपांतरण के दौरान सना खान ने एसआईटी को जो बयान दिए और दूसरे नाट्य रूपांतरण के दौरान आरोपी सिपाही ने जो बयान दिए, उनमें काफी अंतर पाए गए।

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