
Prayagraj. जब भी उम्र और फ़र्टिलिटी की बात होती है, ध्यान ज़्यादातर महिलाओं पर जाता है। पुरुषों को अक्सर ऐसा लगता है कि उनकी उम्र का ज़्यादा असर नहीं पड़ता लेकिन सच यह है कि मर्दों की जैविक क्षमता भी उम्र के साथ बदलती है। हाँ, पुरुष जीवनभर शुक्राणु बनाते रहते हैं पर वह क्षमता समय के साथ वैसी नहीं रहती जैसा 25 की उम्र में होती है। डॉ. मधुलिका सिंह, फ़र्टिलिटी विशेषज्ञ, बिरला फर्टिलिटी और आईवीएफ, प्रयागराज का कहना है कि अगर आप परिवार शुरू करना चाहते हैं, तो ये बदलाव मायने रखते हैं।
25 की उम्र में शुक्राणु कैसे होते हैं?
20 वर्षीय दशक में ज़्यादातर पुरुषों के शुक्राणु तेज़ी से चलते हैं, आकार और बनावट भी स्वस्थ होते हैं, और उनके डीएनए को कम नुक़सान होता है। यानी फ़र्टिलिटी की दृष्टि से शरीर उस समय अपनी सबसे मजबूत अवस्था में होता है।
45 की उम्र तक क्या बदल जाता है?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, फर्टिलिटी की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगती है। शुक्राणुओं की संख्या “सामान्य” दिख सकती है, पर तेज़ और सही आकार वाले शुक्राणु घटने लगते हैं और डीएनए में क्षति बढ़ने लगती है। इन बदलावों की वजह से गर्भधारण में समय लग सकता है और कुछ आनुवंशिक या विकास संबंधी समस्याओं का जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है। यह कोई अचानक होने वाला बदलाव नहीं है बल्कि ये सालों में धीरे-धीरे जमा होने वाली चीज़ें हैं। इसलिए कई पुरुषों को तब तक पता नहीं चलता जब तक वे बच्चा प्लान नहीं करते।
जीवनशैली बड़ी भूमिका निभाती है
उम्र के अलावा जीवनशैली भी शुक्राणु गुणवत्ता को बहुत प्रभावित करती है। एक ही उम्र के दो पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता में ज़मीन–आसमान का फ़र्क दिख सकता है। शुक्राणु को नुकसान पहुँचाने वाली चीज़ें में आता है धूम्रपान, ज़्यादा वज़न, नींद की कमी, तनाव, बहुत ज़्यादा शराब, और शरीर का ज़्यादा गर्म रहना। वहीं इनसे शुक्राणुओं को बेहतर रखने के आप अपना सकते हैं नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, अच्छी और पूर्ण नींद और तनाव कम करने की आदतें। यानी उम्र एक हिस्सा है, पर जीवनशैली उम्र से भी तेज़ असर डाल सकती है।
अगर उम्र ज़्यादा हो रही है या गर्भ ठहरने में समय लग रहा हो
ऐसे में वीर्य जांच करवाना बिल्कुल आसान और समझदारी भरा कदम है। यह सरल जाँच है, और इस से तुरंत पता चलता है कि शुक्राणु की स्थिति क्या है। यह इसलिए भी ज़रूरी है कि समस्याएं पहले पकड़ में आ जाएँ तो समय रहते सुधार किए जा सकते हैं। और अच्छी बात यह है की शुक्राणु गुणवत्ता जीवनशैली में बदलाव से काफी हद तक सुधर सकती है – यानी जल्दी जांच कराने से आपके पास बदलाव करने का समय मिलता है।
आख़िरी बात
उम्र का असर शुक्राणु स्वास्थ पर ज़रूर पड़ता है, लेकिन कहानी सिर्फ़ उम्र की नहीं है। पुरुष अपने 20s और 30s में कैसी जीवनशैली अपनाते हैं – कैसे खाते हैं, कितना सोते हैं, तनाव कैसे संभालते हैं, धूम्रपान या शराब करते हैं या नहीं – यह सब मिलकर तय करता है कि 40s में उनकी फ़र्टिलिटी कैसी होगी।
जब पुरुष इन बातों को समझ लेते हैं, तो वे अपनी फ़र्टिलिटी को उतनी ही गंभीरता से देख पाते हैं, जितनी अपने आजीविका, फिटनेस या जीवन के दूसरे महत्त्वपूर्ण हिस्सों को देते हैं।














