
New Delhi : चार साल से अधिक समय तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चले सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के संबंधों में अब लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद बढ़ने, उड़ानों की बहाली और वीजा प्रतिबंधों में ढील जैसे कदमों के बीच दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में रिकॉर्ड 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
नई दिल्ली में चीनी नववर्ष समारोह में बड़ा बयान
मंगलवार (3 फरवरी) को नई दिल्ली में आयोजित चीनी नववर्ष समारोह के दौरान भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में तियानजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफल मुलाकात के बाद द्विपक्षीय संबंधों को “नई शुरुआत” मिली है।
राजदूत ने कहा,
“दोनों देशों के बीच सभी स्तरों पर संवाद अधिक नियमित हुआ है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है और लोगों के बीच संपर्क भी अधिक सक्रिय हुआ है।”
12% से अधिक की बढ़ोतरी, निर्यात में भी इजाफा
राजदूत के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 155.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। चीन को भारत के निर्यात में 9.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव, विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग और तकनीकी एवं औद्योगिक कच्चे माल की बढ़ती मांग ने व्यापार वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि व्यापार संतुलन का मुद्दा अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
आत्मनिर्भरता की रणनीतियों में समानता
जू फेइहोंग ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आत्मनिर्भरता पर चीन का जोर भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल से मेल खाता है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश सकते हैं।
पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर
कोलकाता में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित स्प्रिंग फेस्टिवल (चीनी नववर्ष) 2026 समारोह में भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। चीनी महावाणिज्यदूत जू वेई ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय मित्रों की उपस्थिति और एक भारतीय कलाकार द्वारा चीनी मार्शल आर्ट की प्रस्तुति दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच पहले से कई सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं और भविष्य में और उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष विभिन्न स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं।
“हम चाहते हैं कि अधिक से अधिक चीनी पर्यटक भारत आएं और ‘अद्भुत भारत’ का अनुभव करें। भारतीय सरकार द्वारा वीजा प्रतिबंधों में ढील का हम स्वागत करते हैं,” जू वेई ने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एजेंसियों के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है।
वैश्विक व्यापार परिप्रेक्ष्य में भारत की सक्रियता
इसी बीच भारत ने अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ भी अपने व्यापारिक संबंध मजबूत किए हैं। हाल ही में भारत-अमेरिका के बीच लंबित व्यापार समझौते पर सहमति बनी है और पारस्परिक टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए गए।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका, यूरोप और चीन तीनों प्रमुख आर्थिक ध्रुवों के साथ समानांतर रूप से व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना भारत की संतुलित और बहुपक्षीय आर्थिक कूटनीति को दर्शाता है।
भारत-चीन व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि भले ही संबंधों में सुधार का संकेत देती हो, लेकिन रणनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के रिश्तों की दिशा आने वाले महीनों में कूटनीतिक संवाद और आपसी विश्वास पर निर्भर करेगी।













