
- ट्यूशन टीचर फिरौती की रकम से गृहस्थी बसाना चाहती थी…..
- टीचर का प्रेमी प्रभात सिर पकड़कर जमीन पर बैठ गया
- सहयोगी कातिल शिवा ने अंतिम समय में कबूला गुनाह
- बिलखते परिजनों ने फांसी की सजा के लिए आग्रह किया
कानपुर। आखिरकार फैसले की घड़ी सामने थी। अदालत ने शहर के चर्चित कुशाग्र कनोडिया हत्याकांड में ट्यूशन टीचर रचिता वत्स के साथ-साथ उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी आर्यन गुप्ता उर्फ शिवा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा का ऐलान करते हुए कोर्ट ने कहा है कि तीनों को ताउम्र जेल में रखा जाए। साथ ही हत्यारों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। फैसला सुनते ही कुशाग्र के कातिल फूट-फूटकर रोने लगे। दिवंगत कुशाग्र का परिवार भी बेटे को याद करते हुए खूब बिलखा। अपर जिला जज-11 सुभाष सिंह ने फैसला सुनाते समय कहाकि, इस केस का फैसला नजीर बनेगा और कानून के विद्यार्थियों को इसका अध्ययन करना चाहिए। गौरतलब है कि, अदालत ने उन तमाम बिंदुओं को शामिल किया है, जिसके आधार पर फैसला सुनाते समय इसे कानून के विद्यार्थियों के लिए नजीर कहा गया है।
30 पन्ने के फैसले को सुनकर रोंगटे खड़े
गुरुवार को फैसला सुनाते समय अदालत खचाखच भरी थी। एहतियात के लिए परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल और एसएफएफ को तैनात किया गया था। हथकड़ी में तीनों हत्यारों को दोपहर अदालत में लाकर कठघरे में खड़ा कर दिया गया। तीनों कातिलों के चेहरे पर सजा का खौफ साफ मौजूद था। सजा सुनाई जाने से पहले सजा के बिंदुओं पर चर्चा हुई। अभियोजन ने फांसी की सजा की मांग रखी, जबकि बचाव पक्ष ने कम उम्र और पहले अपराध का हवाला देकर रहम का अनुरोध किया। इसी दरमियान, कुशाग्र के घर फिरौती का खत फेंकने वाले शिवा ने अपना अपराध स्वीकार करते हुए रहम की भीख मांगी, लेकिन अदालत ने उसकी बात पर गौर नहीं किया। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुनाना शुरू कर दिया। 30 पन्ने का फैसला जैसे-जैसे न्यायाधीश पढ़ते गए, वैसे-वैसे अदालत परिसर के अंदर मौजूद प्रत्येक इंसान के रोंगटे खड़े होते गए। लंबे-चौड़े फैसले से साफ झलक रहा था कि अदालत ने कुशाग्र की हत्या को जघन्य माना है। जैसे ही अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई वह फूट-फूटकर रोने लगे। प्रभात सिर पकड़कर कठघरे में जमीन पर बैठ गया। वहीं दूसरी ओर कुशाग्र का परिवार भी बेटे को याद कर बिलख उठा। जिला शासकीय अधिवक्ता दिलीप अवस्थी व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भास्कर मिश्र ने बताया कि अभियोजन की ओर से 14 गवाह पेश किए गए थे, जिसमें कुशाग्र के परिवार से तीन गवाह शामिल हैं। कोर्ट में इस मामले की 13 जनवरी को अंतिम बहस पूरी हुई थी, जबकि मंगलवार को न्यायालय ने तीनों आरोपितों को दोषी करार दिया था। कुशाग्र हत्याकांड में फैसला सुनते ही अदालत परिसर में सन्नाटा छा गया। वहीं कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने अदालत के फैसले को इंसाफ की दिशा में बड़ा कदम बताया।
