
Shiv Mahapuran Katha Vachak Death In Biaora: आपने सुना होगा कि कथावाचक जब कथा करने के लिए गद्दी पर बैठता है तो वो खुद भगवान व्यास का रूप हो जाता है। मान्यता ये भी है कि पीठ में बैठकर कथावाचक द्वारा कही गई सभी बातें सत्य होती है। क्योंकि वो ईश्वर की वाणी होती है। एक ऐसी ही सत्य घटना मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से सामने आई है। जिले के ब्यावरा में शिवमहापुराण का आयोजन किया गया था। यहां इंदौर के पंडित राकेश व्यास कथा सुनाने के लिए आए थे। व्यास पीठ से उन्होंने भावपूर्ण अंदाज में जो बातें कहीं वो अगले ही दिन सच साबित हो गईं।
2 दिन में समाप्त हो गई कथा
दरअसल हुआ यूं कि शिवमहापुराण कहने आए कथावाचक राकेश व्यास ने 31 मार्च को कथा शुरू की। इसमें सबसे खास और बड़ी बात ये कि कथा में कोई एक यजमान नहीं बल्कि इलाके की पूरी जनता था। कथा स्थल के रूप में कथा राजगढ़-ब्यावरा हाइवे के पास स्थित चौकी ढाणी ग्राउंड को भव्य रूप से तैयार किया गया था। भारी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने के लिए यहां पहुंच रहे थे। आसपास के इलाके में मेले जैसा माहौल हो गया था। पूरा ब्यावरा भगवान शिव के रंग में रम गया था। एक रोज की कथा में पंडित राकेश व्यास कुछ बातें कही और अगले दिन एक दुर्घटना के कारण कथा का समापन हो गया।
क्या बात कही थी व्यास ने
व्यास पीठ पर बैठे पंडित राकेश व्यास ने अपनी कथा में एक प्रसंग की बात करते हुए कहा ‘जिंदगी रंज ओ गम का मेला है, कल मैं रहूं या ना रहूं। तुम रहो या न रहो, कथा का श्रवण कर लीजिए एक दिन राजा, रंक और फकीर सब को जाना है।’ उसी रात पंडित को साइलेंट अटैक आया और उनकी मृत्यू हो गई। कथा को 2 दिन में ही समाप्त करना पड़ा और मेले जैसा सजा इलाका सुनसान हो गया। इलाके में मातम और भव का माहौल बना गया। इस घटना के बाद व्यास पीठ से कही गई बातों को लेकर भी चर्चा हो रही है।
रात्रि विश्राम के दौरान आया अटैक
बताया जा रहा है कथावाचक राकेश व्यास कथा के बाद रात्री भोज करने के बाद विश्राम करने गए। उसके बाद जब सुबह वो समय से नहीं जागे तो भक्त उन्हें जगाने के लिए पहुंचे। जब व्यास के कमरे में लोग गए तो पाया की अब वो नहीं जागने वाले। साइलेंट अटैक के कारण वो गहरी नींद में सो गए हैं। इसके बाद से इलाके में सन्नात पसर गया और लोग शोक में डूब गए।
6 अप्रैल तक चलनी थी कथा
बता दें ब्यावरा के राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित हो रही ये कथा 31 मार्च से 6 अप्रैल तक चलनी थी। कथा के दो दिन ही पूरे हुए थे। दूसरे दिन कथावाचक राकेश व्यास ने पीठ से सभी बातें कही। उसी रात उन्हें साइलेंट अटैक आ गया। स्थानीय रहवासियों ने जगाया पर जब वो नहीं जागे तो उनको आनन-फानन में पंजाबी हॉस्पिटल ले जाया गया। हालांकि, वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।