
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जिसका ऐलान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया. इस ऐलान के साथ ही ट्रंप ने यह दावा भी कर दिया कि भारत अब अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद साथी रूस से तेल नहीं खरीदेगा. इस दावे के बाद भारत में सियासी और व्यापारिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी. सवाल उठ रहे थे कि क्या भारत अमेरिकी दबाव में अपने हितों से समझौता करेगा? लेकिन अब सरकार के सूत्रों ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए भारत का रुख साफ कर दिया है.
किसानों और डेयरी सेक्टर पर कोई समझौता नहीं
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ हुई इस ट्रेड डील में भारत अपने किसानों के हितों के साथ किसी भी सूरत में समझौता नहीं करेगा. कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर पहले भी सुरक्षित थे, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे. इसका सीधा मतलब है कि दूध, घी, और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों के आयात पर अमेरिका को कोई विशेष रियायत नहीं दी जाएगी. सरकार का मानना है कि यह सेक्टर देश के करोड़ों छोटे किसानों की रोजी-रोटी से जुड़ा है, और सस्ते अमेरिकी आयात से उन्हें होने वाले नुकसान को देखते हुए एक ‘रेड लाइन’ तय कर दी गई है. भारत अपनी किसी भी मुक्त व्यापार संधि (Free Trade Agreements) में इन सेक्टरों को नहीं खोलता है और इस बार भी अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत अपने किसान हितों पर अडिग है.
रूसी तेल पर भी भारत ने सुनाया दो टूक
डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी भारत ने अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ याद दिला दी है, जिसमें कहा गया था कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा. सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत अपने आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखकर तेल खरीदता है और भविष्य में भी खरीदता रहेगा. देश की जनता के हित को ध्यान में रखते हुए भारत को जहां से भी अच्छे भाव पर तेल मिलेगा, वह वहां से अपनी खरीदारी जारी रखेगा. इस मामले में किसी भी देश का दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.
क्या थे डोनाल्ड ट्रंप के दावे?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस डील की घोषणा करते हुए इसे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में एक बड़ा बदलाव बताया था. उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत में यह सहमति बनी है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका से अपना आयात बढ़ाएगा. हालांकि, इस डील पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गए पोस्ट में रूसी तेल का कोई जिक्र नहीं था. उन्होंने केवल टैरिफ कटौती पर खुशी जाहिर की थी.
टैरिफ घटने से भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
पहले भारत पर कुल 50 फीसदी का भारी-भरकम टैरिफ था, जिसमें 25 फीसदी बेसिक और 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ शामिल था. यह अतिरिक्त 25% शुल्क सीधे तौर पर रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया था, जिसे अब हटा दिया गया है. अब भारतीय उत्पादों पर सिर्फ 18 फीसदी का टैरिफ लगेगा, जिससे भारत को वैश्विक निर्यात बाजार में एक बड़ी बढ़त मिलेगी. इस नई टैरिफ दर के साथ भारत अपने कई प्रतिस्पर्धी एशियाई देशों से बेहतर स्थिति में आ गया है. उदाहरण के लिए, अब अमेरिका में इंडोनेशिया के उत्पादों पर 19%, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20%, और चीन के उत्पादों पर 34% टैरिफ लागू है, जबकि भारत के लिए यह दर सिर्फ 18% होगी.













