वही तारीख, वही घर और एक बार फिर खून…बच्चों को मौत के हवाले के बाद किया सुसाइड

– तीन साल पहले 19 दिसंबर को पत्नी की मौत से सहम उठे थे बच्चे
– अब आरोपी के साथ छोटे बेटे की मौत, बड़ा बेटा जिंदगी–मौत के बीच

बिल्हौर (कानपुर)। क्रोध आने पर बेकाबू होने वाले सनकी बाप ने मानसिक तनाव और पारिवारिक उलझनों से थककर पत्नी की मौत की बरसी वाले दिन जिंदगी को अलविदा कहने का इरादा बनाया। मौत के बाद बच्चों का क्या होगा, लिहाजा सुसाइड से पहले दो मासूमों को जहर गटकने के लिए मजबूर किया। बच्चों ने बाप की हरकत का विरोध किया तो दोनों को ईंट से कुचलकर मौत के मुंह में धकेल दिया। इसके बाद कीटनाशक गटककर जिंदगी को अलविदा करने का प्रयास किय़ा। शुक्रवार को घर के बाहर दुकान नहीं खुली तो ग्राहकों ने कई मर्तबा घंटी बजाई, लेकिन जवाब नहीं मिला तो रिश्तेदार को बुलाया गया। दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का मंजर देखकर मौजूद लोग सिहर उठे। कमरे में खून फैला था और जहर की बोतल के बगल में लहूलुहान छोटा बेटा रुद्र पड़ा था। बड़ा बेटा शुभ और अजय खुद गंभीर घायल थे। सूचना पर पहुंची पुलिस तीनों को अस्पताल लेकर पहुंची, जहां रुद्र और अजय को मृत घोषित कर दिया गया।

बीवी की मौत के बाद बच्चों के नाम प्रापर्टी
अरौल के हाशिमपुर गांव निवासी अजय कटियार उर्फ लालू ने बरसो पहले अरौल कस्बे में ठिकाना बनाया और सोने-चांदी का काम करने के दौरान केशवापुर निवासी अलका कटियार से विवाह किया। करीब 15 साल के वैवाहिक जीवन में बेटे शुभ (12) और रुद्र (7) के साथ जिंदगी खिलखिला रही थी, लेकिन स्वभाव से सनकी अजय का 19 दिसंबर 2022 को पत्नी अलका के साथ झगड़ा हुआ तो कथित तौर पर मारपीट में गंभीर चोट लगने से अलका की मौत हो गई थी। मामला संदिग्ध था, लेकिन ससुराल पक्ष से सुलह के बाद अजय ने अपनी जायदाद को अलका के दोनों बच्चों के नाम कर दिया और अलका की मौत दफन हो गई। शुक्रवार को अजय के घर के बाहर स्थित उसकी दुकान नहीं खुली तो ग्राहकों के बुलावे पर अजय का भाई रामू पहुंचा, लेकिन कई मर्तबा घंटी बजाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका पर दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर का मंजर भयावह था। कमरे में हर तरफ खून फैला था, कीटनाशक जहर की बोतल पड़ी थी, रस्सी का फंदा टूटा था और छोटा बेटा रुद्र अचेत पड़ा था। बड़ा बेटा शुभ और अजय खुद गंभीर रूप से घायल थे। बच्चों के सिर और चेहरे पर ईंट या भारी वस्तु से किए गए बर्बर वार साफ दिख रहे थे। सूचना पर पहुंची पुलिस तीनों को अस्पताल लेकर गई, जहां रुद्र और अजय को मृत घोषित कर दिया गया। प्राथमिक उपचार के बाद शुभ को गंभीर हालत में कानपुर रेफर कर दिया गया।

सनकी ने सुसाइड नोट में कबूली बच्चे की हत्या
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि अजय ने मानसिक तनाव में बेटों के साथ खुद भी जीवन लीला समाप्त करने का इरादा बनाया था। पुलिस का दावा है कि, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अजय ने पहले बेटों को ज़हर पिलाने का दबाव बनाया। विरोध के कारण अपने ही बच्चों पर जानलेवा हमला किया। इसके बाद खुद फंदे पर झूलने का प्रयास किया तो रस्सी टूटने से सिर के बल जमीन पर गिरकर घायल हो गया। कुछ देर बाद जहर खाकर खुद की सांसों का अंत कर डाला। थानेदार जनार्दन सिंह यादव ने बताया कि मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें आरोपी ने लिखा है कि बच्चे उतने ही पैदा करने चाहिए, जितने की परवरिश कर सको। उसने सुसाइड नोट में आत्महत्या के बाद बच्चों के जीवन संकट का हवाला देकर उन्हें भी साथ मारने की बात लिखी है। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं।

पत्नी की हत्या के बाद मानसिक तनाव
बच्चों समेत खुद के खात्मे की पटकथा लिखने वाले अजय के पड़ोसियों ने बताया कि पत्नी की मौत के बाद अजय किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था और अपनी ही धुन में मगन रहता था। बातचीत और व्यवहार से वह सही था और रात में मदिरा का सेवन करता था, लेकिन इरादे इतने खौफनाक होने का अंदेशा नहीं था। बताया गया कि घर से रसोइया की छुट्टी कर अजय सही मौके का इंतजार कर रहा था। शुक्रवार की सुबह सामान्य थी। अजय ने घर की साफ–सफाई के बाद छुट्टी से अनजान बच्चों को मां गायत्री विद्यापीठ स्कूल भेजा। चंद घड़ी में बच्चे छुट्टी की खुशी समेटे घर लौट आए। उन्हें क्या पता था कि सनकी बाप उनकी जान को निशाना बनाने से परहेज नहीं करेगा। घटनास्थल से कुछ दूरी पर ब्यूटी पार्लर चलाने वाली अजय की साली अर्चना कटियार ने आरोप लगाया कि बहन अलका की मौत के बाद अजय से कोई संबंध नहीं था। दावा है कि अजय पहले भी कह चुका था कि पिता के इशारे पर पत्नी को मारा था। आशंका जताई कि ताजी घटना के तार भी अजय के पिता–भाई से जुड़े हो सकते हैं।

कोट्स
प्राथमिक जांच और सुसाइड नोट से स्पष्ट है कि, डिप्रेशन का शिकार अजय अपने बच्चों के साथ जान देना चाहता था। वह परिवार के लोगों से वास्ता नहीं रखता था। घटना की कई एंगल से जांच जारी है।
–दिनेश त्रिपाठी, डीसीपी पश्चिम

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