
पहाड़ों पर बर्फ़ गिर रही है और मैदानों में भारी बारिश। मैदान मतलब उत्तर भारत में तो नहीं लेकिन बैंगलुरु में बेइंतहा बारिश जारी है। घनघोर कलयुग है। मौसम का कोई ठिकाना नहीं। चाहे प्राकृतिक हो, चाहे राजनीतिक।
राजनीति से ख़्याल आया कि मुफ़्त की रेवड़ी पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट दौड़े कुछ सरकार समर्थक लोगों को इससे कोई गुरेज़ नहीं है कि जिस पार्टी की केंद्र में सरकार है, उसी पार्टी की गुजरात सरकार ने हाल ही में साल में दो रसोई गैस सिलेंडर मुफ़्त कर दिए हैं। हो सकता है इसे मुफ़्त की रेवड़ी न माना जाए! किसी की नज़र में यह रेवड़ी नहीं है।
न राज्य सरकार की नज़र में, न केंद्र सरकार की नज़र में और न ही उस चुनाव आयोग की नज़र में जिसने लगता है कि ऐसी ही सरकारी घोषणाओं के इंतज़ार में अभी गुजरात में चुनावों की घोषणा को रोक रखा है।
ख़ैर, मौसम चुनाव का हो या और कोई, इसके रंग अनेक हैं। पहाड़ों पर अलग और मैदानों में बिलकुल अलग। पहाड़ों पर हिमाचल को ही लें तो यहां भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। भाजपा यहाँ पूरा ज़ोर लगाए हुए हैं लेकिन हक़ीक़त यह है कि पिछले चार उपचुनाव यहाँ भाजपा बुरी तरह हार चुकी है। एक लोकसभा उपचुनाव और तीन विधानसभा उपचुनाव।
हालाँकि भाजपा का कहना है कि सत्ता भले ही इस दौरान उसकी थी लेकिन वीरभद्र के निधन के बाद जो सहानुभूति वोट थे, वो कांग्रेस को मिले इसलिए इन उपचुनावों में कांग्रेस विजयी हो सकी थी। वैसे हिमाचल प्रदेश में हर बार सत्ता बदल जाने के सच का भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। कांग्रेस इसी एकमात्र सच को सिर पर उठाए घूम रही है। जीत किसकी होगी और कौन मुँह की खाएगा, यह अभी से तो नहीं कहा जा सकता लेकिन दिसंबर में चुनाव परिणाम घोषित होते ही तमाम दावों-प्रतिदावों से पर्दा हट जाएगा।
इधर मैदानी जंग पर आएँ तो गुजरात चुनाव का मैदान दिखाई पड़ता है। यहाँ वर्षों से भाजपा की सत्ता क़ायम है और निश्चित तौर पर अगली बार भी उसके सत्ता में आने का पूरा भरोसा है लेकिन आप पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने शक्तिशाली भाजपा की नाक में दम कर रखा है। यही वजह है कि पिछली बार गुजरात चुनाव में कड़ी चुनौती देने वाली कांग्रेस की बजाय इस बार भाजपा को आप पार्टी से डर लगा रहा है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि ये जो आप पार्टी है, दरअसल यह संघ की ही बी पार्टी है, लेकिन मैदान में ऐसा लगता नहीं। फ़िलहाल तो भाजपा की तमाम तोपों का मुँह आप की तरफ़ और आप के तमाम तमंचे भाजपा की ओर निशाना साधे हुए हैं। देखना यह है कि इन दोनों के बीच मल्लिकार्जुन खडगे की कांग्रेस पार्टी कौनसा नया करतब दिखा पाती है!














