मुंबई क्लाइमेट वीक क्या है? — एक व्याख्या…कौन हैं : आयोजक और साझीदार

मुंबई क्लाइमेट वीक (एमसीडब्ल्यू) एक गैर-लाभकारी संगठन (एनजीओ) “प्रोजेक्ट मुंबई’ के नेतृत्व में प्रारंभ की गई एक पहल है। यह महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और न्यूयार्क क्लाइमेट वीक के आयोजक क्लाइमेट ग्रुप के सहयोग से संचालित एक बड़ा सामूहिक प्रयास है
यह अभियान विविध वर्गों को जोड़ता है: नीति निर्माता (पालिसी बनाने वाले), सीईओ और जलवायु वैज्ञानिक “हब” में एकत्र होंगे। छात्र, जमीनी स्तर के नवाचार करने वाले, एनजीओ और स्थानीय नागरिक “स्पोक्स” के माध्यम से भाग लेंगे। मुख्य साझेदारों में युनीसेफ का “यू वाह’ – युवा भागीदारी के लिए, डब्ल्यूआरआई इंडिया – शहरी लचीलापन (अर्बन रेजिलेंस) हेतु नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) – नवाचार और स्टार्टअप सहयोग के लिए।

क्या करेंगे: भारत का पहला नागरिक नेतृत्व वाला जलवायु आंदोलन

एमसीडब्ल्यू केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि शहर-स्तरीय मंच है। इसका उद्देश्य जलवायु कार्रवाई को आम नागरिकों तक पहुंचाना है। यह पहल उच्च-स्तरीय कूटनीति से हटकर ग्लोबल साउथ की जमीनी और व्यावहारिक समाधानों पर केंद्रित है। कार्यक्रम तीन मुख्य विषयों पर आधारित है:

• अर्बन रेजिलेंस – हीटवेव, बाढ़ और बुनियादी ढांचे से निपटना

• एनर्जी ट्रांजिशन– स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन रोजगार का विस्तार

• खाद्य सिस्टम – टिकाऊ कृषि और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा

कहां है : हब व स्पोक का स्थल

यह कार्यक्रम मुंबई में दो-स्तरीय भौगोलिक संरचना पर आधारित है

• हब: जियो वर्ल्ड कंवेंशन सेंटर में जहां नेतृत्व पैनल, नीति चर्चा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि जुटेंगे।

• स्पोक्स: शहर भर में होंगी गतिविधियां जैसे नेशनली गैलरी ऑफ मॉर्डन आर्ट, कॉलेज परिसरों और स्थानीय इलाकों में, फिल्म स्क्रीनिंग

हैकाथॉन व सामुदायिक कार्यशालाएं होंगी।

कब होगा कार्यक्रम : 17–19 फरवरी 2026

मुख्य कार्यक्रम फरवरी 2026 में तीन दिनों तक चलेगा, लेकिन इसे एक सतत आंदोलन के रूप में डिजाइन किया गया है। तैयारी के लिए कार्य समूह पहले से सक्रिय हैं। कॉलेज रोड-शो चल रहे हैं कार्यक्रम के बाद भी कार्यान्वयन की रूपरेखा लागू की जाएगी।

क्यों: नीति और जनता के बीच की दूरी को पाटना

पारंपरिक जलवायु पहल अक्सर कॉरपोरेट बोर्डरूम तक सीमित रह जाती हैं, जबकि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। एमसीडब्ल्यू का लक्ष्य इस धारणा को बदलना है कि ग्लोबल साउथ केवल “वनरेबल” है। इसके बजाय, यह भारत को जलवायु नवाचार का वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत करता है। उद्देश्य है कि जलवायु समाधान समावेशी हों, सुलभ हों व मुंबई के नागरिकों के वास्तविक जीवन अनुभवों से जुड़े हों। s citizens.

कैसे होगा: विचारों को क्रियान्वयन में बदलना

यह आंदोलन एक संरचित कार्यपथ के जरिए लक्ष्य हासिल करेगा

1, हब एंड स्पोक मॉडल: जो औपचारिक सम्मेलन में न आ सकने वालों को भी जोड़ता है।

2, इनोवेशन चुनौतियां (एनएसई के साथ): उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप और शोधकर्ताओं की पहचान, मेंटरिंग और निवेशकों से जोड़ने के लिए “स्पीड सीडिंग फोरम”।

3, युवा व लैंगिक समावेशन: गेमिफाइड लर्निंग से छात्रों की भागीदारी और महिलाओं के लिए क्लाइमेट लीडरशिप फेलोशिप।

4, सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व– समाधानों को व्यावसायिक, एनजीओ, सरकारी नीति और व्यवहार परिवर्तन श्रेणियों में बांटना, ताकि 360-डिग्री प्रभाव सुनिश्चित हो।

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