
UP Property News: उत्तर प्रदेश में अगर आप कोई जमीन, मकान या किसी भी तरह की अचल संपत्ति खरीदने-बेचने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। योगी सरकार ने संपत्ति के सौदों में पारदर्शिता लाने और संदिग्ध लेनदेन पर नकेल कसने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसके तहत अब पूरे प्रदेश में किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है।
अब बिना पैन कार्ड नहीं होगी कोई रजिस्ट्री
प्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब किसी भी संपत्ति के सौदे के दौरान क्रेता और विक्रेता, दोनों को अपना पैन कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रणाली में भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं, जिसके चलते पैन कार्ड की जानकारी दर्ज किए बिना रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। इस कदम से सभी सौदों का एक डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा।
इंडो-नेपाल बॉर्डर पर विदेशी फंडिंग का बड़ा खेल
यह फैसला खास तौर पर इंडो-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए लिया गया है। पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों को यह इनपुट मिल रहे थे कि भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में बड़े पैमाने पर विदेशी फंडिंग के जरिए संपत्तियां खरीदी जा रही हैं। इन पैसों का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग में किए जाने की भी आशंका जताई गई थी।
एटीएस और ईडी की जांच में हुए थे चौंकाने वाले खुलासे
हाल ही में यूपी एटीएस की जांच में संत कबीर नगर के एक मौलाना का मामला सामने आया था, जिसके तार लंदन और पाकिस्तान से जुड़े थे। जांच में पता चला कि मौलाना के खातों में विदेश से करीब चार करोड़ रुपये आए, जिससे उसने मदरसे खोले और अपने परिजनों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां खरीदीं। इस मामले के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी कार्रवाई करते हुए मौलाना से जुड़े 18 खातों में जमा 94 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जब्त कर संपत्तियों को अटैच कर लिया था।
पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हुआ यह नियम
इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह नियम अब केवल इंडो-नेपाल बॉर्डर से सटे सात जिलों (गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर) तक ही सीमित न रखकर पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है।
बेनामी संपत्ति और अवैध फंडिंग पर लगेगी लगाम
सरकार का मानना है कि इस नए नियम से बेनामी संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी रोक लगेगी। पैन कार्ड अनिवार्य होने से आयकर विभाग आसानी से यह ट्रैक कर सकेगा कि किसी व्यक्ति द्वारा खरीदी जा रही संपत्ति उसकी आय के ज्ञात स्रोतों से मेल खाती है या नहीं। इससे एटीएस, ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को विदेशी फंडिंग और अवैध लेनदेन के कनेक्शन को खंगालने में भी बड़ी मदद मिलेगी। यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।