दर्शनपुरवा में कोठरी से बरामद हुआ थी लाश
दर्दनाक किस्सा शहर को सवा दो साल भी याद है। आचार्यनगर में भगवती विला अपार्टमेंट निवासी मनीष कनोडिया का बेटा और जयपुरिया स्कूल में हाईस्कूल का छात्र कुशाग्र कनोडिया 30 अक्टूबर 2023 की शाम ट्यूशन पढ़ने के लिए निकला, लेकिन लौटा नहीं। घटना के वक्त मनीष कारोबार के सिलसिले में गुजरात गए थे, लिहाजा मां सोनिया और भाई आदित्य ने फोन किया, लेकिन कुशाग्र का नंबर स्विच ऑफ था। इसी दरमियान, रात नौ बजे के करीब कुशाग्र के अपार्टमेंट के बाहर स्कूटी सवार नकाबपोश युवक हेलमेट लगाए पहुंचा और गार्ड राजेंद्र को बुलाकर एक लिफाफा मनीष कनोडिया के फ्लैट पर पहुंचाने के लिए कहा। नकाबपोश की स्कूटी की आगे की नंबर प्लेट पर कालिख लगी थी, जबकि पिछली नंबर प्लेट पर कपड़ा बंधा था। ऐसे में नकाबपोश पर शक होने के कारण गार्ड ने कहाकि, हेलमेट और नकाब हटाकर अंदर जाकर खुद लिफाफा देकर आए। युवक के अंदर जाते ही कपड़ा हटाकर स्कूटी का नंबर नोट कर लिया था। स्कूटी नंबर की पड़ताल हुई तो वह कुशाग्र की ट्यूशन टीचर रचिता वत्स की निकली। पुलिस ने रचिता को हिरासत में लिया तो मामला खुलता चला गया। उसने बताया कि, बीते दिन की दोपहर से उसका प्रेमी प्रभात शुक्ला स्कूटी लेकर गया था। पुलिस रचिता को लेकर दर्शनपुरवा में प्रभात शुक्ला के घर पहुंची तो उसके मकान के बाहरी कमरे में कुशाग्र की रक्तरंजित लाश बरामद हुई थी। पुलिस ने प्रभात के घर का सीसीटीवी फुटेज खंगाला तो सामने आया कि, सोमवार की शाम प्रभात पहले घर में घुसा और फिर कुशाग्र। करीब 35 मिनट बाद प्रभात घर से अकेले निकलता दिखा है। रचिता उस वक्त साथ मौजूद थी।
रकम मिलने के बाद कुशाग्र की हत्या का प्लान था
पुलिस ने सख्ती के साथ प्रभात से सवाल-जवाव किये तो उसने बताया कि, कुशाग्र के साथ उसके पहले से पहचान थी। सोमवार की शाम जरीब चौकी चौराहे के पास मुलाकात होने के बाद कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने घर लेकर गया था और मौत के घाट उतार दिया। प्रभात ने बताया कि वह गेमिंग एप और क्रिकेट विश्वकप की सट्टेबाजी में लाखों रुपये हारने के कारण आर्थिक संकट में फंसा था। इसके साथ ही शक था कि, वह धीरे-धीरे रचिता से करीबी बढ़ा रहा है। ऐसे में फिरौती के जरिये अमीर बनने और कुशाग्र को रास्ते से हटाने का दांव खेला था। प्रभात ने बताया कि, साजिश में कामयाब होता तो फिरौती वसूलने के बाद रचिता को लेकर दूसरे शहर में बसने के बाद ब्याह रचा लेता। पूछताछ में पता चला था कि, घटना में प्रभात के साथी दर्शनपुरवा निवासी शिवा गुप्ता भी मददगार था। कुशाग्र के घर फिरौती का पत्र फेंकने वही गया था। प्रभात ने बताया था कि, हड़बड़ी में कुशाग्र को पहले मार डाला, अन्यथा फिरौती की रकम मिलने के बाद हत्या का प्लान था, क्योंकि कुशाग्र उसे और रचिता को पहचानता था।












