तरुण चुघ: बाल स्वयंसेवक से भाजपा राष्ट्रीय महासचिव तक का सफर

नई दिल्ली | भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पार्टी संगठन को सशक्त बनाने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनके संगठनात्मक कौशल पर भरोसा जताते हुए उन्हें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और तेलंगाना जैसे संवेदनशील और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी है।

तरुण चुघ का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की बाल शाखाओं से शुरू होकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा है। विद्यार्थी परिषद के माध्यम से राजनीति में कदम रखने वाले चुघ ने भाजपा संगठन के विभिन्न स्तरों पर अपनी सेवाएं दीं और पंजाब सरकार में (दर्जा प्राप्त) राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने के बाद, वे अब राष्ट्रीय महासचिव के पद पर कार्यरत हैं।

संगठन पर उनकी गहरी पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत जुड़ाव और पार्टी की विचारधारा के प्रति उनकी सक्रियता ने उन्हें भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया है। इसके साथ ही, चुग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनाव में अहम भूमिका निभाई।


विद्यार्थी परिषद से मिला पहला राजनीतिक मंच


तरुण चुघ का जन्म 3 मई 1971 को पंजाब में हुआ, इनकी पारवारिक पृष्ठभूमि आरएसएस की रही है. उनके दादा लाला सुंदर दास चुघ और पिता बनारसी दास चुघ संघ के सक्रिय सदस्य थे, जिससे तरुण चुघ का झुकाव भी आरएसएस की ओर स्वाभाविक रूप से हो गया। मात्र सात वर्ष की उम्र में उन्होंने शक्ति नगर के टंकी वाले पार्क में संघ की बाल शाखाओं में भाग लेना शुरू किया और राष्ट्रवादी विचारधारा को आत्मसात किया। शायद उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बालक भविष्य में भाजपा के संगठन में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

छात्र जीवन में ही तरुण चुघ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।

1980 के दशक में, जब भाजपा पंजाब में अपनी जड़ें मजबूत करने का प्रयास कर रही थी, तरुण चुघ ने अमृतसर की गलियों और बाजारों में पार्टी प्रत्याशियों के लिए घर-घर जाकर प्रचार किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए अथक मेहनत की। मंडल राजनीति के दौर में उन्होंने युवाओं को भाजपा से जोड़ने के लिए रोष रैलियां आयोजित कीं और कॉलेज के विद्यार्थियों को पार्टी की विचारधारा अपनाने के लिए प्रेरित किया।

पंजाब में आतंकवाद के कठिन दौर में भी तरुण चुघ ने राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने का कार्य किया। उन्होंने युवाओं को संगठन से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई और भाजपा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया।


अमृतसर की गलियों में प्रचार से भाजपा के रणनीतिकार बनने तक
तरुण चुघ ने 1989 में अमृतसर में भाजपा के लिए पोलिंग बूथ एजेंट के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उनकी मेहनत और संगठनात्मक क्षमता को पहचानते हुए, 1992 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का अमृतसर जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसी वर्ष, राम मंदिर आंदोलन के बाद अयोध्या में विवादित ढांचे के विध्वंस के दौरान, उन्होंने भाजपा की गतिविधियों को और अधिक सक्रियता से आगे बढ़ाया।

1996 में, उनकी संगठनात्मक दक्षता को देखते हुए, उन्हें पंजाब युवा मोर्चा का महासचिव बनाया गया। इस दौरान, उन्होंने अमृतसर से अटारी बॉर्डर तक मानव श्रृंखला का आयोजन किया, जो देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का प्रतीक बना। यह आयोजन उनके नेतृत्व कौशल को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हुआ।

2000 में, तरुण चुघ को भाजपा पंजाब का राज्य सचिव बनाया गया। इसके बाद, 2005 में, उन्हें पार्टी के राज्य प्रशिक्षण सेल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनकी नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी में एक मजबूत स्थान दिलाया।


2009 में, उन्हें पंजाब युवा विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने राज्य मंत्री के रैंक पर कार्य किया। 2014 में, भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की टीम में उन्हें राष्ट्रीय मंत्री के रूप में शामिल किया गया और अंडमान-निकोबार का प्रभारी नियुक्त किया गया। 2020 में, तरुण चुघ को दिल्ली विधानसभा चुनाव के संयोजक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई।


शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार में बने मंत्री
2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन से शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन ने 117 में से 67 सीटों पर जीत हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप प्रकाश सिंह बादल चौथी बार मुख्यमंत्री बने। इसी दौरान तरुण चुघ को पंजाब सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई। 2009 में, उन्हें पंजाब युवा विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री के स्तर पर काम किया. इस पद पर उन्होंने 2009 से 2011 तक अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद, 2011 से 2012 तक, वे इसी पद पर विशेष मुख्य सचिव रैंक के साथ कार्यरत रहे।

पंजाब युवा विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में, तरुण चुघ ने 2009 से 2012 तक राज्य में युवा विकास से संबंधित विभिन्न नीतिगत प्रयासों में सक्रिय योगदान दिया और इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का प्रयास किया।


भाजपा में अनुसूचित जाति मोर्चा और युवा मोर्चा का नेतृत्व
2020 में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तरुण चुघ को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया और उनके कंधों पर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और तेलंगाना जैसे संवेदनशील राज्यों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी।
सितंबर 2022 में उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए, पार्टी ने उन्हें इन राज्यों का प्रभारी बनाए रखा। इसके साथ ही, उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी भी नियुक्त किया गया।

2024 में, उनकी संगठनात्मक क्षमता को और अधिक महत्व देते हुए, पार्टी ने उन्हें अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा का राष्ट्रीय प्रभारी बनाया। इस नई जिम्मेदारी ने उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावशाली और व्यापक बना दिया।


मोदी सरकार की नीतियों पर लिखी किताब
तरुण चुघ की पुस्तक “जीत मोदी की: समृद्धि के अभिनव पथ पर भारत” वर्ष 2024 में प्रकाशित हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और शासन शैली का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक 17 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में एक भव्य समारोह के दौरान लॉन्च की गई, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस पुस्तक में मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों, जैसे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, जीएसटी सुधार और भारत की वैश्विक कूटनीति पर गहराई से चर्चा की गई है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सामने आई चुनौतियों और आलोचनाओं का भी निष्पक्ष मूल्यांकन करती है।

साथ ही, पुस्तक में मोदी के नेतृत्व में हुए सामाजिक और आर्थिक बदलावों का भी विश्लेषण किया गया है। यह उन पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो भारत की बदलती राजनीति और नीति निर्माण प्रक्रिया को समझने में रुचि रखते हैं।

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