
– महाराष्ट्र में शोक की लहर
बारामती । महाराष्ट्र के बारामती से एक बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजीत पवार का बुधवार सुबह उनके गृह क्षेत्र बारामती में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार पायलट समेत सभी छह लोगों की जान जाने की खबर है।यह दुर्घटना उस समय हुई जब अजीत पवार अपने सहयोगियों के साथ मुंबई से बारामती पहुंच रहे थे। जानकारी के अनुसार, चार्टर विमान ने सुबह 8 से 9 बजे के बीच मुंबई से उड़ान भरी थी। बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक्त विमान अचानक अपना नियंत्रण खो बैठा और क्रैश हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना भयानक था कि गिरते ही विमान आग का गोला बन गया और आसमान में धुएं के ऊंचे गुब्बारे दिखाई देने लगे।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। शुरुआत में यह जानकारी आई थी कि अजीत पवार गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें तत्काल बारामती के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके उपचार में जुटी थी। हालांकि, कुछ ही समय बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस खबर ने पूरे राज्य और राजनीतिक गलियारों को स्तब्ध कर दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बारामती में उस समय मौसम खराब था या विमान में कोई तकनीकी खराबी आई थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। शुरुआती रिपोर्टों में भारी बारिश को भी हादसे की एक संभावित वजह माना जा रहा है। अजीत पवार बारामती से ही विधायक थे और यह पूरा क्षेत्र पवार परिवार का गढ़ माना जाता है। वह आज बारामती में जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में आयोजित कई जनसभाओं और कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले थे।
इस दुखद सूचना के मिलते ही पवार परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। उनकी बहन और सांसद सुप्रिया सुले तुरंत बारामती के लिए रवाना हो गईं, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी दिल्ली और अन्य स्थानों से बारामती पहुंच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां घटना स्थल पर मौजूद हैं और मलबे को हटाने के साथ-साथ हादसे के कारणों की गहन जांच की जा रही है। अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा चेहरा थे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विभाजन के बाद वह राज्य की सत्ता में उपमुख्यमंत्री की भूमिका निभा रहे थे। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार अपनी प्रशासनिक पकड़ और कड़क मिजाज के लिए जाने जाते थे। उनके निधन से महाराष्ट्र ने एक अनुभवी नेतृत्व खो दिया है। फिलहाल पूरे बारामती क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।















