Budget से पहले तगड़ा झटका : आज से सिगरेट-तंबाकू-पान मसाला पर नया टैक्स, कीमतें बढ़ेंगी…जेब पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करने वाली हैं, लेकिन उससे ठीक पहले ही सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला इस्तेमाल करने वालों को बड़ा झटका दिया है।  1 फरवरी से इन सभी हानिकारक उत्पादों पर नए टैक्स लागू हो जाएंगे, जिसके बाद इनकी कीमतों में भारी उछाल आना तय है।  सरकार का यह कदम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और राजस्व बढ़ाने की दोहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अब लगेगा भारी-भरकम स्वास्थ्य उपकर

सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के साथ-साथ पान मसाले पर एक नया ‘स्वास्थ्य उपकर’ लगाने का फैसला किया है। यह नया टैक्स वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की সর্বোচ্চ 40 फीसदी की दर के ऊपर लगाया जाएगा। यह नई कर व्यवस्था 1 जुलाई 2017 से लागू 28 फीसदी जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगी।  दिसंबर में ही संसद ने इन नए टैक्सों को मंजूरी दे दी थी, जिन्हें अब 1 फरवरी से प्रभावी किया जा रहा है।

MRP के आधार पर तय होगा नया टैक्स

सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए भी कमर कस ली है। 1 फरवरी से चबाने वाले तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर आधारित मूल्यांकन की एक नई प्रणाली शुरू की जाएगी। इसके तहत, पैकेट पर लिखे गए खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर ही जीएसटी का निर्धारण होगा, जिससे निर्माता कंपनियों के लिए कर की चोरी करना मुश्किल हो जाएगा।

निर्माताओं पर नकेल, CCTV और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

नए नियमों के तहत पान मसाला बनाने वाली सभी कंपनियों को 1 फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत एक नया पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, निर्माताओं को अपनी सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाले वर्किंग सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे और उसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की पूरी जानकारी देनी होगी, जिससे किसी भी तरह की धांधली को रोका जा सके।

कुल मिलाकर, बजट से ठीक पहले सरकार का यह कदम तंबाकू उत्पादों के खिलाफ एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है। जहां एक तरफ इससे सरकारी खजाने को फायदा होगा, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई कीमतों के कारण लोग इन हानिकारक वस्तुओं के सेवन से हतोत्साहित हो सकते हैं।

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