
-बसपा से निकले और निकाले पहुंच रहे सपा
-सपा कांग्रेस के भी सदस्य पहुंच रहे भाजपा
-दलबदलुओं की कांग्रेस में दिलचस्पी नहीं
योगेश श्रीवास्तव
लखनऊ। चुनावी बेला में इस समय दलबदलुओं की पहली पसंद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी बनी हुई है। जबकि बसपा से निकले और निकाले गए लोग समाजवादी पार्टी में अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित मान रहे है। दोनों ही पार्टियों में सिटिग विधायकों को शामिल करके २०२२ में संबधित विधानसभा क्षेत्रों में जीत का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है। कांग्रेस और सपा से भाजपा में शामिल हुए विधायकों को जहां टिकट की गारंटी दी जा रही है तो सपा में इस तरह का कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। इतना जरूर कहा जा रहा है कि जिसे टिकट नहीं मिलेगा उसे सरकार बनने पर सम्मानजनक पद दिया जायेगा। बसपा से निकाले गए अधिकांश लोग सपा में ही शामिल हुए है जबकि बसपा की एक महिला सदस्य वंदना सिंह हाल ही में भाजपा में शामिल हुई है। इससे पहले सपा से भाजपा में गये नितिन अग्रवाल को न सिर्फ अपने कुनबे में शामिल किया बल्कि उन्हे विधानसभा का उपाध्यक्ष भी बना दिया। हालांकि तकनीकी रूप में नितिन अग्रवाल अभी भी सपा के ही सदस्य है। समाजवादी पार्टी के ही अन्य सदस्य सुभाष पासी भी साईकिल से उतर कर भाजपा का दामन थाम चुके है। गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा क्षेत्र के सपा के विधायक सुभाष पासी बीजेपी में शामिल होने को सपा के लिए सैदपुर सीट पर झटका माना जा रहा है। गाजीपुर की सैदपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी 1996 के बाद अपना कमल नहीं खिला सकी। चुनावों में बसपा-सपा प्रत्याशी ने दो बार इस सीट पर अपनी जीत दर्ज करा चुकी है। इसी सीटपर महेंद्र नाथ 1996 में बीजेपी से टिकट पर जीते थे। इसके बाद 2002 और 2007 में बसपा के कैलाश नाथ सिंह और दीनानाथ पांडे की जीत हुई थी।
जिन वंदना सिंह का दामन थामा है। उनके पति सर्वेश सिंह सीपू वर्ष 2007 में सगड़ी विधानसभा से ही सपा के विधायक बने थे। अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में उनकी हत्या 2013 में 19 जुलाई को कर दी गई थी। उसके बाद वंदना सिंह बसपा से चुनाव लड़ीं तो विधायक चुनी गईं। वंदना सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनैतिक रही है। वंदना के ससुर रामप्यारे सिंह वर्ष 2002 में सपा के टिकट पर सगड़ी से ही चुनाव लड़े तो बसपा के प्रत्याशी के बरखूराम वर्मा को शिकस्त मिली थी। इसके बाद बसपा ने बरखूराम वर्मा एमएलसी बनाकर मायावती ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया था। सीपू की हत्या के बाद वंदना ने पति की विरासत संभालीं।
सभी दलों में रह चुके तथा कई सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश के हरदोई से सपा से चुनाव लड़ा और जीते। सपा से चुनाव जीतने के बाद पिता नरेश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने के बाद नितिन विधानसभा में सपा सदस्य होते हुए भाजपा सदस्यों के साथ बैठने लगे। तकनीकी रूप से वे इस समय सपा के सदस्य हैं। इससे पूर्व वे वर्ष 2008 के उपचुनाव बसपा और 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। तत्कालीन अखिलेश सरकार में वह राज्यमंत्री भी थे। हाल ही में उन्हे विधानसभा के उपाध्यक्ष चुना गयां। भाजपा ने उन्हे सपा का सदस्य मानते हुए उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था जबकि सपा ने नरेन्द्र वर्मा को उम्मीदवार बनाया था। दोनों के बीच हुए चुनाव में नितिन अग्रवाल ने नरेन्द्र वर्मा को शिकस्त दी थी।
इसी प्रकार कांग्रेस की विधायक अदिति सिंह भी भाजपा के कुनबें मे ंशामिल हो गयी है। अदिति सिंह कांग्रेस के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह(दिवंगत) की पुत्री है। वे पहली बार २०१७ के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुई थी। अदिति सिंह जिस सदर विधानसभा से निर्वाचित हुई थी उसी सीट से अखिलेश पांच बार विधायक बने थे। वे कांग्रेस के साथ ही पीस पार्टी तथा कांग्रेस के कुछ बागियों द्वारा बनाये गए एक दल के अगुवा थे।














